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Monday, 28 September, 2026
होमएजुकेशनजली हुई इमारतें, टूटी टाइलें, परेशान छात्र: हिंसा वाली रात के बाद LPU के अंदर का हाल

जली हुई इमारतें, टूटी टाइलें, परेशान छात्र: हिंसा वाली रात के बाद LPU के अंदर का हाल

परीक्षाएं टाल दी गई हैं और 10 दिनों के लिए क्लास भी बंद हैं. दिप्रिंट ने सोमवार को देखा कि फगवाड़ा की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी से भारी पुलिस तैनाती के बीच छात्र अपना सामान लेकर बाहर निकल रहे थे.

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फगवाड़ा: पंजाब के फगवाड़ा में 600 एकड़ में फैली लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के प्रवेश द्वार के आसपास जली हुई धातु, टूटी टाइलें और उखड़े हुए पेड़ बिखरे पड़े हैं.

शनिवार और रविवार को हुई हिंसा के बाद बचे मलबे के बीच छात्र सावधानी से चलते हुए सोमवार सुबह अपना सामान लेकर मुख्य सड़क की ओर जा रहे हैं. वहां से वे बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन जाने के लिए तीन पहिया वाहन पकड़ रहे हैं और अपने घरों की ओर जा रहे हैं. हिंसा के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने 10 दिनों के लिए क्लास बंद कर दी हैं.

विशाल कैंपस को पीछे छोड़कर जाते हुए छात्र अपने पढ़ाई के भविष्य को लेकर परेशान नज़र आ रहे हैं.

CSE की सेकंड ईयर की एक स्टूडेंट ने पूछा, “उन्होंने कल कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSE) की बिल्डिंग जला दी. हम वहीं क्लास करते थे. क्या सिर्फ 10 दिनों में सब कुछ नॉर्मल हो जाएगा?” नाम नहीं बताने की शर्त पर उन्होंने कहा, “मैंने अपने माता-पिता को आगे की पढ़ाई करने के लिए मनाया है. अब अपने टियर-3 शहर वाले घर वापस जाना मेरे लिए बहुत मुश्किल है.”

कुछ कदम दूर अदिति अपना सामान लेकर खड़ी थीं. उन्होंने कहा, “कॉलेज प्रशासन ने हमें घर जाने के लिए कहा है, लेकिन हम सभी यहां के आसपास नहीं रहते. मैं आंध्र प्रदेश से हूं और इतनी कम समय की सूचना पर यात्रा का इंतजाम करना काफी मुश्किल है.” 21 साल की अदिति ने दिप्रिंट को बताया कि उन्हें सिर्फ चंडीगढ़ तक का टिकट मिल पाया है और उसके बाद उन्हें तत्काल टिकट लेने की कोशिश करनी होगी.

LPU कैंपस में भारी पुलिस तैनाती | फोटो: अलीशा दत्ता/दिप्रिंट
LPU कैंपस में भारी पुलिस तैनाती | फोटो: अलीशा दत्ता/दिप्रिंट

इस बीच, LPU की एक और छात्रा दृष्टि ने हिंसा के बाद कैंपस में रुकने को लेकर डर जताया. उन्होंने कहा, “यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के रहने वाले छात्र वापस जा सकते हैं और दूर के राज्यों से आने वाले छात्र यहीं रुक सकते हैं, लेकिन जब ऐसी हिंसा किसी भी समय हो सकती है तो कोई यहां कैसे रुक सकता है?”

दृष्टि हिंसा के दौरान गर्ल्स हॉस्टल के अंदर थीं. उन्होंने बताया कि कई “गुंडे” यूनिवर्सिटी परिसर में घुस आए और गर्ल्स हॉस्टल में भी जाने लगे. उन्होंने कहा, “हमने कुछ फ्रेशर्स को उनकी बालकनी के रास्ते कमरे से बाहर निकलने में मदद की और हम सभी पूरी रात एक साथ छिपकर बैठे रहे. इन लोगों के पास धारदार हथियार थे.”

फिलहाल पंजाब पुलिस के कई अधिकारी कैंपस में तैनात हैं. जब दिप्रिंट मौके पर पहुंचा, तो पुलिस ने यूनिवर्सिटी के बाहर की सड़क पर पूरी तरह बैरिकेड लगा रखे थे. सिर्फ उन वाहनों को जाने दिया जा रहा था जो छात्रों को बस स्टॉप और रेलवे स्टेशन तक ले जा रहे थे. किसी को भी कैंपस के अंदर जाने की अनुमति नहीं थी. छात्रों के अभिभावकों को भी मुख्य गेट के बाहर कतार में खड़े होकर छात्रों से मिलने और उन्हें अपने साथ ले जाने के लिए कहा गया था. कई पुलिस अधिकारी छात्रों के समूहों को बाहर तक ले जाते हुए भी दिखाई दिए. कुछ अधिकारी यूनिवर्सिटी के आसपास की छोटी दुकानों और रेस्टोरेंट में भी तैनात थे.

हिंसा से पहले क्या हुआ था

LPU से छात्रों का घर जाना सोमवार सुबह उस लंबी रात के बाद शुरू हुआ, जिसमें यूनिवर्सिटी में “आगजनी” और “हिंसा” हुई थी. यह हिंसा कैंपस में यौन उत्पीड़न के आरोप और इसके बाद एक छात्रा की आत्महत्या के आरोपों के बाद हुई.

यूनिवर्सिटी में 26 सितंबर (शनिवार) से तनाव की स्थिति थी. छात्रों ने आरोप लगाया था कि कॉलेज परिसर में एक निर्माण मजदूर ने एक छात्रा का यौन उत्पीड़न किया. न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर शुरू हुआ शांतिपूर्ण प्रदर्शन रविवार शाम तक हिंसक प्रदर्शन में बदल गया.

LPU के बीएससी स्टूडेंट कृष्ण राणा ने कहा, “रेडिट पर एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि गर्ल्स हॉस्टल 3 के अंदर एक छात्रा का यौन उत्पीड़न हुआ और उसने आत्महत्या कर ली. इसके बाद हमें छात्राओं के चिल्लाने की आवाज़ें सुनाई देने लगीं और फिर पुरुष छात्र भी इसमें शामिल हो गए, लेकिन रविवार तक यह सब शांतिपूर्ण था.”

राणा ने आगे दिप्रिंट को बताया कि शनिवार को छात्र कैंपस के अंदर जवाबदेही की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. उन्होंने कहा, “जिस समय गेट तोड़ा गया, उसी समय से बाहर के लोग परिसर में घुसने लगे और हंगामा करने लगे.”

छात्रों ने निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग करते हुए प्रदर्शन शुरू किया था. इसके बाद कई वरिष्ठ अधिकारी कैंपस पहुंचे और छात्रों को भरोसा दिलाया कि मामले की गहराई से जांच की जाएगी. जब प्रदर्शन नहीं रुका तो पुलिस ने फगवाड़ा के सतनामपुरा पुलिस थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की.

डीआईजी (जालंधर रेंज) नवीन सिंगला ने कहा, “हमने एफआईआर दर्ज की है और एक एसआईटी बनाई है. हम उनके प्रतिनिधियों के साथ मिलकर वैज्ञानिक जांच सहित पूरी जांच करेंगे. अगर किसी आरोपी की पहचान होती है तो हम निश्चित रूप से उसे गिरफ्तार करेंगे. हमारी टीम सीसीटीवी फुटेज देख रही है और अगर कोई सुराग मिलता है तो हम निश्चित रूप से कार्रवाई करेंगे.”

उन्होंने कहा, “छात्रों ने बताया कि कमरा नंबर 504 में एक लड़की थी. हम जांच करेंगे कि वह लड़की कौन थी और वास्तव में क्या हुआ था. यह सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी/वैज्ञानिक सबूतों के जरिए पता लगाया जाएगा.”

उन्होंने यह भी बताया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के पांच प्रतिनिधियों को जांच टीम में शामिल किया गया है.

यह घटना पटियाला स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी के छात्रों के प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई. वहां छात्रों ने आरोप लगाया था कि कैंपस में दो छात्राओं ने आत्महत्या कर ली और उनके शवों को ठिकाने लगा दिया गया. हालांकि, शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने कहा कि ये आरोप सही नहीं थे. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरमंदीप सिंह हंस ने कहा, “हमने मामले की जांच की और आरोप सही नहीं पाए गए. ऐसी कोई छात्रा नहीं मिली जिसने आत्महत्या की हो. छात्र भी अब जांच से संतुष्ट हैं.”

कैंपस के अंदर मचा हंगामा

पुलिस के छात्रों से बातचीत करने के बावजूद रविवार शाम तक प्रदर्शन बढ़ता गया और हिंसक हो गया.

नाम नहीं बताने की शर्त पर एक छात्रा ने कहा, “मुख्य गेट तोड़ दिया गया और इसके बाद कई गुंडे कॉलेज परिसर में घुस आए. उन्होंने यूनिमॉल में आग लगा दी, लैपटॉप चुरा लिए, कई इमारतों में आग लगा दी और ऐसा माहौल बना दिया जिसमें सुरक्षित रहना मुश्किल था. हमें फ्रेशर्स को बचाना पड़ा क्योंकि गुंडे उनके कमरों के दरवाजे खटखटाने लगे थे.”

CSE के छात्र सुखबीर ने आरोप लगाया कि ये गुंडे छोटे ट्रकों और वैन में कॉलेज परिसर में पहुंचे थे. उन्होंने कहा, “वे चिल्ला रहे थे और उनके पास हथौड़े और धारदार हथियार थे. कुछ के पास वॉकी-टॉकी भी थे. उन्होंने परिसर में तोड़फोड़ की, पत्थर फेंके और साफ तौर पर गलत इरादे से यूनिवर्सिटी में घुसे थे.” सुखबीर ने कहा कि जब तक “बाहरी लोग” परिसर में नहीं आए थे, तब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण था.

इसके बाद प्रदर्शन और हिंसा यूनिवर्सिटी के गेट के ठीक बाहर नेशनल हाईवे 44 तक फैल गई और इस व्यस्त सड़क पर जाम लग गया. इसके बाद जब पुलिस ने सड़क खाली कराने की कोशिश की तो भीड़ के सदस्यों ने कथित तौर पर पुलिस पर बोतलें फेंकीं.

LPU की एमबीए स्टूडेंट करमवीर सिंह ने कहा, “जब पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू किया तो कुछ लोगों ने वाहनों में आग लगा दी और सड़क को जाम रखना जारी रखा.” पुलिस के मुताबिक, तीन SUV, छह मोटरसाइकिल और पुलिस के कई वाहन क्षतिग्रस्त हुए.

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया

इस बीच, यूनिवर्सिटी प्रशासन यौन उत्पीड़न के आरोपों से लगातार इनकार कर रहा है.

LPU की रजिस्ट्रार मोनिका गुलाटी ने एक बयान में कहा, “कुछ असामाजिक तत्व सोशल मीडिया और दूसरे माध्यमों के जरिए पूरी तरह झूठी, बेबुनियाद और मनगढ़ंत अफवाहें फैला रहे हैं. इससे छात्रों के बीच बेवजह भ्रम पैदा हो रहा है और यूनिवर्सिटी के शांतिपूर्ण शैक्षणिक माहौल को खराब करने की कोशिश की जा रही है.”

इसके अलावा, LPU के वाइस चांसलर जसपाल सिंह संधू ने कहा कि रविवार सुबह तक उनके सामने यौन उत्पीड़न की कोई रिपोर्ट या शिकायत नहीं आई थी.

LPU ने नियमित कक्षाएं बंद कर दी हैं, मिड-टर्म परीक्षाएं टाल दी हैं और छात्रों को अपने घर जाने की सलाह दी है.

नोटिस में कहा गया, “प्रिय छात्रों, सभी छात्रों की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित जानकारी दी जाती है. पहला, 28 सितंबर 2026 से नियमित क्लास 10 दिनों के लिए बंद रहेंगी. दूसरा, मिड-टर्म परीक्षाएं अगली सूचना तक टाल दी गई हैं. तीसरा, छात्र अपने माता-पिता/अभिभावकों से सलाह लेकर इस 10 दिनों की अवधि में अपने घर जा सकते हैं, अगर वे ऐसा चाहते हैं. चौथा, जो छात्र कैंपस में रुकते हैं, उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए अपने हॉस्टल/रहने की जगह के अंदर रहने और बिना ज़रूरत बाहर निकलने या किसी भी तरह की अशांति वाली गतिविधि में शामिल होने से बचने की सलाह दी जाती है.”

नोटिस में छात्रों से शांत रहने, आधिकारिक निर्देशों का पालन करने और आगे की सभी जानकारी के लिए जुड़े रहने को भी कहा गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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