चंडीगढ़: फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में चल रहा छात्रों का प्रदर्शन रविवार शाम हिंसक हो गया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने पत्थर और ईंटें फेंकीं, जिसके बाद पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया.
पुलिस और छात्रों, दोनों के घायल होने की खबर है और पुलिस की जीप समेत कई गाड़ियों को जला दिया गया. यूनिवर्सिटी की इमारत के एक हिस्से में भी आग लगा दी गई. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कम से कम पांच छात्रों को हिरासत में लिया गया है और उनके पास से धारदार हथियार बरामद किया गया है.
यूनिवर्सिटी ने 28 सितंबर से 10 दिनों के लिए नियमित कक्षाएं बंद कर दी हैं और मिड-टर्म परीक्षाएं भी टाल दी हैं. यह यूनिवर्सिटी आम आदमी पार्टी (AAP) से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में आए नेता अशोक मित्तल की है. हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को घर वापस जाने की सलाह दी गई है.
#WATCH | Phagwara, Punjab | On students holding a protest at Lovely Professional University (LPU), Jalandhar Police Commissioner Satinder Singh says, "First of all, reports of disturbances in the hostels were merely rumors. All hostels have been checked, and there are no issues.… pic.twitter.com/UNNY6teotz
— ANI (@ANI) September 27, 2026
शनिवार और रविवार की बीच की रात से ही सैकड़ों छात्र जालंधर-अमृतसर नेशनल हाईवे पर मौजूद हैं. वे कैंपस के एक हॉस्टल में रहने वाली एक लड़की के कथित रेप के मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं.
दिनभर पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन के साथ कई दौर की बातचीत और अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद छात्रों ने अपना प्रदर्शन वापस लेने से इनकार कर दिया. छात्रों के मुताबिक, पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन पूरे मामले को दबाने की कोशिश कर रहे हैं और घटना की जानकारी उनके साथ साझा करने से इनकार कर रहे हैं.
24 घंटे से भी कम समय में दूसरी बार सैकड़ों युवाओं ने, जिनमें से कई ने चेहरे ढक रखे थे, लाठियों का इस्तेमाल कर यूनिवर्सिटी और उसके आसपास खड़ी गाड़ियों, इमारतों और दूसरी संपत्तियों में तोड़फोड़ की. सड़क के दोनों तरफ रास्ता बंद होने के कारण इंतज़ार कर रहे पत्रकारों और वाहन चालकों ने बताया कि युवाओं ने उनकी गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की. ऐसा लग रहा था कि युवाओं पर किसी का नियंत्रण नहीं था.
हालांकि, कई छात्र प्रदर्शनकारियों ने मीडिया से कहा कि चेहरे ढके हुए बाहरी लोग लाठी, हॉकी स्टिक, ईंटें और पत्थर लेकर प्रदर्शन में शामिल हो गए थे और हिंसा और आगजनी कर रहे थे.
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि यह “प्रदर्शन” यूनिवर्सिटी को बदनाम करने की पहले से बनाई गई साजिश का नतीजा है.
जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने मीडिया से कहा कि यूनिवर्सिटी परिसर के अंदर और बाहर फिर से जमा हो रहे छात्रों को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर बुलाया गया था.
रविवार रात करीब 11 बजे पुलिस की अतिरिक्त टीमों के पहुंचने के बाद स्थिति को नियंत्रण में लाया गया. प्रदर्शन कर रहे छात्रों को LPU कैंपस के अंदर जाने के लिए मजबूर किया गया और पुलिस ने गेट सुरक्षित कर लिए.
नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक शुरू होने के बाद, जालंधर के पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह के नेतृत्व में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों ने यूनिवर्सिटी में मार्च किया. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना था कि कोई बाहरी व्यक्ति या उपद्रवी यूनिवर्सिटी या हॉस्टल में दाखिल न हुआ हो. बाद में सिंह ने मीडिया से कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है.
छात्रों की मांगें पूरी कराने के लिए यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट और पुलिस से बातचीत करने के लिए छात्रों की एक संयुक्त कार्रवाई समिति बनाने की घोषणा की गई.
दिन में सिंगला ने मीडिया से कहा कि मुख्य शिकायत तीन दिन पहले एक छात्रा के कथित रेप से जुड़ी है. उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है और आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई गई है.
उन्होंने कहा कि कमरों में रहने वाली लड़कियों के बयान लेने के अलावा पुलिस कथित घटना से जुड़े सुराग जुटाने के लिए सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है.
उन्होंने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने कुछ प्रशासनिक मुद्दे भी उठाए हैं. इन मुद्दों पर पुलिस छात्र प्रतिनिधियों और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच बैठक कराने में मदद कर रही है. इन मांगों में लड़कियों के हॉस्टल की सुरक्षा बढ़ाना और वहां सिर्फ महिला स्टाफ की तैनाती शामिल है. उन्होंने कहा कि छात्रों के मुताबिक, पुरुष कर्मचारियों को बिना किसी स्टाफ सदस्य के साथ लड़कियों के हॉस्टल में जाने की अनुमति दी जाती थी.
SM संदेश और तबाही
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक मैसेज फैलाया गया था कि हॉस्टल में रहने वाली एक लड़की का एक इलेक्ट्रिशियन ने रेप किया और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसे घर वापस भेज दिया, जहां अगले दिन उसकी मौत हो गई.
रविवार रात करीब 2 बजे सैकड़ों छात्र हॉस्टल से बाहर निकले और ‘हमें न्याय चाहिए’ के नारे लगाते हुए यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर पहुंचे. आसपास के निजी घरों में रहने वाले छात्र भी न्याय की मांग करते हुए यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर जमा हो गए.
छात्रों ने यूनिवर्सिटी गेट के बाहर नेशनल हाईवे पर धरना दिया और ट्रैफिक रोक दिया. उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी ने कभी भी ऐसी किसी घटना को सामने नहीं आने दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि आत्महत्या के दो मामले सामने आए थे, लेकिन उन्हें भी दबा दिया गया.
गेट और हाईवे के पास सैकड़ों छात्रों के जमा होने के बाद उनमें से कुछ हिंसक हो गए और कैंपस में जमकर तोड़फोड़ करने लगे. उन्होंने इमारतों, अटेंडेंस काउंटर, साइन बोर्ड, सुरक्षा कियोस्क और एटीएम को नुकसान पहुंचाया. पार्क की गई मोटरसाइकिलों, साइकिलों और दूसरी संपत्तियों में आग लगा दी गई. प्रदर्शन कर रहे छात्रों में से एक छात्र प्रतिष्ठित आईएएफ फाइटर विमान पर भी चढ़ गया, जबकि दूसरे छात्र गेट के पास लगाए गए सेना के टैंकों पर चढ़ गए.
छात्र नेताओं ने दिन में पुलिस से कहा कि उन्होंने किसी तरह की हिंसा नहीं की है और वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं. उनका दावा था कि हिंसा और दंगा बाहरी लोगों ने किया, जो मुख्य गेट खुलने के बाद कैंपस में घुसने में कामयाब हो गए थे.
पुलिस के मुताबिक, प्रशासन के साथ बैठक और एफआईआर दर्ज होने के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों को हाईवे खाली करने और प्रदर्शन खत्म करने के लिए मनाने पर सहमति जताई थी. पुलिस ने छात्रों को यह भी चेतावनी दी थी कि गलत तरह के लोग प्रदर्शन का हिस्सा बन सकते हैं और इसके बाद स्थिति सभी के नियंत्रण से बाहर हो सकती है.
हालांकि, शाम को छात्र नेताओं ने प्रदर्शन कर रही भीड़ को बताया कि वे इस बात से संतुष्ट हैं कि पुलिस पूरी जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज में ऐसा कोई मामला नहीं दिखा है. लेकिन भीड़ ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया और बेहद गुस्से में आ गई. उन्होंने नेताओं की हूटिंग की और आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन ने उन्हें “खरीद लिया” है.
इसके बाद स्थिति एक बार फिर तनावपूर्ण हो गई. अचानक तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी और पुलिस ने देखा कि मुख्य सड़क पर उसकी गाड़ियों में आग लगी हुई है. पुलिस पर पत्थर और ईंटें फेंकी गईं, जिससे पुलिस को संभलने का मौका नहीं मिला. पत्थरों से कई पुलिसकर्मी घायल हो गए. इसके बाद छात्रों की बड़ी भीड़ पुलिसकर्मियों के पीछे दौड़ने लगी और पुलिसकर्मी खुद को बचाने के लिए भागे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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