नई दिल्ली: तीन टैंकर, तीन दिन में तीन हमले, तीन मौतें और ओमान के तट के पास 65 भारतीय नाविकों को बचाने की ज़रूरत. इन तीन हमलों ने नई दिल्ली में उन भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है जो “शैडो फ्लीट” यानी ऐसे जहाजों पर काम करते हैं जो नियमों और कानूनों के धुंधले क्षेत्रों में संचालन करते हैं.
इन सभी हमलों का तरीका लगभग एक जैसा रहा—पहले अमेरिकी नौसेना की चेतावनी और फिर जहाज को निष्क्रिय करने के लिए इंजन रूम पर सटीक हमला. ऐसे जहाजों को निशाना बनाया गया जो अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को तोड़कर ईरानी बंदरगाहों तक पहुंचने की कोशिश करते दिखे.
ओमान के तट के पास तेल टैंकरों पर हुए अमेरिकी हमलों का भारतीय नाविक समुदाय पर बड़ा असर पड़ा है. 10 जून को MT Settebello पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई. भारतीय सरकार ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए इन हमलों की कड़ी निंदा की है. साथ ही, बुधवार को भारत में अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब कर पलाऊ ध्वज वाले जहाज पर की गई कार्रवाई के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया.
मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने दिप्रिंट को बताया, “कम से कम एक जहाज ने अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश की. उसने अपना ट्रांसपोंडर बंद कर दिया था. कप्तान सैन्य चेतावनियों के बावजूद जानबूझकर ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहा था.”
इन तीनों जहाजों में से कोई भी भारतीय ध्वज वाला नहीं था. इनमें से दो जहाज पलाऊ ध्वज वाले थे, जबकि एक गिनी-बिसाउ के झंडे के तहत चल रहा था. भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर अमेरिकी सैन्य हमला नहीं हुआ है. हालांकि, इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू किए जाने के बाद से करीब 13 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में फंसे हुए हैं.
हमले का शिकार हुए जहाजों में से दो को ईरान की “शैडो फ्लीट” का हिस्सा माना जाता है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरानी तेल ढोते हैं. अमेरिकी कार्रवाई ने भारतीय सरकार के भीतर चिंता बढ़ा दी है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारतीय नाविकों की संख्या लगभग 1 लाख से बढ़कर 3.5 लाख हो गई है. यह दुनिया के कुल नाविक कार्यबल का करीब 12 प्रतिशत है.
उस व्यक्ति ने कहा, “इसके बाद बड़ी संख्या में भारतीय नाविकों की भर्ती शैडो फ्लीट जहाजों पर होने लगी. कुछ लोग ज्यादा वेतन के कारण जोखिम जानते हुए भी यह काम स्वीकार करते हैं, जबकि कुछ को बेईमान एजेंटों के जरिए बिना जानकारी के भर्ती किया जाता है, क्योंकि चालक दल की मांग लगातार बनी हुई है.”
अमेरिका ने 13 अप्रैल को ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी लगा दी थी, जबकि वॉशिंगटन और तेहरान युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत जारी रखे हुए हैं.
शैडो फ्लीट क्या है?
ऐसे जहाज जो प्रतिबंधों से बचने, सुरक्षा या पर्यावरण नियमों का पालन न करने, बीमा खर्च से बचने या अन्य अवैध गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होते हैं, उन्हें “शैडो फ्लीट” या “डार्क फ्लीट” कहा जाता है. दिसंबर 2023 से यह परिभाषा अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) द्वारा स्वीकार की गई है.
शैडो फ्लीट दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है क्योंकि पिछले पांच वर्षों में अमेरिका और कुछ यूरोपीय देशों ने रूसी, ईरानी और वेनेजुएला के कच्चे तेल को ढोने वाले टैंकरों पर प्रतिबंध लगाए हैं.
फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर किए गए आक्रमण को वह मोड़ माना जाता है, जिसके बाद ऐसे जहाजों की संख्या तेज़ी से बढ़ी. अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के एकतरफा प्रतिबंधों के कारण इन जहाजों के लिए उनके जलक्षेत्रों में संचालन करना मुश्किल हो गया, लेकिन दुनिया के बड़े तेल निर्यातकों का तेल ढोने की जरूरत के कारण ये जहाज अब भी काम कर रहे हैं.
शैडो फ्लीट जहाज अक्सर “असुरक्षित संचालन” करते हैं और आमतौर पर “अंतरराष्ट्रीय नियमों और उद्योग मानकों” का पालन नहीं करते. वे जानबूझकर फ्लैग स्टेट और पोर्ट स्टेट कंट्रोल की जांच से बच सकते हैं, पर्याप्त बीमा नहीं रखते, निरीक्षण से बचते हैं, अस्पष्ट कॉर्पोरेट ढांचे के तहत काम करते हैं और कई बार अपने ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एआईएस) या ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं ताकि उनकी असली पहचान छिपी रहे.
होर्मुज़ में शैडो फ्लीट
अमेरिका द्वारा निशाना बनाए गए तीन जहाजों में पहला MV Marivex माना जाता है कि उसने अपना AIS सिस्टम बंद कर दिया था और कथित तौर पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी तोड़कर ईरानी जलक्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने एक बयान में कहा कि कई चेतावनियों के बावजूद खाली तेल टैंकर ने आदेश मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उसे निष्क्रिय करने के लिए हमला किया गया.
जहाज पर मौजूद सभी 24 नाविकों को ओमान नौसेना ने सुरक्षित बचा लिया. इस जहाज पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लगे हुए थे. हालांकि, नाकेबंदी तोड़ने की कथित कोशिश ने नई दिल्ली में चिंता बढ़ा दी है. इसी कारण गुरुवार को नौवहन महानिदेशालय ने सभी भारतीय नाविकों से संघर्ष प्रभावित समुद्री क्षेत्रों से गुजरते समय “अत्यधिक सावधानी बरतने” और “सभी समुद्री सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करने” की अपील की.
दूसरे सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, “हकीकत यह है कि इन जहाजों पर काम करने वाले नाविक भारतीय हैं और भारत सरकार ने यह मुद्दा अमेरिकियों के सामने उठाया है. लेकिन जो जहाज इस धुंधले क्षेत्र में काम कर रहे थे, उन्होंने संभावित परिणाम जानते हुए भी जोखिम उठाया.”
Settebello के प्रबंधक, दुबई स्थित IOS Marine FZE, ने गुरुवार को जारी बयान में ईरानी तेल से किसी भी संबंध से साफ इनकार किया. कंपनी ने अमेरिकी नौसेना से यह साबित करने को कहा कि चालक दल ने ऐसा कौन सा आदेश नहीं माना, जिसके कारण हमला किया गया.
फिर भी मुख्य चिंता शैडो फ्लीट के संचालन को लेकर बनी हुई है. जहाज कप्तानों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाला लंदन स्थित संगठन इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ शिपमास्टर्स एसोसिएशंस (IFSMA) कहता है कि दुनिया के कम से कम 10 प्रतिशत टैंकर शैडो फ्लीट का हिस्सा हैं.
IFSMA के अनुसार भारत, चीन और तुर्किये शैडो फ्लीट के जहाजों के प्रमुख अंतिम गंतव्य हैं. फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी थी. उस समय अमेरिकी सरकार ने वैश्विक तेल बाजार को स्थिर रखने के लिए ऐसा करने का अनुरोध किया था. रूसी तेल पर लगे प्रतिबंधों के कारण भारत तक तेल पहुंचाने वाले शैडो फ्लीट जहाजों की संख्या बढ़ी है.
इसके बावजूद भारतीय सरकार ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए इन हमलों को गंभीरता से लिया है. कड़ी निंदा के अलावा, भारत ने गुरुवार को अमेरिका से ऐसी कार्रवाई रोकने की मांग भी की.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)