हांगझोउ, 27 सितंबर ( भाषा ) भारत की प्रतिभाशाली वुशु खिलाड़ी रोशिबिना देवी ने बुधवार को यहां वियतनाम की थि थु एनगुएन को हराकर एशियाई खेलों के 60 किग्रा के फाइनल में प्रवेश किया जिससे भारत का इस स्पर्धा में कम से कम रजत पदक पक्का हो गया।
रोशिबिना ने अपनी प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं देते हुए 2-0 से मुकाबला जीत लिया और अब वह गुरुवार को स्वर्ण पदक के मैच में चीन की वु जियावेई से भिड़ेंगी।
बल्कि यह रोशिबिना की ऐतिहासिक उपलब्धि है क्योंकि वह संध्यारानी देवी के बाद वुशु स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली दूसरी भारतीय हैं। संध्यारानी ने 2010 ग्वांग्झू एशियाड में यह उपलब्धि हासिल की थी।
रोशिबिना ने हालांकि 2018 जकार्ता एशियाड में इसी वजन वर्ग में कांस्य पदक जीता था।
रोशिबिना ने फाइनल में पहुंचने की उपलब्धि को अरूणाचल प्रदेश की उन तीन खिलाड़ियों को समर्पित किया जो वीजा नहीं मिलने के कारण चीन की यात्रा नहीं कर सकीं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपनी तीन दोस्तों के लिए (स्वर्ण पदक) जीतना चाहती हूं जो यहां नहीं आ सकीं। ओनिलू टेगा मेरे साथ ही रहती थी। हम अकसर एक साथ ट्रेनिंग करते थे और हम अच्छी दोस्त हैं। ऐसे बड़े टूर्नामेंट में ऐसे दोस्तों का होना अहम होता है जिनके साथ आप सहज हो।’’
वह नेमान वांग्सू, ओनिलू टेगा और मेपुंग लामगू का जिक्र कर रही थी।
पुरुष वर्ग में रोहित जाधव डाओशू फाइनल में निराशाजनक आठवें स्थान पर रहे ।
23 वर्ष के जाधव ने 9 . 413 स्कोर किया जबकि चीन के जिजाओ चांग ( 9 . 826) और चीनी ताइपै के चेन मिंग वांग ( 9 . 736 ) पहले और दूसरे स्थान पर रहे ।
डाओशू में खिलाड़ी तलवार का इस्तेमाल करते हैं और अंक उसकी मूवमेंट, कुल प्रदर्शन और कठिनाई के स्तर के आधार पर दिये जाते हैं ।
अब जाधव गुंशू फाइनल खेलेंगे जिसमें खिलाड़ी सफेद वैक्स वुड से बनी छड़ी का इस्तेमाल करते हैं ।
भाषा नमिता पंत
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