नई दिल्ली: गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी के ब्लॉक सी की निवासी मंजिरी चतुर्वेदी बुधवार सुबह हमेशा की तरह वॉक पर निकली थीं. तभी एक जोरदार धमाके ने इलाके की शांति भंग कर दी.
सुबह बाहर निकले लोगों को समझने में थोड़ा समय लगा कि क्या हो रहा है.
मंजिरी ने दिप्रिंट से कहा, “अचानक हमने एक फ्लोर से आग निकलती देखी. उस समय हमें समझ नहीं आया (क्या हो रहा है). हम सब भागकर सुरक्षित जगह पर गए. कई लोग बाथरूम में थे, कुछ किचन में फंस गए थे.”
इसके बाद उन्होंने व्हाट्सऐप पर मैसेज करके आसपास के सभी लोगों को अलर्ट किया. आग की तस्वीरें रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ग्रुप में शेयर की गईं ताकि लोग बाहर निकल सकें.
जल्द ही कई लोग लिफ्ट और सीढ़ियों से बाहर निकलने लगे. “हम इतने जागरूक थे कि हमने लाइट और गैस बंद कर दी. हमने ध्यान रखा कि हमारी तरफ से आग बढ़ने का कोई कारण न बने.”
कुछ ही मिनटों में सोसाइटी के लोग आग बुझाने के उपकरण तैयार करने लगे. वैशाली फायर स्टेशन कुछ ही किलोमीटर दूर होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तुरंत इंदिरापुरम की इस हाई-राइज तक पहुंच गईं.

इसके बावजूद आग ऊपर की मंजिलों में फैल गई और कुछ ही समय में आठ फ्लैट पूरी तरह जल गए. आग इतनी तेज़ थी कि निवासियों के अनुसार वह गाजियाबाद-मेरठ एक्सप्रेसवे से भी दिखाई दे रही थी, जो सोसाइटी के किनारे पर है.
पड़ोसियों और निवासियों ने बताया कि उन्होंने ज़मीन पर पिघला हुआ कांच गिरते और एसी के हिस्सों को जलते हुए देखा. घबराहट के बीच प्रभावित टावर के कमरे और सीढ़ियां काले धुएं से भर गए. लोगों ने डर के मारे चीखना और मदद के लिए पुकारना शुरू कर दिया.
इस बीच, आग बुझाने की कोशिश कर रहे फायर कर्मियों और निवासियों को संकरी गलियों, रुकावटों, कम पानी के प्रेशर और बंद घरों जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि आग तेज़ी से फैल रही थी.
कई लोगों ने एक्स और फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी परेशानियां साझा कीं, खासकर यह कि फायर विभाग आग पर काबू नहीं पा पा रहा था. मौके के वीडियो में दिखा कि हाइड्रोलिक सिस्टम टावर से काफी दूर लगाए गए थे, जबकि कर्मी पूरी कोशिश कर रहे थे.
बाद में गाजियाबाद के चीफ फायर ऑफिसर (CFO) ने कहा कि संकरी गलियों और रुकावटों के कारण हाइड्रोलिक सिस्टम सही जगह पर नहीं लगाया जा सका. CFO राहुल कुमार ने दिप्रिंट को बताया कि सुबह 8:50 बजे कॉल मिली थी. वैशाली फायर स्टेशन से पांच फायर टेंडर भेजे गए और बाद में 12 और बुलाए गए. फायर ब्रिगेड के दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म भी लगाए गए.
उन्होंने कहा कि मौके पर 70 फायरफाइटर, पुलिस, मेडिकल टीम और SDRF मौजूद थी, “आग 8वीं, 9वीं और 10वीं मंजिल से शुरू हुई. धीरे-धीरे बाकी मंजिलों में फैल गई. यह आग सोसाइटी के ब्लॉक D में लगी थी.”
फायर विभाग के अनुसार इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ. शुरुआती जांच में आग का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है. नौवीं मंजिल पर काफी ज्वलनशील और निर्माण सामग्री रखी हुई थी.
गाजियाबाद के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि पुलिस ने भीड़ को संभाला और लोगों को बाहर निकालने में मदद की. उन्होंने कहा कि पुलिस और फायर विभाग मिलकर आग के असली कारण की विस्तृत जांच करेंगे.
आपातकालीन कर्मचारी
RWA के वाइस-प्रेसिडेंट दिनेश त्यागी ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही सोसाइटी की मेंटेनेंस टीम और सिक्योरिटी स्टाफ को तुरंत सक्रिय किया गया.
उन्होंने दिप्रिंट को बताया, “उन्हें पता है कि सभी फायर फाइटिंग उपकरण कहां रखे हैं. उन्हें यह भी पता है कि इन्हें कैसे इस्तेमाल करना है. हम उन्हें लगातार ट्रेनिंग देते हैं. हम नियमित मॉक ड्रिल भी करते हैं. इसलिए हमारे स्टाफ ने जल्दी प्रतिक्रिया दी.”
शुरुआत में केवल कुछ ही फायर टेंडर पहुंचे थे और हवा के कारण आग तेजी से फैल गई.
त्यागी ने कहा, “जो फायर टेंडर आया था, उसमें इतना प्रेशर नहीं था कि ऊपरी मंजिलों तक पानी पहुंच सके. फिर बड़े टेंडर को बुलाया गया, जिसमें सीढ़ी थी. वह थोड़ी देर से आया. घने धुएं के बावजूद निवासी घर-घर जाकर लोगों को बाहर निकाल रहे थे.”

त्यागी ने बताया कि दो-तीन महीने पहले RWA ने सोसाइटी के पूरे फायर फाइटिंग सिस्टम को अपग्रेड किया था. सभी पाइप और होज बदले गए थे और नए वाटर मोटर लगाए गए थे. उन्होंने कहा कि निवासियों ने घरों का पानी बंद कर दिया और उसे आग बुझाने में इस्तेमाल किया.
त्यागी ने कहा, “फायर सर्विस ने हमारे पानी का इस्तेमाल किया क्योंकि शुरुआत में वह प्रभावित मंजिलों तक नहीं पहुंच पा रहे थे.”
निवासियों ने बताया कि हाइड्रोलिक सिस्टम ऊंचाई तक नहीं पहुंच सका क्योंकि वह प्रभावित जगह से थोड़ा दूर था. सोसाइटी के निवासी रितेश ने कहा कि शुरुआत में मूवमेंट और तालमेल में दिक्कत थी, लेकिन धीरे-धीरे फायर कर्मियों ने स्थिति संभाल ली.
उन्होंने कहा, “सोसाइटी के सामने बना गार्डन पहुंचने में बाधा बन रहा था. नोएडा से और फायर टेंडर और क्रेन भी आईं. फायर टेंडर के प्रेशर मोटर सिर्फ 7वीं मंजिल तक ही पानी पहुंचा पा रहे थे.”
रितेश ने बताया कि निवासियों ने स्विमिंग पूल का पानी मोटर से निकालकर और पास के C ब्लॉक से भी पानी लेकर आग बुझाने में मदद की.
लिमिटेड टाइम, इंफ्रा की दिक्कत
सीएफओ कुमार ने कहा कि फायर विभाग को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा.
उन्होंने कहा, “पांच-छह फ्लैट ऐसे थे जिनमें डबल गेट थे, जिनमें लकड़ी के दरवाजे भी शामिल थे. हमारी टीमों ने घर के अंदर जाने के लिए इन्हें तोड़ा. एक और समस्या बालकनी में लगी PVC शीट्स थीं, और काफी लकड़ी का काम भी किया गया था. कम से कम चार-पांच फ्लैट में लोहे के गेट थे, यह अपने आप में एक बड़ी चुनौती थी.”

उन्होंने कहा कि संकरी गलियों, पार्क और कॉम्प्लेक्स की सीमा पर बने स्विमिंग पूल के कारण हाइड्रोलिक सिस्टम लगाने के लिए सही एंगल तय करना मुश्किल था. कुमार ने बताया कि विभाग का हाइड्रोलिक सिस्टम 20 मंजिल तक पहुंच सकता है.
“कम समय और इंफ्रा की दिक्कतों के कारण हमें सोसाइटी के फायर फाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ा. एक टीम रेस्क्यू और गेट तोड़ने का काम कर रही थी. दूसरी टीम पाइप कनेक्टिविटी संभाल रही थी. निवासियों ने भी काफी मदद की.”
RWA कमियों का आकलन करेगी
सोसाइटी मैनेजर विकास कुमार ने कहा कि सोसाइटी के कम से कम सात-आठ फायर हाइड्रेंट काम कर रहे थे. उन्होंने बताया कि सोसाइटी में 40 फीट की सीढ़ी भी है.
कुमार ने कहा कि RWA नियमित ऑडिट करती है और सिस्टम को अपग्रेड किया गया है. NOC छह महीने पहले पूरा हुआ था. “सभी पाइपलाइन, हाइड्रेंट और होज पाइप नए हैं. हमारे पास पर्याप्त डीजल था और सभी मोटर अच्छे प्रेशर पर काम कर रहे थे.”
RWA ने कहा कि उन्होंने सर्वे किया है और सभी कमियों की एक सूची तैयार की है, जिसमें रास्ता (पाथवे) भी शामिल है.

त्यागी ने कहा, “हमें अपनी कमियों के बारे में भी पता चला. जैसे कि हम समय पर पार्क की गई गाड़ियों को नहीं हटा पाए, ताकि फायर टेंडर के लिए जगह बन सके. हमारी सीमा यह थी कि हमारे पास सभी टेंडर खड़े करने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी. यह जगह बिल्डर के प्लान के अनुसार बनी है. यहां पार्क की जगह ड्राइववे होना चाहिए था. गार्डन की वजह से एक तरफ से पहुंच सीमित हो गई.”
पिछले महीने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम में आग लगी थी, जहां फायर विभाग को संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाके के कारण काम करने में दिक्कत हुई थी, जिससे बड़े इमरजेंसी वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाए.
एक बयान में उत्तर प्रदेश पुलिस ने कहा कि सूचना मिली थी कि गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी के फ्लैट्स में कुछ लोग फंसे हुए हैं.
कुल 17 फायर टेंडर, दो हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और लगभग 70 फायरफाइटर्स ने कठिन हालात में आग पर काबू पाया और कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. इसके अलावा ऊपरी मंजिलों पर फंसी महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी सुरक्षित बचाया गया.
पुलिस के बयान में कहा गया, “गाजियाबाद फायर सर्विस की तेज कार्रवाई और कुशल रणनीति के कारण आग को दूसरे फ्लैट्स में फैलने से रोका गया. इस पूरे घटनाक्रम में किसी की जान नहीं गई.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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