(अजय मसंद)
नयी दिल्ली, 10 जनवरी (भाषा) युवा निशानेबाज नैंसी के लिए पीठ की चोट वरदान की तरह साबित हुई जिन्होंने बुधवार को जकार्ता में एशिया ओलंपिक क्वालीफायर में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर की अब तक की सबसे बड़ी ट्रॉफी हासिल की।
नैंसी 2018 में जब बामुश्किल 13 साल और कुछ महीने की थी तब एक कच्ची सड़क पर पैर फिसलने से उसे पीठ में गंभीर चोटें आईं जिसके कारण वह लगभग एक महीने तक बिस्तर पर पड़ी रही।
हालांकि 19 वर्षीय खिलाड़ी ने बुधवार को पूरे धैर्य और साहस के साथ सटीक निशाना लगाते हुए हमवतन ओलंपियन इलावेनिल वलारिवान और कई अंतरराष्ट्रीय शीर्ष निशानेबाजों को पछाड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता।
नैंसी के पिता आजाद सिंह ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र से ‘पीटीआई’ को बताया, ‘‘नैंसी अपनी सहपाठी को छोड़ने के लिए घर से बाहर निकली ही थी कि एक पथरीली सड़क पर उसका पैर फिसल गया और वह गंभीर रूप से गिर गई। वह एक महीने तक बार-बार अस्पताल में भर्ती होती रही।’’
पेशे से किसान आजाद ने कहा, ‘‘लगभग एक महीने के आराम और रिहैबिलिटेशन के बाद जब वह स्कूल दोबारा गई तो उसे पीटी (शारीरिक प्रशिक्षण) कक्षाओं में भाग लेने के लिए कहा गया तो उसने अपने शिक्षक को इससे छूट देने को कहा क्योंकि वह गिरने के कारण स्लिप डिस्क से पीड़ित थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘शिक्षक ने बदले में उसे एक ऐसा खेल चुनने के लिए कहा जो पीटी जितना ‘कड़ा’ नहीं हो। सौभाग्य से स्कूल में निशानेबाजी कोच वहां से गुजर रहा था और उसने नैंसी से पूछा कि क्या उसे इस खेल में दिलचस्पी होगी।’’
एक फौजी के बेटे आजाद ने कहा, ‘‘नैंसी ने तब से पीछे मुड़कर नहीं देखा और वह इतनी समर्पित है कि उसने हमें विश्वास दिला दिया है कि वह इस साल पेरिस ओलंपिक में प्रतिस्पर्धा करेगी।’’
भाषा सुधीर नमिता
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