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Wednesday, 9 September, 2026
होमरिपोर्टउत्तराखंड में 1,314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, दिसंबर तक पुराने कचरे के उपचार का लक्ष्य

उत्तराखंड में 1,314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, दिसंबर तक पुराने कचरे के उपचार का लक्ष्य

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), देहरादून ने बुधवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, पुराने कचरे और डंपसाइट के उपचार, कचरा अलग करने, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय निकायों की भूमिका की जानकारी दी गई.

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देहरादून: पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने कहा कि ठोस कचरा प्रबंधन के लिए जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है. उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ कचरा भी बढ़ रहा है, इसलिए वैज्ञानिक और डेटा आधारित व्यवस्था को जमीनी स्तर तक पहुंचाना जरूरी है.

प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), देहरादून ने बुधवार को सचिवालय मीडिया सेंटर में ‘ठोस अपशिष्ट प्रबंधन’ पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026, पुराने कचरे और डंपसाइट के उपचार, कचरा अलग करने, वायु प्रदूषण नियंत्रण और स्थानीय निकायों की भूमिका की जानकारी दी गई.

डॉ. धकाते ने बताया कि नए नियमों के तहत कचरे को चार हिस्सों- गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे में अलग करना होगा. बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है. कचरे के संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निपटान की ऑनलाइन निगरानी, डिजिटल रजिस्ट्रेशन और रिपोर्टिंग की व्यवस्था भी की गई है.

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के 108 शहरी स्थानीय निकायों के 1,314 वार्डों में 100% डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण हो रहा है. राज्य में रोज करीब 1,930.85 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसमें से 1,804.59 मीट्रिक टन यानी 93.46% कचरे का रोज प्रसंस्करण किया जा रहा है. राज्य में 61 पुराने कचरे वाली साइट और डंपसाइट चिन्हित हैं. करीब 23.34 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से 12.70 लाख मीट्रिक टन यानी 54.41% का उपचार हो चुका है. दिसंबर 2026 तक पुराने कचरे के उपचार और डंपसाइट रेमेडिएशन में तेजी लाने का लक्ष्य है.

अपर निदेशक, शहरी विकास प्रवीण कुमार ने कहा कि चारधाम और अन्य पर्यटन क्षेत्रों में बढ़ती तीर्थयात्रा और पर्यटन को देखते हुए कचरा संग्रहण, अलग करने, परिवहन और वैज्ञानिक प्रसंस्करण के लिए विशेष योजना बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि स्वच्छ हवा और बेहतर कचरा प्रबंधन के लिए सरकार, स्थानीय निकायों, जनप्रतिनिधियों, संस्थानों, कारोबारियों और नागरिकों की सामूहिक भागीदारी जरूरी है.

उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों और द्वीपों के लिए ठोस कचरा प्रबंधन के विशेष प्रावधान किए गए हैं. इनमें पर्यटकों से यूजर फीस लेना, गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे के लिए विशेष संग्रहण केंद्र बनाना और होटल-रेस्तरां में गीले कचरे का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण शामिल है. नियमों को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर समितियां बनाने का भी प्रावधान है.

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