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Wednesday, 9 September, 2026
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पंजाब की मोस्ट वांटेड लिस्ट, जेलब्रेक और अब राजनीति: गुरप्रीत सेखों का गैंग वॉर से AAP तक का सफर

सेखों के AAP में शामिल होने के बाद पार्टी की कड़ी आलोचना हो रही है. विपक्ष सवाल उठा रहा है कि आपराधिक इतिहास के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी ने उसे अपने साथ क्यों शामिल किया.

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चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को फिरोजपुर जिले के जीरा में एक रैली के दौरान पूर्व गैंगस्टर और राजनीति में आने की कोशिश कर रहे गुरप्रीत सिंह सेखों का आम आदमी पार्टी (AAP) में स्वागत किया और उसे पार्टी का पटका पहनाया.

नवंबर 2016 में हाई-सिक्योरिटी नाभा जेल से भागने के बाद पंजाब के सबसे ज्यादा वांटेड लोगों में शामिल होने से लेकर राज्य के मुख्यमंत्री के साथ मंच साझा करने तक, सेखों की अपनी छवि बदलने की यह यात्रा 10 साल से भी कम समय में पूरी हुई है.

सेखों के AAP में शामिल होने के बाद पार्टी की कड़ी आलोचना हो रही है. विपक्ष सवाल उठा रहा है कि उसके आपराधिक इतिहास के बावजूद सत्तारूढ़ पार्टी ने उसे अपने साथ क्यों शामिल किया.

गैंगवार

फिरोजपुर के मुदकी का रहने वाला 49 साल का सेखों एक अमीर परिवार से आता है. उसके परिवार के पास खेती की ज़मीन और ईंट-भट्ठे थे. उसने फ्लाइट अटेंडेंट की ट्रेनिंग ली थी, लेकिन करीब 2010 में गुरशाहिद सिंह उर्फ ‘शेरा खुब्बन’ और जयपाल भुल्लर के गैंग में शामिल हो गया. उस समय गैंग में करीब 20 लोग थे और यह फिरोजपुर-बठिंडा-मुक्तसर इलाके में सक्रिय था.

इसके बाद सेखों जल्द ही पंजाब में करीब एक दशक तक चले खूनी गैंगवार में फंस गया. इसकी शुरुआत जुलाई 2012 में बॉडीबिल्डर और जिम ट्रेनर से गैंगस्टर बने गुरशाहिद सिंह उर्फ हैप्पी देवड़ा की हत्या से हुई.

इस हत्या का आरोपी शेरा खुब्बन उसी साल पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. इसके बाद खुब्बन गैंग ने जयपाल को अपना नेता चुना. जयपाल बाद में राजस्थान चला गया, जबकि सेखों ने कथित तौर पर पंजाब में गैंग की कमान संभाली.

सेखों के खिलाफ पहला मामला उसी साल आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज हुआ और यहीं से पुलिस के साथ उसकी लुका-छिपी शुरू हो गई.

जनवरी 2015 में उसने अपने गैंग के कम से कम 12 सदस्यों के साथ एक और गैंगस्टर सुखवीर सिंह उर्फ सुखा काहलवां की कथित तौर पर हत्या कर दी.

फगवाड़ा के पास पुलिस हिरासत में ले जाए जा रहे काहलवां की सनसनीखेज हत्या के बाद “सेखों मुदकी गैंग” पंजाब के मोस्ट वांटेड लोगों की सूची में सबसे ऊपर पहुंच गया. पुलिस का मानना था कि हत्यारों ने काहलवां के शव के आसपास नाच भी किया और कथित तौर पर पूरी घटना का वीडियो बनाया.

मार्च 2015 में इस मामले में सेखों को गिरफ्तार कर लिया गया. नाभा की हाई-सिक्योरिटी जेल में बंद सेखों के बारे में कहा जाता है कि वह वहां बंद खालिस्तान लिबरेशन फोर्स के आतंकी हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू के करीब आ गया था. मिंटू ने सेखों को धार्मिक बनने और एक सच्चा सिख बनने के लिए प्रभावित किया.

नवंबर 2016 में पुलिस की वर्दी पहने हथियारबंद लोगों ने हाई-सिक्योरिटी नाभा जेल पर हमला कर दिया, गोलियां चलाईं और छह कैदियों को छुड़ा लिया. सेखों भी उनमें से एक था.

काहलवां की हत्या के मामले में जेल में बंद सेखों के गैंग के सदस्य हरजिंदर भुल्लर उर्फ विक्की गाउंडर, कुलप्रीत सिंह उर्फ नीटा देओल और अमनदीप ढोटियां भी भाग गए. मिंटू और उसका साथी KLF का कश्मीर सिंह गलवाड़ी भी भाग निकले.

यह जेलब्रेक पंजाब में उभरते गैंगस्टर-आतंकी गठजोड़ का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया.

सेखों सिर्फ भागने वाले लोगों में से एक नहीं था. पुलिस की जांच और बाद की अदालती कार्यवाही के अनुसार, उसने नाभा जेल के अंदर से जेलब्रेक की योजना बनाने में भी मदद की थी, जबकि बाहर मौजूद उसके साथियों ने हमला किया था.

उसके चचेरे भाई मनवीर सेखों और राजविंदर सिंह उर्फ राजा सुल्तान पर भी इस ऑपरेशन में मदद करने का आरोप लगा था. बाद में गिरफ्तार किए गए पालविंदर सिंह पिंडा ने जांचकर्ताओं को बताया कि सेखों और गैंगस्टर प्रेम लाहोरिया ने जेलब्रेक की साजिश रची थी.

फरवरी 2017 में सेखों को उसके तीन साथियों के साथ मोगा के धूड़िके से गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने कहा कि जेलब्रेक के बाद वह राजस्थान और मध्य प्रदेश में अलग-अलग पहचान और हुलिया बदलकर घूम रहा था. उसकी गिरफ्तारी दो घंटे चले ऑपरेशन के बाद हुई, जिसमें कई हथियार बरामद किए गए.

जेलब्रेक के एक दिन के अंदर ही मिंटू को गिरफ्तार कर लिया गया था और 2018 में पटियाला जेल में दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई. नीटा को जनवरी 2017 में और ढोटियां को अप्रैल 2017 में गिरफ्तार किया गया.

गाउंडर और प्रेम लाहोरिया 2018 में राजस्थान में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए. गलवाड़ी को पिछले साल मई में NIA ने गिरफ्तार किया था.

काहलवां की हत्या का मामला सबूतों की कमी के कारण सेखों के खिलाफ टिक नहीं सका. फरवरी 2019 में कपूरथला की एक अदालत ने सेखों समेत आठ आरोपियों को बरी कर दिया. हत्या के समय वहां मौजूद पुलिस गवाह आरोपियों की पहचान नहीं कर सके और जांचकर्ता काहलवां के शव से मिले गोलियों के टुकड़ों को आरोपियों से जब्त हथियारों से नहीं मिला सके.

मार्च 2023 में नाभा जेलब्रेक मामले में पटियाला की अदालत ने 22 आरोपियों को दोषी ठहराया. जेल से भागने वालों में शामिल सेखों, नीटा देओल और अमनदीप ढोटियां को भी दोषी ठहराया गया और उन्हें 10 साल की सजा सुनाई गई.

अदालत ने मामले में शुरुआत में लगाई गई UAPA की धाराओं को बरकरार नहीं रखा, लेकिन आरोपियों को हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश, डकैती और आर्म्स एक्ट समेत कई धाराओं के तहत दोषी ठहराया.

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए उसकी सजा पर रोक लगा दी, जिसके बाद 22 नवंबर 2023 को सेखों को जेल से रिहा कर दिया गया. उसकी अपील अभी भी लंबित है.

रिहाई के बाद यूट्यूब चैनलों को दिए कई इंटरव्यू में सेखों ने कहा कि वह बदल चुका है. उसने कहा कि जेल ने उसे बदल दिया और उसने काफी समय गुरबाणी पढ़ने में बिताया.

उसकी सार्वजनिक छवि भी पूरी तरह बदल गई है: शुरुआती सालों की गैंगस्टर वाली छवि से अब वह पगड़ी और दाढ़ी वाले सिख के रूप में नज़र आता है.

उसने फिरोजपुर-जीरा इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर काम शुरू किया. उसने गरीब महिलाओं की शादियां कराने में मदद की, स्थानीय सड़कों की मरम्मत में योगदान दिया, राशन, पशुओं का चारा और बाढ़ राहत सामग्री बांटी.

AAP में शामिल होने से पहले ही उसने राजनीति में अपनी किस्मत आजमानी शुरू कर दी थी. पिछले साल दिसंबर में हुए जिला परिषद चुनाव में अकालियों ने उसका समर्थन किया था.

उसने बाजिदपुर सीट से अपनी पत्नी मनदीप कौर और फिरोजशाह सीट से अपने करीबी रिश्तेदार कुलजीत कौर को चुनाव मैदान में उतारा था. दोनों चुनाव जीत गईं.

इन नतीजों से उत्साहित होकर सेखों ने मीडिया से कहा था कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव में फिरोजपुर जिले की किसी सीट से चुनाव लड़ेगा.

जीरा में AAP में शामिल होने और इसी विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाए जाने के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि वह इस सीट से पार्टी का संभावित उम्मीदवार हो सकता है.

कड़ी आलोचना

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि इस कदम से ऐसी परंपरा बनने का खतरा है, जिसमें अपराधी राजनीति में आ सकते हैं और चुनावी ताकत का इस्तेमाल करके अपने पुराने अपराधों को मिटा सकते हैं.

उन्होंने उस बात का भी ज़िक्र किया जिसे उन्होंने विडंबना बताया. अरविंद केजरीवाल ने 2016 में नाभा जेलब्रेक को पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ने का सबूत बताया था, जबकि पुलिस जिस व्यक्ति को इसका मास्टरमाइंड बताती थी, अब उसी का केजरीवाल की पार्टी ने स्वागत किया है.

कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मान से साफ करने को कहा है कि उनकी सरकार गैंगस्टरों के खिलाफ लड़ रही है या उनके साथ राजनीतिक गठजोड़ कर रही है.

कांग्रेस ने एक्स पर लिखा कि AAP “केजरीवाल के गैंग” इकट्ठा कर रही है.

शिरोमणि अकाली दल के नेता परंबंस सिंह रोमाना ने कहा कि इससे पता चलता है कि पार्टी गैंगस्टरों से निपटने को लेकर कितनी गंभीर है.

उन्होंने एक्स पर लिखा, “AAP के पोस्टर बॉय गुरप्रीत सेखों से मिलिए- उसके खिलाफ 49 आपराधिक मामले हैं, जिनमें ‘हत्या, हत्या की कोशिश, जबरन वसूली, अपहरण, आर्म्स एक्ट, NDPS, UAPA आदि’ शामिल हैं. क्या यही आपका ‘Gangsters Te Waar’ है, भगवंत मान?”

SAD के प्रवक्ता अर्शदीप सिंह कलेर ने भी AAP पर हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के पास उम्मीदवारों की इतनी कमी हो गई है कि वह लोगों की पृष्ठभूमि की ठीक से जांच किए बिना उन्हें चुनने के लिए तैयार है.

BJP की आलोचना भी उतनी ही तीखी रही.

BJP नेता फतेह जंग बाजवा ने मान के पहले के उस दावे पर सवाल उठाया जिसमें उन्होंने कहा था कि गैंगस्टरवाद बादल परिवार और कांग्रेस की देन है. बाजवा ने पूछा कि अब विवादित लोग AAP की ओर क्यों जा रहे हैं. उनका आरोप साफ था: AAP की प्राथमिकता अब चुनाव जीतना हो गई है, भले ही इसके लिए विवादित लोगों को पार्टी में शामिल करना पड़े.

AAP में शामिल होने के बाद मंच से मान ने इस कदम का बचाव किया. उन्होंने कहा कि लोगों को सिर्फ उनके अतीत के आधार पर नहीं आंकना चाहिए और कभी-कभी परिस्थितियां लोगों को गलत रास्ते पर ले जा सकती हैं. इसके जवाब में सेखों ने मान की पहल की तारीफ की.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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