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Wednesday, 20 May, 2026
होमरिपोर्टनक्सल मुक्त इलाकों को देश के बाकी हिस्सों के बराबर विकसित करना ही अगला लक्ष्य: अमित शाह

नक्सल मुक्त इलाकों को देश के बाकी हिस्सों के बराबर विकसित करना ही अगला लक्ष्य: अमित शाह

इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत चार राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

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बस्तर: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित 26वीं केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद (सेंट्रल जोनल काउंसिल) की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को विकास के मामले में देश के बाकी हिस्सों के बराबर नहीं लाया जाता.

इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रीविष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत चार राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

गृह मंत्री ने कहा कि 31 मार्च को देश को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद पहली बार बस्तर क्षेत्र में यह बैठक आयोजित हुई है. उन्होंने कहा कि अब चारों राज्यों के बीच या राज्यों और केंद्र के बीच किसी तरह का विवाद नहीं बचा है, जो एक बड़ी उपलब्धि है.

अमित शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ करीब सात राज्यों को जोड़ता है, इसलिए केंद्रीय क्षेत्र की रणनीतिक अहमियत बहुत ज्यादा है. उन्होंने कहा कि पूरा इलाका अब न केवल नक्सल मुक्त हुआ है, बल्कि विवाद मुक्त भी हो चुका है.

उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि नक्सल प्रभावित इलाके करीब पांच दशकों तक विकास की दौड़ में पीछे रहे हैं. जब तक इन क्षेत्रों को देश के बाकी हिस्सों के बराबर विकसित नहीं किया जाएगा, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी.”

शाह ने नक्सलवाद खत्म करने का श्रेय सुरक्षा बलों के जवानों की बहादुरी और एजेंसियों के सटीक समन्वय को दिया. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने ‘होल ऑफ द गवर्नमेंट अप्रोच’ के तहत मिलकर काम किया और नक्सल मुक्त इलाकों तक विकास पहुंचाया.

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ सरकार को जो भी जरूरत पड़ी, केंद्र सरकार ने पूरा सहयोग दिया. मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने जहां भी नेतृत्व की जरूरत थी, वहां जिम्मेदारी निभाई. इसी का परिणाम है कि आज बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है.

गृह मंत्री ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच जोनल काउंसिल की केवल 11 बैठकें हुई थीं, जबकि 2014 से 2026 के बीच इनकी संख्या बढ़कर 32 हो गई. इसी तरह स्टैंडिंग कमेटी की बैठकों की संख्या 14 से बढ़कर 35 पहुंच गई.

उन्होंने बताया कि 2004 से 2014 के बीच 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जबकि 2014 से 2026 के बीच 1,729 मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से करीब 80 प्रतिशत मामलों का समाधान भी कर लिया गया.

अमित शाह ने चारों राज्यों से जल जीवन मिशन-2 पर विशेष ध्यान देने और हर घर तक नल से पानी पहुंचाने को कहा. उन्होंने स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक कल्याण को भी बेहद संवेदनशील मुद्दा बताया.

उन्होंने कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में केंद्र और राज्यों से मिलकर काम करने की अपील की. साथ ही स्कूल ड्रॉपआउट कम करने, स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने, वित्तीय समावेशन और बिजली क्षेत्र में सुधार पर जोर दिया.

गृह मंत्री ने कहा कि शहरी योजना, जन स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधारों को और तेज गति से आगे बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कम से कम 50 प्रतिशत ध्यान ग्रामीण विकास और लोगों को सशक्त बनाने वाली योजनाओं पर होना चाहिए.

उन्होंने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि पांच किलोमीटर के दायरे में बैंकिंग सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए गंभीर प्रयास किए जाएं, क्योंकि सभी सरकारी योजनाएं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पर आधारित हैं.

बैठक में पॉक्सो और दुष्कर्म मामलों में समय पर डीएनए जांच, पांच साल से ज्यादा पुराने मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतों की स्थापना, गंभीर अपराधों में प्रशासन की सक्रियता और 1930 हेल्पलाइन को प्रभावी बनाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई.

अमित शाह ने कहा कि मिलावटखोरी के मामलों में जहां भी कार्रवाई हो, उसका व्यापक प्रचार होना चाहिए ताकि जनता जागरूक हो सके.

उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी ज्यादा जोर देने की जरूरत है. शाह ने कहा, “जिस तरह हमने देश को नक्सलवाद से मुक्त किया है, उसी तरह 2029 से पहले हर आपराधिक मामले का निपटारा तीन साल के भीतर करने का लक्ष्य भी हासिल करना होगा.”

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