जगदलपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपरा मुरिया दरबार में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने आदिवासी समुदायों से अपनी रीति-रिवाजों और परंपराओं को बचाए रखने, समय के साथ अपनी सोच बदलने और बच्चों को शिक्षा देने की अपील की.
इस मौके पर राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे.
सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने अपनी आदिवासी पहचान का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय आज भी मिल-जुलकर शांति से रहते हैं, नाचते-गाते हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाकर रखे हुए हैं.
मुर्मू ने कहा, “मैं भी आपमें से एक हूं. मैं भी एक मांझी की बेटी हूं. आज भी आदिवासी समुदायों के लोग खुशी और शांति से साथ रहते हैं, नाचते-गाते हैं और अपनी संस्कृति को बचाकर रखते हैं. इस संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने के लिए मैं आप सभी को धन्यवाद देना चाहती हूं.”
राष्ट्रपति ने कहा कि संस्कृति, परंपराओं और संविधान का उद्देश्य लोगों के जीवन में खुशी, शांति और मेल-जोल बनाए रखना है. हालांकि, उन्होंने आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था को खास और ज्यादा अर्थपूर्ण बताया.
उन्होंने कहा, “संविधान और गणतंत्र के नियमों का उद्देश्य भी खुशी, शांति और आनंद है. हमें शांति और प्रेम से रहना चाहिए, लेकिन आदिवासी समाज की अपनी व्यवस्था और भी सुंदर और अर्थपूर्ण है.”
गांवों में विवाद सुलझाने की पारंपरिक व्यवस्था के बारे में बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि पहले लोग त्योहारों के दौरान या किसी परेशानी के समय राजा के पास जाते थे. राजशाही खत्म होने के बाद गांव के लोग विवाद सुलझाने के लिए मांझी और परगना जैसे पारंपरिक नेताओं के पास जाने लगे.
उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार में झगड़ा होता था, जमीन या संपत्ति को लेकर विवाद होता था या कोई निजी परेशानी आती थी, तो मांझी गांव के लोगों की बैठक बुलाकर समस्या सुलझाने में मदद करते थे.
मुर्मू ने लोगों से स्थानीय विवादों को सुलझाने के लिए समुदाय की इस पारंपरिक व्यवस्था का इस्तेमाल करने और जहां तक संभव हो, लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने की अपील की.
उन्होंने कहा, “आज हम सभी पढ़े-लिखे हैं. पुलिस थानों, पुलिस अधिकारियों और अदालतों के चक्कर लगाकर अपना समय बर्बाद न करें. इन मामलों में कई साल लग सकते हैं और कभी-कभी इस प्रक्रिया में दो लोगों की जिंदगी भी खत्म हो जाती है. मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी दें या खुद मिलकर समस्या सुलझाएं.”
राष्ट्रपति ने समुदाय की पारंपरिक बैठकों और धार्मिक रीति-रिवाजों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि गांव के लोग अपने समुदाय की भलाई के लिए स्थानीय देवी-देवताओं से प्रार्थना करते हैं.
मुर्मू ने कहा, “मैं आपसे अपील करती हूं कि इस परंपरा को बचाकर रखें और अपनी सोच व जीवन जीने के तरीके से जुड़े रहें.”
मुर्मू ने आदिवासी समुदायों से नक्सलियों की ओर से लोगों को गुमराह करने की कोशिशों के खिलाफ एकजुट रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस चुनौती का सामना करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा.
उन्होंने कहा, “नक्सली बाहर बैठकर हमें गुमराह करते हैं. हमें मिलकर लड़ना होगा. अगर एक व्यक्ति थक जाए, तो हम सब मिलकर उसका बोझ उठाएं.”
राष्ट्रपति ने संस्कृति को बचाए रखने और विकास के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि लोगों को समय के साथ अपनी सोच बदलनी चाहिए, लेकिन अपनी परंपराओं को नहीं छोड़ना चाहिए.
मुर्मू ने कहा, “समय के साथ अपनी सोच बदलें, लेकिन अपनी परंपराएं न बदलें. अपने बच्चों को पढ़ाएं. सरकार आपके साथ है.”