लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राजस्व विभाग का काम अब केवल जमीन के रिकॉर्ड रखने तक सीमित नहीं है. योगी सरकार में ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति के दस्तावेज देने, किसानों की डिजिटल पहचान तैयार करने और सरकारी सहायता का पैसा सीधे बैंक खाते में भेजने पर भी ध्यान दिया गया है. आंकड़ों के मुताबिक, स्वामित्व योजना के तहत प्रदेश में 1.05 करोड़ से अधिक घरौनियां बनाई और बांटी जा चुकी हैं. वहीं, फार्मर रजिस्ट्री में 1.44 करोड़ से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं.
वर्ष 2017 से पहले घरौनी बनाने और फार्मर रजिस्ट्री जैसी व्यवस्थाओं में कोई उपलब्धि दर्ज नहीं थी. उस समय राजस्व सेवाएं मुख्य रूप से पुराने रिकॉर्ड और सरकारी दफ्तरों में होने वाली प्रक्रियाओं पर निर्भर थीं. योगी सरकार ने इन सेवाओं का दायरा बढ़ाते हुए ग्रामीण संपत्ति के रिकॉर्ड और किसानों से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित करने की दिशा में काम किया.
स्वामित्व योजना के तहत घरौनी बनाना ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व सुधार की एक प्रमुख पहल रही है. घरौनी के जरिए गांवों की आबादी वाले क्षेत्रों में आवासीय संपत्तियों की पहचान कर उनका रिकॉर्ड तैयार किया गया. विभाग के मुताबिक, अब तक 1.05 करोड़ से अधिक घरौनियां बनाई और बांटी जा चुकी हैं. इससे ग्रामीण परिवारों को अपनी आवासीय संपत्ति से जुड़ा दस्तावेज मिल सका है.
किसानों से जुड़ी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध कराने के लिए फार्मर रजिस्ट्री का विस्तार किया गया. प्रदेश में 1.44 करोड़ से अधिक फार्मर रजिस्ट्री हो चुकी हैं. इस मामले में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है.
डिजिटल रिकॉर्ड से किसानों की पहचान करने और अलग-अलग कृषि योजनाओं का लाभ पाने के लिए उनकी पात्रता की जांच करने में मदद मिल सकती है. आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017 से पहले इस तरह की व्यवस्था में कोई उपलब्धि दर्ज नहीं थी. अब इस पहल के जरिए किसानों से जुड़ी जानकारी को एक जगह व्यवस्थित किया जा रहा है.
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना में भी बदलाव किया गया है. पहले यह योजना बीमा कंपनी के जरिए चलाई जाती थी, लेकिन अब जिलाधिकारी के माध्यम से सहायता राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है. इससे सहायता राशि देने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले अधिक सीधी हो गई है.