जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में विजयादशमी के मौके पर पारंपरिक ‘निशा जात्रा’ की रस्म निभाई गई. इस दौरान इलाके की शांति और खुशहाली के लिए रातभर पूजा की गई और विशेष चढ़ावा चढ़ाया गया.
बस्तर के पूर्व राजपरिवार के सदस्य कमल चंद्र भंज देव ने इस रस्म के महत्व और समय के साथ इसमें आए बदलावों के बारे में बताया.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “इसे ‘निशा जात्रा’ कहा जाता है. जैसा कि आप जानते हैं, अष्टमी के बाद हवन होता है. हवन के बाद मां को एक चढ़ावा दिया जाता है, जिसमें बलि भी शामिल होती है. पहले यह रस्म गुप्त रूप से और निजी तौर पर निभाई जाती थी, लेकिन आज के लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह ज्यादा लोगों के लिए खुली हो गई है और इसमें कई लोग शामिल होते हैं. हम वहां प्रार्थना करने और पूजा करने जाते हैं.”
इस बीच, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विजयादशमी के मौके पर अपने निवास पर पारंपरिक शस्त्र पूजा की और मां भगवती की पूजा-अर्चना की.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “जब कोई राष्ट्र शस्त्रों से सुरक्षित होता है, तो वह शास्त्रों का अध्ययन करता है.” उन्होंने कहा कि पूरे विधि-विधान के साथ शस्त्र पूजा की गई. साथ ही मां भगवती की पूजा कर राज्य के सभी लोगों की खुशी, समृद्धि और कल्याण की कामना की गई.
उन्होंने कहा कि धर्म, सत्य और न्याय की जीत का प्रतीक यह त्योहार लोगों को ताकत के साथ संयम और क्षमता के साथ अपने कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण अपनाने की प्रेरणा देता है.
मुख्यमंत्री की पोस्ट में कहा गया, “धर्म, सत्य और न्याय की जीत का उत्सव मनाने वाला यह महान पर्व हमें ताकत के साथ संयम और क्षमता के साथ कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण अपनाने की प्रेरणा देता है. जगत की रचयिता मां दुर्गा की कृपा से छत्तीसगढ़ विकास, सुशासन और समृद्धि के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ता रहे. हर परिवार में खुशी, शांति और सुख बना रहे, यही मेरी दिल से कामना है.”