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Tuesday, 20 October, 2026
होमदेश‘पश्चिमी तूफान’ सरकारों को गिराने की कोशिश में, भारत उसका मुख्य निशाना: दशहरा भाषण में RSS प्रमुख

‘पश्चिमी तूफान’ सरकारों को गिराने की कोशिश में, भारत उसका मुख्य निशाना: दशहरा भाषण में RSS प्रमुख

उनका यह बयान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शनों और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के इस बयान पर विवाद के बीच आया है कि ‘सरकार बदलने की मांग करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है’.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार सुबह नागपुर में विजयादशमी के मौके पर अपने भाषण में कहा कि पश्चिम से एक ‘तूफान’ आया है, जो दुनिया भर की व्यवस्थाओं और संस्कृतियों को खत्म करना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारत उसका सबसे बड़ा निशाना है.

उन्होंने कहा, “पश्चिम से एक तूफान आया है, जो हर तरह की व्यवस्था, हर तरह की शालीनता, हर तरह की शुभता, हर तरह की संस्कृति और संस्कार के खिलाफ है. वे इसे नष्ट करना, बिगाड़ना और अस्त-व्यस्त करना चाहते हैं.”

उन्होंने यूरोप में, खासकर फ्रांस में, महंगाई और जीवन-यापन के बढ़ते खर्च के खिलाफ हाल में हुए प्रदर्शनों का जिक्र किया. इन प्रदर्शनों में 1,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों से आ रही खबरें सुनिए. फ्रांस में क्या हो रहा है, अल्बानिया में क्या हो रहा है. बांग्लादेश में जो हुआ, नेपाल में जो हुआ, यह सब उन्हीं का किया हुआ है.” उन्होंने आगे कहा कि इन देशों में सरकार बदलने से हालात बेहतर नहीं हुए.

उन्होंने कहा, “अब तक वे कहते हैं कि सरकार बदलने से हालात सुधर जाएंगे, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ. पहले भी ऐसा नहीं हुआ और आज भी ऐसा नहीं हो रहा है.”

उन्होंने भारत के खिलाफ साजिश होने का आरोप भी लगाया और कहा, “यह नेटवर्क दुनिया भर में काम करता है, ताकि हर जगह उसके वे लोग हावी रहें, जो अपने फायदे के लिए काम करते हैं. भारत की तरक्की से ऐसी गतिविधियों पर रोक लगेगी, इसलिए भारत उनका सबसे बड़ा निशाना है.” भागवत ने आगे कहा.

भागवत का यह बयान दिल्ली में हो रहे उन प्रदर्शनों के बीच आया है, जिनमें चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत मतदाता सूची तैयार करने में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है.

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के एक बयान के बाद राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है. भूषण ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि “सरकार बदलने की मांग करना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है.”

भागवत ने आरोप लगाया कि भारत में ‘राक्षसी ताकतें’ काम कर रही हैं, लेकिन वे सफल नहीं हो पाई हैं. उन्होंने इसकी वजह देश की नीतियों, नेतृत्व और युवाओं में बढ़ती जागरूकता को बताया.

उन्होंने कहा, “इन राक्षसी ताकतों को यह बात पता है और इसीलिए भारत उनका निशाना है…वे बात करते हैं कि भारत, हिंदुओं और संघ को कैसे तोड़ेंगे. वे ‘तोड़ने’ की बात करते हैं और उन्हें मदद भी मिलती है.”

उन्होंने आगे कहा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा और सत्ता पाने की चाह कुछ नेताओं को ऐसे प्रयासों का समर्थन करने के लिए प्रेरित कर सकती है.

भागवत ने यह भी कहा कि खास नीतियों को लागू करने की कोशिश करने वाले नेताओं को शालीनता, मित्रता और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करते हुए व्यवहार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसा व्यवहार धीरे-धीरे उन नीतियों को सफल बनाने के लिए जरूरी सामाजिक माहौल तैयार करने में मदद करेगा.

उन्होंने कहा कि जो लोग लड़ाई शुरू करना चाहते हैं, वे लड़ाई शुरू करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि ऐसे हालात में संघ को भी अक्सर “उन लोगों का निशाना बनाया जाता है, जो उसके विकास और तरक्की को बर्दाश्त नहीं कर सकते.”

उन्होंने समाज को मजबूत बनाने के लिए आरएसएस की कोशिशों के बारे में भी बात की. इसके साथ ही उन्होंने फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छर का जिक्र किया, जिनकी काफी तारीफ हो रही है. आरोप है कि दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में उनके सह-पायलट ने विमान को अगवा करने की कोशिश की थी, जिसे उन्होंने नाकाम कर दिया.

भागवत ने कहा, “पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाए गए यही स्वभाव और मूल्य कैप्टन स्मित मच्छर के लिए प्रेरणा बने. उन्होंने अपनी जान को खतरे में डालकर लोगों की जान बचाने के लिए खुद को समर्पित कर दिया.”

‘समाधान पहल से निकलते हैं, आंदोलनों से नहीं’

भागवत ने अपने भाषण का एक बड़ा हिस्सा प्रदर्शनों पर दिया. उन्होंने कहा कि बड़े समाज और विकासशील देश में समस्याएं होना तय है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रदर्शनों का मकसद समस्याओं को सुलझाना होना चाहिए, न कि मतभेद, दुश्मनी या बंटवारा पैदा करना.

उन्होंने कहा, “अगर आंदोलन का मकसद समाधान निकालना है, तो आंदोलन करने वाले किसी भी समूह, शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठाने वाले सरकारी अधिकारियों या राजनीतिक नेताओं के काम से हमारे एकजुट समाज में किसी तरह का मतभेद, दुश्मनी या बंटवारा पैदा नहीं होना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा कि प्रदर्शन और उन्हें संभालने के लिए उठाए जाने वाले कदम संविधान, कानून और अच्छे व्यवहार के नियमों के दायरे में ही रहने चाहिए.

भागवत ने चेतावनी दी कि प्रदर्शनों के पीछे राजनीतिक हित हो सकते हैं और वे समाज में बंटवारे की वजह बन सकते हैं. उन्होंने कहा कि वोट पाने, लोकप्रियता हासिल करने और राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश में लोगों को अपनी अंतरात्मा और सद्भावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा, “समाज को इसका शिकार होने से बचाने के लिए आम लोगों को भी सोच-समझकर फैसला करना होगा. इस बात की बहुत कम संभावना है कि किसी आंदोलन से समस्या सुलझ जाएगी. समाधान आंदोलन से नहीं, बल्कि समाज की पहल से निकलते हैं. इसके कई उदाहरण हैं.” उन्होंने ग्रामीण स्कूलों में आरएसएस के कार्यकर्ताओं की ओर से की गई एक पहल का जिक्र किया.

बिना रोक-टोक के सामग्री दिखाए जाने से होने वाले नुकसान को लेकर चिंता जताते हुए भागवत ने सोशल मीडिया साइटों और ओटीटी मंचों के लिए नियम बनाने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि जब हर किसी को जानकारी आसानी से मिल सकती है, तो युवा पीढ़ी को यह समझाने की जरूरत है कि क्या सही है और क्या गलत.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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