नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव 17 जून को महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती के अवसर पर भोपाल के एमपी नगर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में शामिल हुए. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का जीवन वीरता, शौर्य, पराक्रम और त्याग का प्रतीक है. उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को सर्वोपरि रखा और कभी अपने लक्ष्य से विचलित नहीं हुए. मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं बल्कि स्वाभिमान, साहस और राष्ट्रभक्ति के अनुपम प्रतीक हैं.
सिसोदिया-राजपूत-क्षत्रिय समुदाय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज के प्रतिभाशाली डॉक्टरों, युवाओं, खिलाड़ियों और समाजसेवियों को सम्मानित किया. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ महाराणा प्रताप कल्याण बोर्ड का गठन किया है. साथ ही खेल एवं युवा कल्याण विभाग की पार्थ योजना के तहत युवाओं को सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि महाराणा प्रताप की जीवनी अब स्कूलों में पढ़ाई जाएगी और उनके जीवन के प्रेरक प्रसंगों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश महाराणा प्रताप जयंती पर अवकाश घोषित करने वाला देश का एकमात्र राज्य है. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया.