रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य से खनिज संसाधन निकालने और देश व दुनिया की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए इसे ‘चारागाह की तरह समझा गया’, लेकिन यहां के लोग अपने पैरों पर कैसे खड़े हों, इसकी बहुत चिंता नहीं की गई.
सोरेन ने यह टिप्पणी यहां एक कार्यक्रम के दौरान नवनियुक्त 1,042 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए की.
उन्होंने कहा, ‘समाज को दिशा दिखाने और बेहतर माहौल तैयार करने में शिक्षकों की अहम भूमिका होती है.’
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के जो भी अग्रणी राज्य हैं, वे सभी शिक्षा के क्षेत्र में आगे हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकते थे, लेकिन दुर्भाग्य से खनिज संसाधन निकालने और देश-दुनिया की अर्थव्यवस्था में योगदान देने के लिए इस राज्य को सिर्फ एक चारागाह माना गया. इस बात की चिंता बहुत कम रही कि यहां के लोग अपने पैरों पर कैसे खड़े हो सकते हैं.’
उन्होंने कहा कि सरकार राज्य में शिक्षा व्यवस्था को गति देने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है.
सोरेन ने कहा, ‘अब झारखंड के युवा न केवल देश के सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में, बल्कि विदेशों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. हम एक ज्ञानवर्धक समाज और शिक्षित भावी पीढ़ी का निर्माण करना चाहते हैं.’