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Monday, 29 June, 2026
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खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए भारत की तैयारी, अता हसनैन और पबित्रा मार्गेरिटा के जाने की चर्चा

कूटनीतिक सूत्रों ने लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और पबित्रा मार्गेरिटा के संभावित शामिल होने की पुष्टि की है. हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि अंतिम संस्कार में भारत के प्रतिनिधित्व के स्तर पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है.

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नई दिल्ली: भारत, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है. इसमें बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन और विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा के शामिल होने की संभावना है. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कौन करेगा.

कूटनीतिक सूत्रों ने दिप्रिंट को लेफ्टिनेंट जनरल हसनैन और पबित्रा मार्गेरिटा के संभावित शामिल होने की पुष्टि की है. हालांकि, सरकारी सूत्रों ने साफ किया है कि अंतिम संस्कार में भारत की ओर से किस स्तर का प्रतिनिधित्व होगा, इस पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है.

प्रतिनिधिमंडल के इस सप्ताह के अंत में तेहरान रवाना होने की संभावना है. वहां 4 जुलाई से अंतिम यात्रा की शुरुआत होगी.

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने पिछले मंगलवार को आधिकारिक तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छह दिवसीय अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था.

ईरान का यह निमंत्रण पिछले मंगलवार को विदेश मंत्रालय को एक आधिकारिक नोट के माध्यम से सौंपा गया था.

खामेनेई के परिवार के चार अन्य सदस्यों—मेसबाह अल-होदा बाघेरी, सैय्यदेह बोशरा होसैनी खामेनेई, ज़हरा हद्दाद-अदेल और ज़हरा मोहम्मदी गोलपायेगानी के पार्थिव शरीर भी पूर्व सर्वोच्च नेता के पार्थिव शरीर के साथ पवित्र शहर कोम ले जाए जाएंगे, जहां 7 जुलाई को प्रार्थना सभा होगी.

इसके बाद पार्थिव शरीर इराक के नजफ और कर्बला शहरों में ले जाए जाएंगे और अंत में 9 जुलाई को मशहद में दफनाया जाएगा.

तेहरान ने अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए कई विदेशी गणमान्य व्यक्तियों को आमंत्रित किया है.

खामेनेई की 28 फरवरी को मौत हो गई थी. अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर संयुक्त हमले किए जाने के दौरान उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए थे. इसके बाद तीनों देशों के बीच संघर्ष जारी रहा, जो इसी महीने कुछ समय पहले तब रुका जब अमेरिका और ईरान ने बड़े शांति समझौते और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए अस्थायी समझौता किया.

भारत ने 5 मार्च को खामेनेई के निधन पर शोक व्यक्त किया था. उस दिन विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर शोक-पुस्तिका में संदेश दर्ज किया था.

उस समय तक अयातुल्ला के निधन पर भारत की ओर से कोई सार्वजनिक आधिकारिक शोक संदेश या निंदा बयान जारी नहीं किया गया था.

हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच फिर से हमले हुए हैं, क्योंकि अस्थायी समझौता अभी भी नाजुक स्थिति में है.

दोनों पक्षों ने पिछले सप्ताह जिनेवा में बातचीत की. इसका उद्देश्य 60 दिनों के भीतर एक व्यापक समझौते तक पहुंचना है.

भारत ने 17 जून को ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) का स्वागत किया है. इस समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जबकि स्विट्जरलैंड में हुई वार्ताओं को आगे बढ़ाने में कतर ने सहयोग किया.

इससे पहले 2024 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप खनखड़ ईरान गए थे. वह राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और विदेश मंत्री होसैन अमीर-अब्दुल्लाहियन के अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे. दोनों की 19 मई को हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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