अयोध्या: राम मंदिर दान गबन मामले में अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने सोमवार को सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. यह फैसला उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मंदिर में मिले दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ियों तथा धन के दुरुपयोग की जांच के बीच आया है.
अदालत के आदेश के बाद आरोपियों के परिजन उनसे मिलने अयोध्या जिला जेल पहुंचे. आरोपी टिन्नू यादव के बेटे रवि यादव और आरोपी मनीष यादव के भाई शनि यादव जेल पहुंचे, जहां आरोपी फिलहाल बंद हैं.
इससे पहले शुक्रवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने राम मंदिर दान गबन मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था.
सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच के तहत चंपत राय का बयान दर्ज किया गया है. जरूरत पड़ने पर ट्रस्ट के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें अनिल मिश्रा भी शामिल हैं, के बयान भी दर्ज किए जा सकते हैं.
रविवार को मामले की जांच और तेज हो गई, जब पुलिस की एक टीम आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ला के घर पहुंची.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा, “श्री राम मंदिर (अयोध्या) से जुड़े पिछले कुछ दिनों में सामने आए घटनाक्रम से हम स्तब्ध, आहत और दुखी हैं. हम निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
ट्रस्ट ने यह भी पुष्टि की कि उसे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे प्राप्त हो गए हैं.
यह मामला 25 जून को दर्ज की गई एफआईआर के बाद सामने आया. एफआईआर अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के कथित गबन से जुड़ी है.
अधिकारियों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं—306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5)—के तहत मामला दर्ज किया गया है.
एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव समेत अन्य लोगों को नामजद किया गया है.
यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडेय के आरोपों के बाद हुई, जिन्होंने दावा किया था कि राम मंदिर के दान में से 7 से 7.5 करोड़ रुपये का गबन किया गया है.
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