नई दिल्ली: अमृतसर पुलिस द्वारा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सोशल मीडिया हैंडल्स के खिलाफ पुलिस कमिश्नर के बयान को लेकर लोगों को “गुमराह” करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई की बात कहने के एक दिन बाद, पंजाब सरकार ने शुक्रवार को उनका तबादला कर दिया.
अमृतसर के पुलिस कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर को राज्य के पुलिस प्रमुख गौरव यादव के कार्यालय में रिपोर्ट करने के लिए कहा गया है. वहीं, गृह विभाग ने अमृतसर की कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी आईपीएस अधिकारी हरमनबीर सिंह गिल को सौंप दी है. गिल पहले से ही अमृतसर में सीमा रेंज के डीआईजी के पद पर तैनात थे.
राज्य पुलिस सेवा से पदोन्नत होकर आईपीएस बने भुल्लर को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के करीबी अधिकारियों में माना जाता था. उन्हें नवंबर 2023 में अमृतसर का पुलिस कमिश्नर बनाया गया था. हालांकि, जून 2024 में सिर्फ सात महीने बाद उन्हें हटा दिया गया था, लेकिन तीन महीने बाद फिर उसी पद पर वापस नियुक्त कर दिया गया. वह लुधियाना और जालंधर के पुलिस कमिश्नर भी रह चुके हैं.
यह घटनाक्रम उस समय हुआ, जब कुछ घंटे पहले ही अमृतसर पुलिस ने बीजेपी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर पोस्ट किए गए दो वीडियो पर कड़ी आपत्ति जताई थी. इन वीडियो में दावा किया गया था कि भुल्लर ने कहा है कि अमृतसर पुलिस द्वारा पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल का संबंध दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से था.
बीजेपी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा था, “बड़ा खुलासा: जंतर-मंतर प्रदर्शन के पीछे आईएसआई समर्थित मॉड्यूल!” पोस्ट में कहा गया था कि “पंजाब पुलिस (अमृतसर) के कमिश्नर गुरप्रीत सिंह भुल्लर ने खुलासा किया है कि जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के पीछे पाकिस्तान समर्थित आईएसआई मॉड्यूल सक्रिय था. जांच में सामने आया कि यह मॉड्यूल 15 साल के नाबालिगों को पैसों का लालच देकर पुलिस और सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी कराने और उन पर हमले की साजिश रच रहा था. पूरी कहानी सीधे पुलिस कमिश्नर से सुनिए.”
अमृतसर पुलिस के प्रवक्ता ने कहा था कि बीजेपी के सोशल मीडिया हैंडल्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के “काट-छांट किए गए (trimmed)” वीडियो पोस्ट किए हैं. इसके जवाब में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी.
प्रवक्ता ने कहा था कि पुलिस कमिश्नर का असली बयान यह था कि गिरफ्तार आतंकी मॉड्यूल के सदस्य रेकी करने के लिए जंतर-मंतर गए थे और अपने सीमा पार बैठे हैंडलरों के निर्देश पर प्रदर्शनकारियों पर पेट्रोल बम फेंकने की योजना बना रहे थे.
अमृतसर पुलिस ने कहा था कि समाचार एजेंसी एएनआई को दिया गया भुल्लर का वीडियो बयान एडिट करके भ्रामक संदर्भ में पेश किया गया.
पुलिस ने साफ कहा था, “ऐसा कोई बयान नहीं दिया गया कि गिरफ्तार लोग प्रदर्शन में शामिल थे या जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों का उस आतंकी मॉड्यूल से कोई संबंध था.”
पुलिस प्रवक्ता के मुताबिक, बदले हुए बैकग्राउंड विजुअल, वीडियो की चुनिंदा कटिंग और उसके साथ लिखे गए कैप्शन से यह गलत और भ्रामक संदेश दिया गया कि गिरफ्तार लोग जंतर-मंतर के प्रदर्शन से जुड़े हुए थे.
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