रांची: झारखंड के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने शुक्रवार को दिप्रिंट से कहा कि सरकार से बातचीत के लिए प्रदर्शनकारी छात्रों की ओर से बनाए गए 11-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार के समय के एक पूर्व एडवोकेट जनरल भी शामिल हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी राज्य में छात्रों के आंदोलन का राजनीतिकरण कर रही है.
कुमार ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा, “हम छात्रों से बात करने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन बीजेपी के छिपे हुए एजेंडे को मानने के लिए नहीं. मैं बाबूलाल जी (बीजेपी विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष) से कहना चाहता हूं कि आपने अपने एडवोकेट जनरल का नाम क्यों दिया? अपना नाम देते. आपको खुलकर सामने आना चाहिए था.”
उन्होंने कहा, “यह छात्रों का आंदोलन है और मुद्दे भी छात्रों से जुड़े हैं, लेकिन अगर बीजेपी इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश करेगी, तो झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) भी ऐसे प्रयासों का जवाब देना जानता है.”
कुमार ने कहा कि इसी वजह से छात्रों के साथ बातचीत में गतिरोध पैदा हुआ है. उन्होंने कहा, “लेकिन लोकतंत्र में हर गतिरोध का समाधान निकलता है और बातचीत के बाद भी निश्चित रूप से समाधान निकलेगा…हम छात्रों के प्रदर्शन करने के अधिकार का सम्मान करते हैं.”
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई या ईडी से जांच कराने की मांग छात्रों के बीच बीजेपी ने ही आगे बढ़ाई है.
बुधवार को राज्य सरकार ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की पहल की थी. रांची के एसडीएम कुमार रजत और एडीएम धनंजय कुमार ने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया था. इसके बाद छात्रों ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की घोषणा की, जिसमें आठ छात्र, दो मीडियाकर्मी और एक वकील अजीत कुमार शामिल थे. अजीत कुमार 2017 से 2020 की शुरुआत तक, जब राज्य में बीजेपी की सरकार थी, झारखंड के एडवोकेट जनरल रह चुके हैं.
बुधवार को बीजेपी विधायक बाबूलाल मरांडी भी विपक्षी विधायकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रदर्शन स्थल पहुंचे थे.
कुमार ने कहा, “राजनीतिक फायदे के लिए छात्रों के मुद्दों का इस्तेमाल करना निंदनीय है. जंतर-मंतर का आंदोलन इस देश में एक मिसाल बना. जब छात्र अपनी बात रखने के लिए सड़कों पर उतरे, तो लगा कि देश का लोकतंत्र अब भी ज़िंदा है, लेकिन झारखंड में यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि रांची में छात्रों की आवाज़ दबाई जा रही है और राजनीतिक दल छात्रों को अपने एजेंडे के लिए आगे कर रहे हैं. मेरा मानना है कि छात्रों को जल्दी समझना होगा कि कौन-सी पार्टियां उनके आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठा रही हैं और उन्हें ऐसे लोगों से दूरी बना लेनी चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, “देश देख रहा है कि भारतीय जनता पार्टी, जिसे हर संकट में राजनीतिक मौका तलाशने वाली पार्टी माना जाता है, यहां भी ऐसा ही मौका ढूंढ रही है.” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल नहीं चाहते कि छात्रों और सरकार के बीच बातचीत शुरू हो.
कुमार ने दिल्ली के जंतर-मंतर आंदोलन का भी ज़िक्र किया और झारखंड के आंदोलन को लेकर बीजेपी की “हमदर्दी” पर सवाल उठाए.
उन्होंने कहा, “दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों को ‘देशद्रोही’ और ‘अर्बन नक्सल’ बताने वाली बीजेपी, जहां छात्रों पर लाठीचार्ज, वाटर कैनन, आंसू गैस, कीलों वाले बैरिकेड और पेलेट गन का इस्तेमाल हुआ, वही पार्टी अब खुद को छात्रों की सबसे बड़ी हितैषी बता रही है. तब छात्रों के लिए यह प्यार कहां था? क्या जंतर-मंतर के छात्र ‘देशद्रोही’ थे और झारखंड के छात्र अचानक ‘देशभक्त’ हो गए? यह दोहरा रवैया नहीं चलेगा.”
झारखंड के अलग-अलग हिस्सों से आए सैकड़ों छात्र रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.
सरकार ने बातचीत के लिए बनाई समिति
इस इंटरव्यू में सुदिव्य कुमार ने कहा कि “लोकतंत्र में बातचीत का कोई विकल्प नहीं है और समस्याओं का समाधान सिर्फ चर्चा से ही निकल सकता है.”
उन्होंने कहा, “सरकार ने छात्रों के लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार में कोई दखल नहीं दिया. उनके खिलाफ कहीं भी कोई कार्रवाई नहीं की गई.” उन्होंने बताया कि जैसे ही छात्रों ने बातचीत की इच्छा जताई, सरकार ने उनसे संपर्क किया.
अब सरकार ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है. इस समिति में चार कैबिनेट मंत्री और अपर मुख्य सचिव स्तर के एक अधिकारी शामिल हैं.
इन चार मंत्रियों में खुद सुदिव्य कुमार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, श्रम, रोजगार, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास मंत्री संजय प्रसाद यादव और अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री चमरा लिंडा शामिल हैं.
इनमें संजय प्रसाद यादव राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से हैं, दीपिका पांडेय सिंह कांग्रेस से हैं, जबकि सुदिव्य कुमार और चमरा लिंडा झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेता हैं.
कुमार ने दिप्रिंट से कहा कि बातचीत के दौरान सभी मुद्दों पर चर्चा हो सकती है और लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई भी मुद्दा ऐसा नहीं है, जिस पर बात न की जा सके.
(इस इंटरव्यू को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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