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Friday, 7 August, 2026
होमरिपोर्टछत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्कूलों में बनेंगे 6,671 बालिका शौचालय: मुख्यमंत्री साय

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्कूलों में बनेंगे 6,671 बालिका शौचालय: मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन की तैयारी में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है. श्रमिकों की 98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी कर राज्य पहले स्थान पर है, जबकि 99 प्रतिशत जियो टैगिंग के साथ दूसरे स्थान पर है. जीआईएस आधारित ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी राज्य अग्रणी रहा है.

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रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं के लिए बड़ा फैसला लेते हुए प्रदेश के 6,671 सरकारी स्कूलों में बालिकाओं के लिए नए शौचालय बनाने की घोषणा की है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने गुरुवार को मंत्रालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी. इस दौरान उन्होंने राज्यव्यापी ‘मेरी बेटी–मेरा अभिमान’ अभियान का भी शुभारंभ किया.

मुख्यमंत्री ने बताया कि 15 अगस्त 2026 से 26 जनवरी 2027 तक चलने वाले इस अभियान के तहत हर गांव में बालिकाओं के शौचालय के साथ मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय का निर्माण कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि यह अभियान बेटियों के सम्मान, स्वच्छता और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

सरकार के अनुसार, 286.85 करोड़ रुपये की लागत से 6,671 बालिका शौचालय बनाए जाएंगे. प्रत्येक शौचालय पर 4.30 लाख रुपये खर्च होंगे. इसके अलावा 6,524 गांवों में 391.44 करोड़ रुपये की लागत से प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम बनाए जाएंगे. वहीं 18.22 करोड़ रुपये की लागत से 549 अतिरिक्त मुक्तिधामों का भी निर्माण होगा.

मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को प्राथमिकता बताते हुए कहा कि प्रदेश के 10,027 बंद पड़े बोरवेलों में 52.14 करोड़ रुपये की लागत से सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाएं बनाई जाएंगी. इससे भूजल स्तर बढ़ाने और पेयजल संकट कम करने में मदद मिलेगी.

उन्होंने बताया कि विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) – वीबी-जी राम जी योजना पूरे देश में 1 जुलाई 2026 से लागू हुई है. योजना के तहत विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा करेगी और मजदूरी बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन कर दी गई है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा और वीबी-जी राम जी के माध्यम से राज्य को करीब 6,855 करोड़ रुपये मिलेंगे, जो ग्रामीण विकास और रोजगार के लिए अब तक का सबसे बड़ा निवेश होगा. भारत सरकार से पहली किस्त के रूप में 1,538 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति भी मिल चुकी है.

उन्होंने बताया कि किसानों और श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कृषि सीजन के दौरान 60 दिनों तक योजना के कार्य बंद रखने का प्रावधान किया गया है, ताकि खेती प्रभावित न हो.

मुख्यमंत्री के अनुसार, योजना के तहत 318 प्रकार के विकास कार्य किए जाएंगे. इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण आधारभूत ढांचा, आजीविका बढ़ाने और जलवायु परिवर्तन व आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्य शामिल हैं. सड़क, पुलिया, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी, अतिरिक्त स्कूल कक्ष, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, किचन शेड, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, पशु चिकित्सालय और मुक्तिधाम जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण हाट-बाजार, कोल्ड स्टोरेज, डेयरी, मत्स्य पालन और पशुपालन से जुड़ी आधारभूत सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा. वहीं बाढ़, चक्रवात और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आवश्यक संरचनाओं पर भी काम होगा.

मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के क्रियान्वयन की तैयारी में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन किया है. श्रमिकों की 98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी कर राज्य पहले स्थान पर है, जबकि 99 प्रतिशत जियो टैगिंग के साथ दूसरे स्थान पर है. जीआईएस आधारित ग्राम पंचायत कार्ययोजना तैयार करने में भी राज्य अग्रणी रहा है.

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 में वीबी-जी राम जी योजना के लिए 5,591.42 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है. अप्रैल से जून की पहली तिमाही में ही 1,264 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना का उद्देश्य सिर्फ रोजगार देना नहीं, बल्कि जल संरक्षण, स्वच्छता, शिक्षा, सामाजिक आधारभूत ढांचे और ग्रामीण आजीविका को मजबूत कर आत्मनिर्भर गांवों का निर्माण करना है. सभी कार्य ग्राम सभा की मंजूरी से होंगे और डिजिटल मॉनिटरिंग, समय पर मजदूरी भुगतान, गुणवत्ता नियंत्रण तथा सामाजिक अंकेक्षण के जरिए पारदर्शी तरीके से लागू किए जाएंगे.

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