नई दिल्ली: फ्रांस की विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने भारत में राफेल लड़ाकू विमान की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) लगाने के लिए टाटा ग्रुप के साथ साझेदारी का प्रस्ताव दिया है. दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है. अगर ऐसा होता है, तो यह पहली बार होगा जब कंपनी फ्रांस के बाहर राफेल की असेंबली लाइन लगाएगी.
रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीद योजना के लिए फ्रांस सरकार की ओर से दिए गए तकनीकी और व्यावसायिक प्रस्ताव में कार्यक्रम से जुड़ी चार प्रमुख फ्रांसीसी/यूरोपीय कंपनियों के साथ विस्तृत औद्योगिक साझेदारी का रोडमैप भी शामिल है.
प्रस्ताव के मुताबिक, मिसाइल निर्माता MBDA की साझेदारी लार्सन एंड टूब्रो (एल&टी) के साथ, इलेक्ट्रॉनिक्स और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स की साझेदारी महिंद्रा ग्रुप के साथ और इंजन निर्माता Safran की साझेदारी सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ होने की संभावना है.
एचएएल के साथ होने वाली साझेदारी में राफेल के साथ-साथ भारत के उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान (AMCA) कार्यक्रम से जुड़ा काम भी शामिल होगा.
ये प्रस्तावित साझेदारियां भारत की लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) के जवाब में फ्रांस की ओर से दी गई हैं. यह अनुरोध सरकार-से-सरकार खरीद प्रक्रिया के तहत भेजा गया था. भारत को फ्रांस का प्रस्ताव 29 जुलाई को मिला था और फिलहाल उसका अध्ययन किया जा रहा है.
सूत्रों का कहना है कि भारत की ज्यादातर प्रमुख मांगों को प्रस्ताव में शामिल किया गया है, हालांकि अभी इसकी विस्तार से जांच चल रही है.
एक सूत्र ने कहा, “मुख्य मांगों को पूरा कर दिया गया है. प्रस्ताव का मूल्यांकन किया जा रहा है.”
उन्होंने बताया कि अगर किसी बड़े स्पष्टीकरण की जरूरत नहीं पड़ी, तो अगला चरण कीमत और अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) पर बातचीत का होगा.
अधिकारियों के मुताबिक, कोशिश है कि चालू वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले 114 लड़ाकू विमानों की डील पर बातचीत पूरी कर अनुबंध पर हस्ताक्षर कर दिए जाएं.
अगर यह सौदा हो जाता है, तो भारतीय वायुसेना के पास कुल 150 राफेल होंगे—36 पहले से सेवा में हैं और 114 नए अनुबंध के तहत मिलेंगे. इसके अलावा भारतीय नौसेना के लिए पहले से तय 26 Rafale M लड़ाकू विमान जोड़ने पर भारत के पास कुल 176 राफेल विमान हो जाएंगे.
सूत्रों ने बताया कि फ्रांस की ओर से प्रस्तावित लागत रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से मंजूर 3.25 लाख करोड़ रुपये की सीमा के भीतर है.
स्वदेशीकरण का रोडमैप
जैसा कि दिप्रिंट ने इस साल जून में सबसे पहले बताया था, भारतीय वायुसेना (IAF) ने भारत में बनने वाले राफेल F4 लड़ाकू विमानों में कम से कम 40 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) की मांग की है. अंतिम उत्पादन बैच तक इसे बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है.
फ्रांस के प्रस्ताव में इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मैन्युफैक्चरिंग साझेदारी, तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और स्थानीय स्तर पर सामान की खरीद (Local Sourcing) का विस्तृत रोडमैप भी शामिल है.
सूत्रों ने बताया कि डसॉल्ट ने भारत में रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (MRO) सुविधा स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया है. इससे पूरे विमान के जीवनकाल में भारत में होने वाला घरेलू वैल्यू एडिशन करीब 80 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.
दिप्रिंट ने सबसे पहले अप्रैल 2025 में खबर दी थी कि सरकार ने 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद सरकार-से-सरकार समझौते के तहत करने का फैसला लिया है. इसके बाद 2025 की दूसरी छमाही में भारतीय वायुसेना ने औपचारिक रूप से प्रस्ताव आगे बढ़ाया और फिर नई दिल्ली और पेरिस के बीच इस पर बातचीत शुरू हुई.
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