देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में ‘लोक संवर्धन पर्व’ के तहत आयोजित हरेला महोत्सव में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का पारंपरिक हरेला पर्व पूरी दुनिया को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है और विकास के साथ प्रकृति का संतुलन बनाए रखना जरूरी है.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे पूर्वज सदियों पहले ही समझ चुके थे कि मानव जीवन जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर निर्भर है. इसलिए प्राकृतिक संसाधनों को बचाना सभी की जिम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और बढ़ते प्रदूषण जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच हरेला पर्व पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता का प्रतीक है.
धामी ने कहा, “विकास की दौड़ में हम अपनी विरासत और हरियाली को पीछे नहीं छोड़ सकते. विकास तेजी से हो रहा है, लेकिन हम पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच संतुलन बनाने का प्रयास कर रहे हैं. जब मीडिया हमारे विकास मॉडल के बारे में पूछती है, तो हम इसे ‘इकोलॉजी और इकोनॉमी’ पर आधारित मॉडल बताते हैं.”
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा मानव कल्याण और सतत विकास के लिए बेहद जरूरी है.
इससे पहले मुख्यमंत्री ने हरेला पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लोगों से प्रकृति के सम्मान और संरक्षण की पूर्वजों की परंपरा को अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि जल और जीवन दोनों को बचाना होगा तथा पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण करना समय की जरूरत है.