नई दिल्ली: मध्यप्रदेश के गांधीसागर अभयारण्य में रविवार को मादा चीता सीसीबी2 को जंगल में विमुक्त किया जाएगा. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उसे छोड़ेंगे. सीसीबी2 को बोत्सवाना से भारत लाया गया था.
उसके पहुंचने के साथ अभयारण्य में 2 नर और 2 मादा सहित कुल 4 चीते हो जाएंगे. इससे गांधीसागर में चीता संरक्षण और पुनर्स्थापना के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
सीसीबी2 को 28 फरवरी 2026 को बोत्सवाना के घांजी से श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाया गया था. क्वारंटीन पूरा होने के बाद मई 2026 में उसे कूनो के जंगल में छोड़ा गया. उसने भारतीय परिस्थितियों को सहजता और तेज़ी से अपनाया और खुद को कूनो की पारिस्थितिकी में ढाल लिया.
अब उसे कूनो से गांधीसागर स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां वह तीन अन्य चीतों के साथ रहेगी. गांधीसागर में चीते प्रभाष, पावक और धीरा उसका इंतिज़ार कर रहे हैं.
बोत्सवाना से कूनो और फिर गांधीसागर तक की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रोजेक्ट चीता के निरंतर विस्तार की कहानी बताई जा रही है. इसे भारत में चीतों की नई पीढ़ी की उम्मीद कहा गया है.
रिपोर्ट करीब 200 शब्दों की है. मूल में “प्रोजेक्ट चीता मुख्यमंत्री के नेतृत्व में फल-फूल रहा है” वाली बात सरकारी दावा है, इसलिए मैंने उसे तथ्य की तरह नहीं रखा है. चाहें तो इसे मुख्यमंत्री के बयान के तौर पर जोड़ दूं.
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