scorecardresearch
Friday, 18 September, 2026
होमराजनीतितमिलनाडु में लंबे समय से जारी बिजली कटौती के पीछे क्या है वजह? मांग बढ़ने से विजय सरकार पर बढ़ा दबाव

तमिलनाडु में लंबे समय से जारी बिजली कटौती के पीछे क्या है वजह? मांग बढ़ने से विजय सरकार पर बढ़ा दबाव

तमिलनाडु इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल की लगभग 16,000-17,000 MW की पीक डिमांड से बढ़कर यह लगभग 19,000-20,500 MW हो गई है.

Text Size:

चेन्नई: ऑफिस संभालने के चार महीने बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय एक संकट का सामना कर रहे हैं. पिछले कुछ महीनों से बिना किसी तय समय के बिजली कटौती को लेकर लोगों में गुस्सा है. सितंबर में बिजली की मांग में असामान्य बढ़ोतरी और पवन ऊर्जा उत्पादन में भारी गिरावट के बीच यह समस्या और बढ़ गई है.

चेन्नई के कुछ हिस्सों में शुरुआती विरोध के बाद अब यह प्रदर्शन कई जिलों तक फैल गया है. इनमें तिरुनेलवेली, त्रिची, करूर और नमक्कल शामिल हैं. लोगों की शिकायत है कि रात में लंबे समय तक बिजली कटौती होती है, वोल्टेज कम रहता है और रोजमर्रा की जिंदगी और कारोबार प्रभावित हो रहे हैं.

चेन्नई में बिजली की सबसे ज्यादा मांग मई और जून में 5,000 MW को पार कर गई थी. यह मांग अभी भी 4,200-4,500 MW के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जबकि इस मौसम में आम तौर पर यह 3,500-3,800 MW रहती है. पूरे राज्य में बिजली की सबसे ज्यादा मांग इससे पहले 21,000 MW से भी ज्यादा पहुंच गई थी.

विपक्ष के नेता और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के नेता उदयनिधि स्टालिन ने स्थिति को ठीक से नहीं संभालने के लिए सरकार की आलोचना की है. 12 सितंबर को X पर एक पोस्ट में उन्होंने लगातार बिना बताए हो रही बिजली कटौती और वोल्टेज की समस्या से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लोग सड़कों पर उतरकर विरोध कर रहे हैं.

CTR निर्मल कुमार पर निशाना साधते हुए उदय ने ऊर्जा मंत्री पर समस्याओं को ठीक करने के बजाय बेवजह और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि “फ्यूज उड़ा हुआ” तमिलगा वेत्रि कझगम (TVK) की सरकार बिजली जैसी बुनियादी जरूरत भी पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही है.

अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) समेत दूसरे विपक्षी दलों ने भी बिना घोषणा के लोड शेडिंग और बिजली की बढ़ी मांग को ठीक से नहीं संभालने को लेकर विजय सरकार पर हमला किया है.

तमिलनाडु बिजली बोर्ड के अधिकारियों ने कहा है कि बिजली की सबसे ज्यादा मांग काफी बढ़ गई है. पिछले साल करीब 16,000-17,000 MW की सबसे ज्यादा मांग थी, जो अब बढ़कर करीब 19,000-20,500 MW हो गई है.

इस बढ़ोतरी की एक वजह लंबे समय तक चलने वाली गर्मी है, जिसके कारण सितंबर में भी कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल ज्यादा हो रहा है. दूसरी वजह पवन ऊर्जा उत्पादन में भारी गिरावट है.

बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, तमिलनाडु में करीब 3.5 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं. इनमें से लगभग 2.46 करोड़ घरेलू उपभोक्ता हैं.

लंबे समय तक गर्मी रहने के कारण कूलिंग के लिए घरेलू बिजली की मांग कुल बिजली खपत का एक बड़ा हिस्सा है. हाई-टेंशन (HT) औद्योगिक और व्यावसायिक मांग भी बिजली बिक्री में बड़ी हिस्सेदारी रखती है. हालांकि, हाल के वर्षों में बिजली बोर्ड की HT बिक्री कम हुई है, क्योंकि कई उद्योग कैप्टिव बिजली उत्पादन और ओपन-एक्सेस रिन्यूएबल पावर की ओर जा रहे हैं.

लगभग 46,000-47,000 MW की कुल स्थापित क्षमता में से पवन, सौर, हाइड्रो, बायोमास और को-जनरेशन जैसी रिन्यूएबल ऊर्जा की क्षमता करीब 28,348 MW है. वहीं थर्मल पावर जैसे पारंपरिक स्रोतों की क्षमता करीब 18,500 MW है. राज्य के स्वामित्व वाली बिजली उत्पादन क्षमता करीब 3,495 MW ही है.

पवन और सौर ऊर्जा रिन्यूएबल ऊर्जा का सबसे बड़ा हिस्सा हैं, लेकिन इनका उत्पादन लगातार एक जैसा नहीं रहता. तमिलनाडु बिजली बोर्ड (TNEB) के अधिकारियों का कहना है कि इस सितंबर में पवन ऊर्जा उत्पादन करीब 1,500 MW कम हुआ है. दूसरी ओर, रिन्यूएबल ऊर्जा स्रोतों से मिलने वाली बिजली भी सीमित है. दोपहर के बाद सौर ऊर्जा उत्पादन कम हो जाता है और पवन ऊर्जा मौसमी है.

यह भी पढ़ें: अरुंबक्कम से पेरंबूर तक, बिजली कटौती के कारण चेन्नई बेहाल. TANGEDCO ने 20 ब्लैक स्पॉट की पहचान की

पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर, कई सालों से टैरिफ में बदलाव नहीं

इससे पहले मई में TNEB के पूर्व चेयरपर्सन जे. राधाकृष्णन ने पुराने ट्रांसमिशन सिस्टम, कई सालों से टैरिफ में बदलाव नहीं होने और पुराने डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर ध्यान दिलाया था, जो बिजली कटौती की वजह बन रहे हैं. बोर्ड ने बिजली विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी की ओर भी ध्यान दिलाया था.

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने सवाल उठाया है कि जून से HT उपभोक्ताओं को इंडियन एनर्जी एक्सचेंज से ओपन-एक्सेस के जरिए बिजली खरीदने के लिए स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर से स्थायी मंजूरी क्यों नहीं मिल पा रही है. ओपन-एक्सेस सिस्टम के तहत ऐसे उपभोक्ताओं का सीधे पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदना आम बात है, ताकि उन्हें पूरी तरह तमिलनाडु पावर डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (TNPDCL) पर निर्भर न रहना पड़े.

इस वजह से करीब 1,000 MW की औद्योगिक बिजली मांग TNPDCL के जरिए पूरी करनी पड़ रही है. यह ऐसे समय में हो रहा है जब TNPDCL खुद अतिरिक्त बिजली खरीद रहा है. मार्च से सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर्स को कोई मंजूरी नहीं दी है. समीक्षा प्रक्रिया के बीच नए आवेदन भी नहीं मांगे गए हैं.

बुधवार को इस मुद्दे पर जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री ने कहा कि आपातकालीन कदम उठाए जाने के बाद बिजली उत्पादन में कमी के कारण राज्य में कुल बिजली की कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर होने वाली बिजली कटौती मुख्य रूप से ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन में खराबी के कारण हो रही है.

कुमार ने मीडिया से कहा, “पवन ऊर्जा उत्पादन सितंबर में आम तौर पर कम होता है, लेकिन इस साल मांग 2,000 MW से ज्यादा बढ़ गई है. पिछले हफ्ते हमने 2,000 MW बिजली खरीदी थी और आज फिर 1,500 MW की कमी है. इसलिए टीम ने स्थिति संभालने के लिए फिर 1,500 MW बिजली खरीद ली है.”

उन्होंने कहा, “आपने निश्चित रूप से देखा होगा कि बाकी सभी राज्यों में भी बिजली की ऐसी ही कमी है. दूसरे राज्यों ने लोड शेडिंग का रास्ता अपनाया है, क्योंकि वे अतिरिक्त बिजली खरीदना नहीं चाहते.”

जून में कुमार ने बिजली क्षेत्र पर एक White Paper पेश किया था. इसमें करीब 2.47 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का जिक्र किया गया था. उन्होंने पुराने हो चुके बिजली संसाधनों और खाली पदों की समस्या भी बताई थी. इसके साथ ही उन्होंने बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन को आधुनिक बनाने के लिए कई हजार करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव रखा था. इसमें स्टोरेज के साथ रिन्यूएबल ऊर्जा को बढ़ाने पर भी जोर था. लक्ष्य 2031 तक बिजली के कुल मिश्रण में 50 प्रतिशत रिन्यूएबल ऊर्जा शामिल करना है.

बुधवार को कुमार ने कहा कि तमिलनाडु लोगों को परेशानी से बचाने के लिए लगातार बिजली सप्लाई को प्राथमिकता दे रहा है. उन्होंने कहा कि लंबे समय के बिजली खरीद समझौतों पर काम किया जा रहा है और आने वाले महीनों में इनका फायदा मिलना शुरू होने की उम्मीद है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: गंगा जल संधि पर बांग्लादेशी जल संसाधन मंत्री की मांग, कहा—नए समझौते में गारंटी क्लॉज शामिल करे भारत


 

share & View comments