चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने बुधवार को ऐलान किया कि उनकी सरकार पिछली द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) सरकार के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज सभी लंबित आपराधिक मामलों को वापस लेगी.
विधानसभा में नियम 110 के तहत खुद से बयान देते हुए विजय ने कहा कि अपनी रोजी-रोटी बचाने वालों के साथ पहले किया गया व्यवहार “अमानवीय” था. उन्होंने इस फैसले को एक मानवीय और लोकतांत्रिक कदम बताया, जिसका मकसद प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करना और नागरिकों तथा प्रशासन के बीच भरोसा फिर से बनाना है.
उन्होंने कहा कि रोजी-रोटी, अधिकार और कल्याण से जुड़े मुद्दों पर किसानों और शिक्षकों के खिलाफ दर्ज मामले वापस ले लिए जाएंगे, चाहे उन पर किसी भी कानूनी प्रावधान के तहत केस दर्ज किया गया हो.
“यह सरकार किसानों और शिक्षकों और उनकी जायज मांगों के साथ खड़ी रहेगी. यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों को और मजबूत करेगा और आम लोगों तथा सरकार के बीच भरोसा बढ़ाएगा.”
विजय ने खास तौर पर तिरुवन्नामलाई जिले में SIPCOT औद्योगिक क्षेत्र परियोजना का विरोध करने वाले किसानों का जिक्र किया, जिनमें से कुछ को कड़े गुंडा एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया था.
उन्होंने यह भी कहा कि कांचीपुरम में प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के खिलाफ लंबे समय तक चले आंदोलन में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मामले भी वापस लिए जाएंगे. इन लोगों ने उपजाऊ खेती की जमीन, जल निकायों और पारंपरिक रोजी-रोटी के नुकसान को लेकर चिंता जताई थी.
यह राहत उन शिक्षकों को भी दी गई है, जिनके खिलाफ इन प्रदर्शनों के दौरान वेतन बढ़ाने, पेंशन, बेहतर काम करने की स्थिति और ड्यूटी के घंटों समेत दूसरी मांगों को लेकर केस दर्ज किए गए थे.
इस बीच, विपक्षी डीएमके ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाए और कहा कि पिछली सरकार ने खुद दूसरे मामलों में हजारों केस वापस लिए थे. वहीं, कुछ सदस्यों ने हाल के प्रदर्शनों में शामिल लोगों के लिए भी इसी तरह की राहत की मांग की.
परंदूर में प्रदर्शन का नेतृत्व एकानापुरम और आसपास के गांवों के किसानों ने किया था. यह प्रदर्शन तीन साल से ज्यादा समय तक चला. चेन्नई के दूसरे एयरपोर्ट के लिए कई गांवों में फैली हजारों एकड़ जमीन के अधिग्रहण का स्थानीय लोगों ने विरोध किया. उन्होंने विस्थापन के खतरे, दलदली इलाकों और चेन्नई में बाढ़ से बचाव से जुड़े जल स्रोतों के नष्ट होने और रोजी-रोटी के नुकसान का हवाला दिया.
पुलिस ने कई मामले दर्ज किए थे. इनमें प्रदर्शन के आयोजकों के खिलाफ 17 से ज्यादा आपराधिक मामले भी शामिल थे. इनमें चुनाव का बहिष्कार करने के बाद 10 किसानों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर, गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने और सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने से जुड़ी धाराओं के तहत 137 लोगों के खिलाफ मामला, 150 से ज्यादा लोगों को नोटिस और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में करीब 15 सिविल केस शामिल थे. विजय सरकार ने हाल ही में इस परियोजना को रद्द कर दिया था.
तिरुवन्नामलाई में चेय्यार के आसपास के गांवों के किसानों ने SIPCOT के फेज-III विस्तार के लिए करीब 3,000 एकड़ कृषि भूमि के अधिग्रहण के खिलाफ प्रदर्शन किया था. उनका कहना था कि इससे उपजाऊ खेती की जमीन और उनकी रोजी-रोटी को खतरा है.
पुलिस ने नवंबर 2023 में पहले दर्ज एफआईआर के आधार पर 20 किसानों को गिरफ्तार किया था, जबकि सात लोगों के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था. आलोचना के बीच DMK सरकार ने बाद में इनमें से ज्यादातर लोगों की गुंडा एक्ट के तहत हिरासत खत्म कर दी थी, हालांकि कई लोगों के खिलाफ मूल मामले अभी भी लंबित थे.
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) और पट्टाली मक्कल कच्ची (PMK) ने पहले ही सरकार से किसानों और शिक्षकों के खिलाफ ये मामले वापस लेने की मांग की थी. उनका कहना था कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से किए गए थे और इन लोगों को लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने का अधिकार था.
ऐलान के बाद CPI ने मांग की कि यह छूट उन लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों पर भी लागू की जाए, जिन्होंने राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (NEET) के खिलाफ प्रदर्शन किया था. वहीं PMK ने नेवेली लिग्नाइट कॉरपोरेशन (NLC) के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों के मामलों को भी वापस लेने की मांग की.
कानून मंत्री सीटीआर निर्मल कुमार ने कहा कि सरकार इन मांगों की जांच करेगी और उन पर विचार करेगी.
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