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Wednesday, 2 September, 2026
होमदेश‘वहां मजबूत लॉबी है’: CAPF में IPS प्रतिनियुक्ति पर SC सख्त, पूछा—अपने अफसरों को क्यों दबा रहे?

‘वहां मजबूत लॉबी है’: CAPF में IPS प्रतिनियुक्ति पर SC सख्त, पूछा—अपने अफसरों को क्यों दबा रहे?

सुप्रीम कोर्ट CAPF कैडर के अधिकारियों की उस अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 को चुनौती दी गई है. इस कानून ने बलों में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को औपचारिक रूप दिया है.

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नई दिल्ली: केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के अपने कैडर के अधिकारियों द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने बुधवार को केंद्र सरकार से सवाल किया कि वह अर्धसैनिक बलों में IPS और अपने कैडर के अधिकारियों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने में क्यों नाकाम रही है. 2026 के कानून के जरिए CAPF में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को औपचारिक रूप दिया गया है.

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पूछा, “क्या आपको लगता है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में प्रबंधन के पद संभालने के लिए कोई योग्य अधिकारी नहीं है? यह गलत है. बिल्कुल गलत है. CRPF, ITBP और BSF में ऐसे अधिकारी हैं, जिन्होंने 25-30 साल तक सेवा की है, फिर भी उन्हें मौका नहीं दिया गया…आप उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं…वे भी हमारी सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं. वे भी हमारे लिए लड़ रहे हैं…उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिए हैं….”

ASG भाटी ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि CAPF से जुड़ा नीतिगत फैसला “यह बनाम वह” का मामला नहीं है.

हालांकि, न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा, “आपने ही यह स्थिति बनाई है.”

उन्होंने मौखिक रूप से आगे कहा, “मुझे यह शब्द इस्तेमाल करने के लिए खेद है, लेकिन वहां एक मजबूत लॉबी है और वे लगभग…हम इस पर कोई राय नहीं देना चाहेंगे…इन अधिकारी कैडरों के साथ…CRPF, ITBP, BSF…उन्हें पूरी तरह दबा दिया गया है.”

न्यायमूर्ति भुइयां और अतुल शरच्चंद्र चंदुरकर की बेंच CAPF कैडर के अधिकारियों की कई अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. ये याचिकाएं केंद्र सरकार के खिलाफ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट, 2026 को लेकर दायर की गई हैं. इस कानून ने बलों में वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर, यानी इंस्पेक्टर जनरल (IG) रैंक से IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को औपचारिक रूप दिया है.

याचिकाकर्ताओं ने अप्रैल में अधिसूचित किए गए इस कानून के प्रावधानों को रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की है. उन्होंने याचिका में कहा कि यह कानून मई 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लगभग पलट देगा. उस फैसले के बाद सभी CAPF में कैडर रिव्यू का रास्ता खुला था और दो साल के भीतर प्रतिनियुक्ति पर आने वाले IPS अधिकारियों की संख्या धीरे-धीरे कम करने के निर्देश दिए गए थे. बाद में केंद्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर में खारिज कर दिया था.

इस साल CAPF कैडर के अधिकारियों के विरोध और आलोचना के बावजूद सरकार ने CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट लागू कर दिया.

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के सचिवों से मई 2025 के फैसले में दिए गए निर्देशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी. इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने एक हलफनामा दाखिल कर कहा था कि केंद्र सरकार शीर्ष अदालत के निर्देश के मुताबिक कैडर रिव्यू की प्रक्रिया पूरी करने के लिए “कोई कसर नहीं छोड़ रही है.”

मोहन ने अदालत को बताया था, “अंत में यह प्रस्तुत किया जाता है कि सभी CAPF के कैडर रिव्यू से जुड़े प्रस्तावों की गृह मंत्रालय में जांच की गई है, इंटीग्रेटेड फाइनेंस डिवीजन (IFD) ने उन पर सहमति दी है और गृह मंत्री की मंजूरी के बाद आगे विचार के लिए DoPT को भेज दिया गया है.”

उन्होंने अदालत को यह भी बताया था कि मई 2025 के निर्देशों के बाद से अब तक CAPF में IG रैंक तक कुल 46 IPS अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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