लखनऊ: असदुद्दीन ओवैसी के 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अभियान को बुधवार को झटका लगा. उनके ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख टीवी चेहरे और राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार कांग्रेस में शामिल हो गए. इसके साथ ही 2017 में शुरू हुआ उनका AIMIM से जुड़ाव खत्म हो गया.
कांग्रेस में शामिल होने के कार्यक्रम के दौरान वकार ने AIMIM पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि वह बीजेपी की “B टीम” की तरह काम कर रही है. वकार ने कहा, “मैं उन लोगों का साथ नहीं दे सकता जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) की B टीम के रूप में काम कर रहे हैं. मैंने AIMIM को यह सोचकर जॉइन किया था कि यह एक सेक्युलर पार्टी है, जो BJP के खिलाफ लड़ रही है, लेकिन धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि पार्टी BJP के खिलाफ कम और अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ज्यादा लड़ रही थी.”
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस लोकतंत्र को बचाने के लिए लड़ रही है. “जो कोई भी कांग्रेस के खिलाफ काम करता है, वह असल में BJP की मदद कर रहा है. मैं राहुल गांधी के साथ हूं. सिर्फ वही लोग BJP से लड़ सकते हैं जो राहुल गांधी के साथ खड़े हैं.”
पार्टी नेता ओवैसी पर निशाना साधते हुए वकार ने कहा कि AIMIM जिन पार्टियों के साथ गठबंधन करती है, उन्हें राजनीतिक नुकसान हुआ है. उन्होंने कहा, “ओवैसी ने जिस भी पार्टी के साथ गठबंधन किया है, उसे नुकसान हुआ है. कर्नाटक में कुमारस्वामी, तेलंगाना में केसीआर और महाराष्ट्र में प्रकाश आंबेडकर इसके उदाहरण हैं.”
लखनऊ के रहने वाले वकार AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर टीवी पर लगातार नजर आने की वजह से उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाना-पहचाना चेहरा बन गए थे. टीवी एंकरों पर उनकी आम तौर पर की जाने वाली एक टिप्पणी पहले सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि उन्हें कांग्रेस में शामिल कराने में पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख और राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी की भूमिका रही.
अभी तक न तो असदुद्दीन ओवैसी और न ही किसी वरिष्ठ पदाधिकारी ने वकार के कांग्रेस में जाने पर कोई टिप्पणी की है.
सपा से AIMIM और अब कांग्रेस
AIMIM में शामिल होने से पहले वकार करीब दो दशक तक समाजवादी पार्टी के साथ रहे थे. ऐसे में उनका कांग्रेस में जाना खास तौर पर महत्वपूर्ण है. उत्तर प्रदेश की इस पार्टी के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने के बावजूद उन्होंने समाजवादी पार्टी में वापस जाने के बजाय कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया है.
सूत्रों के अनुसार, वकार कुछ समय से AIMIM की उत्तर प्रदेश इकाई के फैसलों से खुश नहीं थे. पिछले कुछ महीनों में उनकी नाराज़गी और बढ़ गई थी. इसके बाद उनके कांग्रेस में जाने की अटकलें तेज़ हो गई थीं.
उनका पार्टी छोड़ना उत्तर प्रदेश में AIMIM के लिए महत्वपूर्ण समय पर हुआ है. ओवैसी आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगातार जुटे हुए हैं और कई बार कह चुके हैं कि AIMIM पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी.
हालांकि, पार्टी ने अभी तक यह तय नहीं किया है कि वह कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगी. ओवैसी का कहना है कि राज्य में AIMIM का संगठन मजबूत हुआ है और ज्यादा से ज्यादा मतदाता अब इसे एक अलग राजनीतिक ताकत के रूप में देखने लगे हैं.
ओवैसी ने पिछले महीने कहा था कि AIMIM चुनाव लड़ेगी और अगर पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहता है तो इससे उसे भविष्य में उन विधानसभा क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलेगी, जहां वह अपना दावा मजबूत कर सकती है. उन्होंने AIMIM को ‘वोट काटने वाली’ पार्टी कहे जाने की धारणा को भी चुनौती देने की कोशिश की है. इसके बजाय वह इसे एक स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं.
पिछले छह महीनों से ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा दी हैं. माना जा रहा है कि वह चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (ASP) के साथ गठबंधन की दिशा में काम कर रहे हैं, हालांकि अभी तक किसी भी पार्टी ने आधिकारिक तौर पर गठबंधन की घोषणा नहीं की है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, दोनों पार्टियों के नेतृत्व की जल्द ही बैठक होगी, जिसमें गठबंधन को अंतिम रूप दिया जाएगा. दोनों कुछ और छोटी पार्टियों के साथ आने का इंतजार कर रहे हैं.
यूपी में AIMIM का प्रदर्शन
2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में AIMIM ने राज्य की 403 सीटों में से 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था. उसके ज्यादातर उम्मीदवार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उतारे गए थे. पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी और उसे कुल वोटों का करीब 0.4 प्रतिशत मिला.
2024 के लोकसभा चुनाव में ओवैसी ने पल्लवी पटेल की अपना दल (कमेरावादी) को समर्थन दिया था. इस समझौते के तहत AIMIM ने अपने चुनाव चिह्न पर कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था.
उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी भूमिका है. इसलिए कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और AIMIM के लिए यह समुदाय एक महत्वपूर्ण वोटर समूह है. ये सभी पार्टियां मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपना समर्थन मजबूत और बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. वकार के जाने के बाद AIMIM 2027 के चुनाव से पहले मुस्लिम समुदाय के दूसरे युवा चेहरों को आगे लाने की कोशिश कर सकती है.
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