चेन्नई: मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने पिछली DMK सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप लगाए. उन्होंने इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक दस्तावेज और दशकों पुरानी सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला दिया.
विधानसभा में बोलते हुए विजय ने महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध और ड्रग्स के खतरे को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात कही. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी. विजय ने विधानसभा में कहा, “गलती करने वाला कोई भी हो, वह किसी भी पार्टी से जुड़ा हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. हमारा मानना है कि कानून की नजर में सभी बराबर हैं.”
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं पर निजी हमले और दोहरे मतलब (डबल मीनिंग) वाली टिप्पणियां बंद होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि लोग ऐसी चीजों को देख रहे हैं. उन्होंने कहा, “महिलाओं के बारे में दोहरे मतलब वाली बात कहने से पहले अपने घर की महिलाओं के बारे में सोचें.”
उनकी यह टिप्पणी DMK नेता उदयनिधि स्टालिन की उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसे कथित तौर पर अभिनेता त्रिशा के खिलाफ माना गया था. इसके अलावा इंडस्ट्रीज मिनिस्टर कीर्तना के लुक अलाइक को लेकर ऑनलाइन की गई टिप्पणियों का भी मामला सामने आया था. विजय ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता पर अतीत में हुए हमलों का भी जिक्र किया.
विजय ने कहा कि DMK ने उन्हें चुनौती दी थी कि वे पिछली सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के जिन तीन विभागों की बात उन्होंने पहले की थी, उनकी फाइलें खोलें.
उन्होंने कहा, “इन फाइलों को खोलने से पहले मैं 1988 में DMK सरकार के भ्रष्टाचार पर सरकारिया आयोग की रिपोर्ट पढ़ना चाहता हूं. सरकारिया आयोग ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि पर मुख्यमंत्री के रूप में अपने आधिकारिक पद का गलत इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था. प्रवर्तन निदेशालय ने भी DMK पर पार्टी फंड के जरिए भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है. ED ने कहा है कि पिछली सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन, पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन और पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी ने पार्टी फंड के नाम पर पैसे इकट्ठा किए.”
उन्होंने कहा कि सरकारिया आयोग ने कमीशन की मांग का भी जिक्र किया था. इसमें एक टेंडर से जुड़े 2.5 प्रतिशत “पार्टी फंड” की कथित मांग भी शामिल थी.
उन्होंने ED के उस दस्तावेज के कुछ हिस्से पढ़े, जो पिछली DMK सरकार को भेजा गया था. इसमें कहा गया था कि म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन और वॉटर सप्लाई जैसे विभागों में कॉन्ट्रैक्ट की रकम का 7.5 से 10 प्रतिशत “पार्टी फंड” के रूप में लिया गया था. विजय ने इसे रिश्वत बताया और कहा कि यह रकम किस्तों में ली जाती थी, “जैसे लोन की EMI.”
विजय ने कहा कि ED ने वरिष्ठ स्टालिन, जूनियर स्टालिन और बालाजी को सीधे लाभ पाने वाला बताया था. उन्होंने जोर देकर कहा कि ये उनके निजी आरोप नहीं हैं, बल्कि ED के दस्तावेजों में दर्ज बातें हैं.
विजय ने DMK नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के करीबी सहयोगी रतीश की भूमिका पर भी सवाल उठाए. तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) से जुड़े कथित अनियमितताओं और अन्य मामलों की ED जांच में रतीश का नाम सामने आया है. पिछली DMK सरकार के दौरान “पार्टी फंड” और म्युनिसिपल एडमिनिस्ट्रेशन के कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े दस्तावेजों में भी उसका जिक्र है.
विजय ने यह भी सवाल किया कि रतीश दुबई में “क्यों छिपा हुआ है” और पिछली सरकार के साथ उसका क्या संबंध था.
TVK सरकार के सत्ता में आने के बाद से DMK लगातार राज्य में खराब कानून-व्यवस्था को लेकर आरोप लगाती रही है. इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन महीनों में सामने आए अपराधों की बड़ी वजह पुरानी दुश्मनी और बदला लेना थी. उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि मौजूदा सरकार के तहत अचानक कानून-व्यवस्था खराब हो गई है.
पुलिस विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए विजय ने पुलिस में सुधार की योजनाएं बताईं. उन्होंने पुलिस को लोगों की सुरक्षा करने वाली ताकत बताया, न कि सत्ता का केंद्र. उन्होंने कहा कि पुलिस को कानून मानने वाले लोगों की दोस्त और कानून तोड़ने वालों की दुश्मन होना चाहिए.
उन्होंने विधानसभा को यह भी बताया कि कोयंबटूर में एक कॉलेज छात्र की हत्या के मामले में 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
सदन में विजय के आरोपों के खिलाफ DMK सदस्यों ने विरोध किया. उन्होंने स्पीकर के पोडियम को घेर लिया और वहीं बैठकर प्रदर्शन किया. स्पीकर जे. सी. डी. प्रभाकर ने तुरंत जवाब देने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने मुख्यमंत्री के भाषण में रुकावट डाली थी.
विजय ने संकेत दिया कि स्पीकर को विपक्ष को बोलने की अनुमति देनी चाहिए. बाद में उन्होंने खुद भी विपक्ष को बोलने की अनुमति देने का अनुरोध किया. हालांकि, स्पीकर ने कहा कि इन परिस्थितियों में अनुमति नहीं दी जा सकती. इसके बाद DMK के सदस्य सदन से बाहर चले गए.
विधानसभा के बाहर विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने प्रेस से बातचीत की. उन्होंने विजय पर कानून-व्यवस्था और सरकार के शुरुआती कुछ महीनों के कामकाज से जुड़े सवालों से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने “डायलॉग और रील्स वाले अंदाज” में बात की और मौजूदा मुद्दों के बजाय 1960 और 1970 के दशक की घटनाओं पर ध्यान दिया.
उन्होंने सरकारिया आयोग और मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट के बारे में विजय की जानकारी पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि ED के हवाले सिर्फ आरोप हैं और इन आरोपों के बावजूद DMK सरकारिया आयोग की रिपोर्ट के बाद कई बार सत्ता में वापस आई.
उदयनिधि ने कहा, “हम आज हो रही घटनाओं के बारे में सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन वह 1960 और 70 के दशक में वापस जा रहे हैं और बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं. किसी ने ये डायलॉग लिखकर उन्हें दिए हैं और वह उन्हें यहां बोल रहे हैं. सरकारिया आयोग की रिपोर्ट में कुछ भी नहीं है और यह बात सभी जानते हैं. हाल में हुई हत्याओं और कानून-व्यवस्था से जुड़ी घटनाओं के जवाब कहां हैं?”
उदयनिधि ने यह भी कहा कि स्पीकर ने विपक्ष को जवाब देने की अनुमति नहीं दी. उन्होंने संकेत दिया कि इस फैसले के पीछे बाहरी दबाव हो सकता है. उदयनिधि ने कहा, “CM विजय को लगता है कि अभी भी तमिलनाडु में DMK की सरकार है. उन्हें अपनी सरकार के पिछले तीन महीनों और भविष्य की अपनी योजनाओं के बारे में बात करनी चाहिए.”
DMK प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने भी आरोप लगाया कि विजय गठबंधन के अंदर की समस्याओं और दूसरे मौजूदा विवादों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रहे हैं.
सरवनन ने ANI से कहा, “विजय DMK से डरे हुए हैं. उनके पास सिर्फ 107 सीटें हैं और गठबंधन के अंदर पहले से ही काफी हलचल है. एक विधायक ने जाकर कहा है कि उन्हें मंत्री बनने और सरकार का समर्थन करने के लिए इतने करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई थी. कृपया कार्रवाई करें, सच्चाई पता करें कि उसका मतलब क्या था और वह किसकी बात कर रहे थे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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