नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ वकील आलोक कुमार ने राम मंदिर दान चोरी मामले के जांच अधिकारी को पत्र लिखकर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव और आम आदमी पार्टी के संजय यादव तथा अरविंद केजरीवाल से पूछताछ करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर जो आरोप लगाए हैं, उनकी जांच होनी चाहिए.
आलोक कुमार ने कहा कि इन नेताओं से उनके दावों के बारे में पूछताछ की जाए. अगर उनके आरोप गलत साबित होते हैं, तो कानून के मुताबिक उचित कार्रवाई की जाए.
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जो मंदिर के प्रबंधन के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया एक स्वायत्त निकाय है, इस समय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच के दायरे में है. ट्रस्ट के ट्रस्टी, जिनमें चंपत राय भी शामिल हैं, उनके इस्तीफे पर अंतिम फैसला अभी बाकी है.
अपने पत्र में कुमार ने लिखा, “हमें कई सार्वजनिक हस्तियों के बयान मिले हैं, जो टीवी चैनलों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए व्यापक रूप से प्रसारित हुए हैं. ये सभी बयान इस जांच के विषय से जुड़े हैं.”
उन्होंने सभी नेताओं का नाम लेते हुए लिखा कि इन लोगों ने कथित गड़बड़ी की निश्चित रकम भी बताई है. इनमें 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का दावा भी शामिल है.
उन्होंने आगे लिखा, “जो भी हो, इन नेताओं और अन्य लोगों के आरोपों से यह लगता है कि उन्हें इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों की जानकारी है.”
उन्होंने कहा, “निष्पक्ष, व्यापक और ईमानदार जांच सुनिश्चित करने के लिए इन लोगों को कानून के तहत बुलाया जाना चाहिए या उनके बयान दर्ज किए जाने चाहिए, ताकि वे यह बता सकें कि उनके आरोपों का तथ्यात्मक आधार क्या है, उन्हें यह जानकारी कहां से मिली और उनके पास ऐसे कौन से दस्तावेज या अन्य सबूत हैं जो उनके आरोपों का समर्थन करते हैं.”
उन्होंने आगे लिखा कि अगर इनमें से कोई भी नेता अपने आरोपों के समर्थन में भरोसेमंद सामग्री देता है, तो इससे जांच एजेंसी को सच्चाई तक पहुंचने में मदद मिलेगी.
उन्होंने लिखा, “इसके उलट, अगर जांच में यह पाया जाता है कि किसी व्यक्ति ने बिना किसी तथ्यात्मक आधार या सबूत के इतने गंभीर सार्वजनिक आरोप लगाए हैं, तो यह भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू होगा. अगर यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर या लापरवाही से बिना किसी आधार के झूठे आरोप लगाए हैं, तो जांच एजेंसी कानून के तहत उचित कार्रवाई करने पर विचार कर सकती है.”
उन्होंने कहा, “किसी को भी ऐसे बेबुनियाद आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जो नफरत, दुर्भावना और दुश्मनी का माहौल पैदा करें, और फिर वह बिना किसी कार्रवाई के बच निकले.”
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कानून अपना काम करेगा.
बाद में जारी एक वीडियो बयान में आलोक कुमार ने कहा, “इस मामले के जांच अधिकारी DSP हैं, इसलिए मैंने उन्हें पत्र लिखा. जिन लोगों के नाम मैंने लिए हैं, वे बड़े पदों पर हैं. इसलिए मैंने माना कि उन्होंने जो सार्वजनिक तौर पर कहा है, वह जरूर इस मामले से जुड़ी किसी जानकारी के आधार पर कहा होगा.”
उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, प्रोफेसर राम गोपाल यादव ने कहा कि 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा गायब हो गए हैं, जबकि हमारी जानकारी के मुताबिक कुल मिलाकर इतनी रकम दान में आई ही नहीं है.”
उन्होंने कहा, “इसलिए पुलिस को उनसे पूछना चाहिए कि उन्होंने यह आंकड़ा कैसे निकाला, उन्हें यह जानकारी किसने दी और क्या उनके पास इसे साबित करने वाले कोई दस्तावेज हैं. अगर वे यह जानकारी देते हैं, तो इससे जांच में मदद मिलेगी.”
उन्होंने आगे कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी हजारों करोड़ रुपये के दान का जिक्र किया है.
उन्होंने कहा, “मैं उन पर कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं. मैंने सिर्फ इतना कहा है कि उनसे सहयोग लिया जाए, क्योंकि ऐसा लगता है कि उनके पास ऐसी जानकारी है जो हमारे पास भी नहीं है.”
आलोक कुमार की यह मांग ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने राम मंदिर दान चोरी मामले पर अपना पहला आधिकारिक बयान जारी किया था. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने श्रद्धालुओं के दान में कथित गड़बड़ी को “निंदनीय” बताया था और “हिंदू समाज” से धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की थी.
पिछले हफ्ते आलोक कुमार ने यह भी कहा था कि इस विवाद से हिंदू समाज आहत है. उन्होंने मामले की फास्ट-ट्रैक जांच कराने और अयोध्या के राम मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज के लिए एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की मांग की थी.
इस बीच अयोध्या बार एसोसिएशन ने पुलिस को शिकायत देकर मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और प्रशासक गोपाल राव के खिलाफ कथित दान चोरी मामले में कार्रवाई की मांग की है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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