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Thursday, 16 July, 2026
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TVK सरकार का सचिवालय शिफ्ट करने का प्लान: जरूरत या राजनीतिक संदेश?

फ़ोर्ट सेंट जॉर्ज से ओमंदुरार और वापस, और अब कोयम्बेडु के प्रस्ताव तक, तमिलनाडु सरकार के मुख्यालय को अलग-अलग सरकारों की राजनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर बार-बार बदला गया है.

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चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में यह कोई नई बात नहीं है. एक सरकार नया सचिवालय (सेक्रेटेरिएट) बनाने या उसे दूसरी जगह ले जाने का फैसला करती है, लेकिन अगली सरकार आते ही उसे लागत, विरासत या विचारधारा का हवाला देकर बदल देती है.

अब विजय की अगुवाई वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिख रही है. सरकार चेन्नई के 36 एकड़ में फैले कोयंबेडु मोफुस्सिल बस टर्मिनस की जगह पर नया सचिवालय बनाने की संभावना पर विचार कर रही है. यह बस अड्डा कभी एशिया का सबसे बड़ा बस स्टेशन था और नवंबर 2002 में शुरू हुआ था. बाद में शहर में ट्रैफिक कम करने के लिए बस सेवाओं को चेन्नई के बाहरी इलाके में बने नए बस टर्मिनस में शिफ्ट कर दिया गया.

राज्य सरकार के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सचिवालय के लिए नई जगह की संभावना पर चर्चा चल रही है. इस प्रस्तावित परियोजना की लागत करीब 350 करोड़ रुपये आंकी गई है.

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दिप्रिंट से कहा, “इस पर अंदरूनी स्तर पर चर्चा चल रही है. अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि या नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ है.”

उन्होंने कहा, “मौजूदा सचिवालय में जगह की कमी है. सरकार ऐसा आधुनिक भवन बनाना चाहती है, जिसमें डिजिटल सुविधाएं हों, ताकि सरकारी अधिकारियों की आवाजाही आसान हो, आम लोगों के लिए भी आना-जाना सुविधाजनक हो और सार्वजनिक परिवहन से बेहतर कनेक्टिविटी मिले.”

सरकार का कहना है कि यह कदम कम खर्च वाला समाधान होगा. इससे फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर में मौजूद सचिवालय की लंबे समय से चली आ रही जगह की समस्या दूर होगी और अलग से नई परियोजना पर भारी खर्च भी नहीं करना पड़ेगा. साथ ही ट्रैफिक की समस्या कम करने में भी मदद मिलेगी.

TVK के सूत्रों का कहना है कि पुराने बस टर्मिनस के मौजूदा ढांचे का इस्तेमाल करने से खर्च कम होगा और पश्चिमी चेन्नई में मौजूद इस कम इस्तेमाल हो रही सरकारी जमीन का बेहतर उपयोग हो सकेगा.

लेकिन कई लोगों के मन में सवाल है कि सचिवालय को शिफ्ट करना वास्तव में जरूरी है या यह सिर्फ राजनीतिक प्रतीकवाद है.

विपक्षी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) का कहना है कि इसकी कोई जरूरत नहीं है और यह सिर्फ राजनीतिक प्रतीकवाद है.

राजनीतिक विश्लेषकों का भी मानना है कि यह कदम राजनीतिक संदेश देने की कोशिश है.

राजनीतिक विश्लेषक अरुण कुमार ने दिप्रिंट से कहा, “इस तरह पार्टी के प्रतीकवाद को पहले भी देखा गया था, जब करुणानिधि ने ओमंदुरार मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल को सचिवालय में बदल दिया था.”

उन्होंने कहा, “बाद में जब ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) सत्ता में आई, तो राजनीतिक बदले की भावना के तहत सचिवालय को फिर से फोर्ट सेंट जॉर्ज ले जाया गया. अगर TVK कोयंबेडु में नया भवन बनाती है और बाद में DMK सत्ता में आती है, तो वह भी यही करेगी. हर पार्टी के लिए यह सिर्फ प्रतीकवाद है.”

सत्ता के केंद्र को बदलने की राजनीति

तमिलनाडु सचिवालय फिलहाल मुख्य रूप से फोर्ट सेंट जॉर्ज परिसर से संचालित होता है. यह जगह औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ी हुई है. इसका निर्माण 1639-1640 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने शुरू किया था और यह मद्रास प्रेसीडेंसी का प्रशासनिक मुख्यालय था.

इस परिसर में 30 से ज्यादा सरकारी विभाग हैं. समय-समय पर इसकी मरम्मत और बदलाव किए गए हैं. इसके बावजूद अधिकारी लंबे समय से जगह की कमी, पुरानी सुविधाएं, अलग-अलग इमारतों में बिखरे विभाग और बढ़ते कर्मचारियों व डिजिटल ढांचे की जरूरतों को पूरा न कर पाने जैसी समस्याओं की शिकायत करते रहे हैं.

ब्रिटिश शासन और आजादी के शुरुआती वर्षों में फोर्ट सेंट जॉर्ज ही प्रशासन का मुख्य केंद्र रहा. लेकिन पिछले 20 साल से ज्यादा समय में अलग-अलग सरकारों ने या तो सचिवालय को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की या नया प्रशासनिक परिसर बनाने की योजना बनाई.

2000 के शुरुआती वर्षों में AIADMK नेता जे. जयललिता ने आधुनिक सुविधाओं की जरूरत बताते हुए सचिवालय को क्वीन मैरी कॉलेज या शोलिंगनल्लूर जैसी जगहों पर ले जाने की योजना बनाई थी. लेकिन विरोध और देरी की वजह से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी.

2006 से 2011 तक एम. करुणानिधि के नेतृत्व वाली DMK सरकार ने अन्ना सलाई स्थित ओमंदुरार गवर्नमेंट एस्टेट में नया विधानसभा-सचिवालय परिसर बनाया.

इसका उद्घाटन 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने किया था. इसे करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से बना अत्याधुनिक ग्रीन बिल्डिंग बताया गया था. इसमें आधुनिक सुविधाएं थीं और इसे विकास व बेहतर प्रशासन का प्रतीक माना गया था.

लेकिन 2011 में जयललिता के नेतृत्व में AIADMK की सत्ता में वापसी के बाद इस नए परिसर को जल्द ही छोड़ दिया गया.

सरकार फिर से फोर्ट सेंट जॉर्ज लौट आई और ओमंदुरार भवन को तमिलनाडु गवर्नमेंट मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में बदल दिया गया. इसका उद्घाटन करीब 2014 में हुआ.

सरकार ने इस फैसले को सरकारी खर्च बचाने और विरासत का सम्मान करने का फैसला बताया. हालांकि आलोचकों ने इसे राजनीतिक विरोधियों की परियोजना को खत्म करने की कोशिश माना.

आज भी यह अस्पताल आम लोगों की सेवा कर रहा है और बाद में आई DMK सरकारों ने इसे फिर से सचिवालय बनाने के सभी प्रस्तावों को साफ तौर पर खारिज कर दिया. इसी तरह दूसरी योजनाएं भी सरकार बदलने के साथ आती और खत्म होती रहीं.

TVK सरकार नया भव्य भवन बनाने की बजाय कोयंबेडु की मौजूदा जगह का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दे रही है. सरकारी अधिकारियों का मानना है कि शहर के बीचोंबीच स्थित कोयंबेडु एक अच्छा विकल्प हो सकता है.

लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि बस टर्मिनस की जगह सचिवालय बनाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि यह दूसरे सरकारी दफ्तरों और अदालतों से काफी दूर है. इसके अलावा कोयंबेडु में ट्रैफिक जाम की समस्या भी पहले से है.

अरुण कुमार ने कहा, “कोयंबेडु बस टर्मिनस को सचिवालय बनाना व्यवहारिक विकल्प नहीं है, क्योंकि रोज सरकारी अधिकारियों की आवाजाही से वहां ट्रैफिक और ज्यादा बढ़ जाएगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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