scorecardresearch
Monday, 15 July, 2024
होमराजनीतिवीरभद्र की विधवा के प्रति सहानुभूति और महंगाई बनी उपचुनाव में हार की वजह: हिमाचल BJP अध्यक्ष सुरेश कश्यप

वीरभद्र की विधवा के प्रति सहानुभूति और महंगाई बनी उपचुनाव में हार की वजह: हिमाचल BJP अध्यक्ष सुरेश कश्यप

भाजपा हिमाचल प्रदेश को लेकर चिंतित है क्योंकि यह इस पार्टी द्वारा शासित एकमात्र राज्य है, जहां वह 30 अक्टूबर के उपचुनाव में एक भी सीट जीतने में विफल रही. इसके चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की जा रही है.

Text Size:

नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप के अनुसार मंडी लोकसभा क्षेत्र के लिए 30 अक्टूबर को हुए उपचुनाव में भाजपा की हार का एक प्रमुख कारण दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के प्रति सहानुभूति की लहर थी. कांग्रेस नेता वीरभद्र सिंह, जिनकी 8 जुलाई को मृत्यु हो गई थी. राज्य के छह बार मुख्यमंत्री रहे हैं और यह उनकी विधवा प्रतिभा सिंह ने यह सीट जीती है.

पार्टी को इन उपचुनावों में राज्य के तीन विधानसभा क्षेत्रों – अर्की, फतेहपुर और जुब्बल-कोटखाई में भी हार का सामना करना पड़ा. सभी चार उपचुनाव मौजूदा जन प्रतिनिधियों की मौत की वजह से हुए थे. मंडी में 2019 में भाजपा ने जीती थी, वहीं अर्की और फतेहपुर सीटें पहले भी कांग्रेस के पास थीं. 2017 के विधानसभा चुनाव में जुब्बल-कोटखाई से बीजेपी को जीत मिली थी.

कश्यप ने कहा कि महंगाई और पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दिवंगत भाजपा नेता नरिंदर ब्रगटा के बेटे चेतन ब्रगटा को टिकट देने से इनकार करने के फैसले ने भी इस नुकसान में भूमिका निभाई. ब्रगटा ने जुब्बल-कोटखाई सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 41 फीसदी वोट हासिल किए.

उपचुनाव के नतीजों को लेकर पार्टी नेताओं में आशंकाएं व्याप्त हैं.

हिमाचल प्रदेश एकमात्र भाजपा शासित राज्य था जहां पार्टी इन उपचुनावों में एक भी सीट जीतने में विफल रही. इसके अलावा, जुब्बल-कोटखाई निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी की आधिकारिक उम्मीदवार नीलम सरायक को केवल 4 प्रतिशत वोट मिले जबकि चेतन ब्रगटा विजयी कांग्रेस उम्मीदवार के पीछे दूसरे स्थान पर रहे.

फतेहपुर में, पार्टी का वोट शेयर 2017 के 49 प्रतिशत से गिरकर 32 प्रतिशत हो गया. मंडी में, 2019 के लोकसभा चुनाव में इसका वोट शेयर 69.7 प्रतिशत था जो घटकर 48 प्रतिशत रह गया.

पार्टी आलाकमान ने अब तीनों विधानसभा क्षेत्रों और मंडी लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के मंडल अध्यक्षों को हार की गहन समीक्षा करने का निर्देश दिया है.

इसके बाद 24 नवंबर को होने वाली हिमाचल प्रदेश भाजपा के कोर ग्रुप और राज्य कार्यसमिति की बैठक के दौरान भी इनकी विस्तृत समीक्षा की जाएगी.

दिप्रिंट के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, कश्यप ने कहा, ‘उपचुनाव के नतीजों ने हमें अपने रास्ते सुधारने का मौका दिया है और विधानसभा चुनाव से पहले अपनी ग़लतियों को सुधारने का यह सबसे अच्छा मौका है. हम सचेत हो गए हैं. अब आगे देखने का समय है. कांग्रेस का सहानूभूति कार्ड बार-बार नहीं चलेगा. लेकिन हम इसे (इस पराजय को) हल्के में नहीं ले रहे और कार्यसमिति एवं कोर ग्रुप की बैठक में सारे कारणों की समीक्षा करेंगे.’


यह भी पढ़े: UP चुनाव पूर्व ‘देशभक्ति’ की भावना जगाने के लिए RSS बड़े स्तर पर मनाएगा अमृत महोत्सव, बनाई योजना


‘बाग़ी उम्मीदवार, करीबी मुकाबला’

चेतन बरागटा को टिकट न देने पर बात करते हुए कश्यप ने कहा, ‘राज्य इकाई ने जुब्बल-कोटखाई से बरागटा को टिकट आवंटित करने की सिफारिश की थी, लेकिन पार्टी केंद्रीय कमान ने कहा कि हम परिवार के सदस्यों को टिकट नहीं दे सकते.

इसकी वजह से चेतन बरागटा के लिये पूरी सहानुभूति उमड़ पड़ीं क्योंकि उनके पिता का निधन थोड़े दिन पहले ही हुआ था और वो सरकार में मंत्री भी थे.

वो बाग़ी होकर चुनाव लड़े और पार्टी का पूरा संगठन उनके साथ खड़ा हो गया. अब यह समीक्षा में ही पता चलेगा किसं गठन कैसे बाग़ी उम्मीदवार के पक्ष में खड़ा हो गया, पर एक संदेश फैल गया कि उनके साथ सही नहीं हुआ था.’

अन्य सीटों के बारे में बोलते हुए, कश्यप ने कहा, ‘फतेहपुर सीट से कांग्रेस के विजयी उम्मीदवार भवानी सिंह पठानिया के पिता सुजान सिंह पठानिया यहां से कई सालों से जीतते आ रहे थे. अर्की से तो वीरभद्र पिछली बार विधायक ही थे. मंडी लोकसभा सीट पर हमारी हार महज एक प्रतिशत वोट के अंतर से हुई है. वहां वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के लिए सहानुभूति फ़ैक्टर ने काम किया. पर हम छानबीन कर रहें है कि मंडी में हम 8-9 विधानसभा क्षेत्र में पीछे कैसे रह गए.’


यह भी पढ़े: बंगाल में हार को लेकर आलोचनाओं के बाद भी BJP आलाकमान की पसंद क्यों बने हुए हैं कैलाश विजयवर्गीय


‘आंतरिक असंतोष, खामियों की समीक्षा’

इस सवाल के जवाब में कि क्या पार्टी के भीतर बड़े पैमाने पर अंदरूनी कलह और भीतरघात ने भी हार में योगदान दिया, क्योंकि पार्टी के कार्यकर्ता उम्मीदवारों के चयन से नाखुश हैं, कश्यप ने कहा, ‘हारने की बहुत सारी वजहें होती है. कोई एक वजह नहीं होती.

छोटे छोटे कई कारकों ने काम किया. कहीं पर लोग सही मन से नहीं लगे तो, कहीं पर मंहगाई मुद्दा बन गई. सबने मेहनत तो पूरी की पर नतीजा हमारे पक्ष में नहीं आया. अब जो कमी रह गई है उसने हमारे लिए कोर्स करेक्शन का काम किया है. उपचुनाव के नतीजों ने हमें चुनाव में जाने से पहले अपनी कमियां सुधारने का मौक़ा दिया है.’

वे कहते हैं, ‘हमने स्थानीय ईकाईयों से उम्मीदवारों और चुनाव कार्य में लगे सभी लोग से बातचीत कर सभी तथ्य इकठ्ठा करने को कहा है और 24 नंबवर से लेकर 26 नंबवर तक हम हार के कारणों पर विस्तृत चर्चा करेगें. पहले कोर ग्रुप की बैठक 24 को होगी फिर कार्यसमिति की बैठक होगी, जिसमें सभी सदस्य बैठकर भविष्य का रोडमैप बनाएगें.’

कश्यप ने कहा कि चुनाव में अभी समय है और ‘हम पूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतरेगें.’


यह भी पढ़े: PM मोदी ने भाजपा की बैठक में दो किस्से सुनाकर दिया संदेश—आत्म संतुष्ट होकर सेवा भाव न छोड़ें


‘उलट-फेर होने की कोई संभावना नहीं’

पिछले कुछ समय से हिमाचल प्रदेश ने भाजपा और कांग्रेस सरकारों को बारी-बारी से मौका देने की प्रवृत्ति का पालन किया है, और उपचुनाव के नतीजों भी कांग्रेस के दुबारा उभरने का संकेत देते हैं.

2017 में कांग्रेस ने राज्य की 68 सीटों में से 21 पर जीत हासिल की, जबकि भाजपा कुल 44 सीटों के साथ सत्ता में आई थी.

कश्यप ने कहा, ‘हर कोई कांग्रेस की वास्तविक स्थिति के बारे में जानता है, और कांग्रेस के लिए खुश होने की ज़रूरत नहीं है.

क्योंकि हर बार सहानुभूति फ़ैक्टर नहीं चलता. वह सिर्फ एक बार इस्तेमाल हो सकता है. हमारी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है. हमने कोरोना के दौरान बेहतरीन काम किया है. मैं किसी उलटफेर की संभावना नहीं देखता. अगर मंडी में हवा उनके पक्ष में होती तो वे बड़ी मार्जिन से यह सीट जीतते. पर मंडी में भी उनकी जीत और हमारी हार में महज़ एक प्रतिशत का अंतर रहा है.’

मंडी में, भाजपा के लिए एक गंभीर समस्या वाला तथ्य यह भी है कि इस चुनाव में राज्य के दो मंत्री प्रभारी थे, फिर भी पार्टी उनके अपने इलाकों में पिछड़ गई. इस बारे में पूछे जाने पर, कश्यप ने कहा, ‘17 विधानसभा क्षेत्रों (जो मंडी लोकसभा सीट का भाग हैं) में से, हम आठ में आगे थे और अन्य नौ में कांग्रेस आगे थी. प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कारक और हम कुछ में पीछे क्यों रहें, यह तो समीक्षा के दौरान ही सामने आएगा. यह गहन आकलन का विषय है.’

सत्ता विरोधी लहर की समस्या और इससे निपटने की पार्टी की आगे की योजना पर कश्यप ने कहा, ‘कुछ इलाकों में नाराजगी है. जहां भी सत्ता विरोधी लहर होगी, सरकार उसकी पहचान करेगी और उससे निपटने को प्राथमिकता देगी. महामारी के कारण लोगों की नौकरी चली गई है. चूंकि पर्यटन हमारी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है, इसलिए हमारी सरकार के लिए इसे फिर से पटरी पर लाना और आम जनता के लिए अधिक रोजगार के अवसर पैदा करना एक उच्च प्राथमिकता होगी.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


यह भी पढ़े: वानखेड़े हों या पंजाब या बंगाल, दलित अधिकार आयोग पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप क्यों लग रहा है?


share & View comments