Monday, 23 May, 2022
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UP चुनाव पूर्व ‘देशभक्ति’ की भावना जगाने के लिए RSS बड़े स्तर पर मनाएगा अमृत महोत्सव, बनाई योजना

यूपी में 19 नवंबर से लेकर 16 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान में आरएसएस द्वारा तिरंगा यात्रा, वंदे मातरम गायन और स्वतंत्रता सेनानियों की याद जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) आजादी के अमृत महोत्सव के तहत एक महीने के सार्वजनिक अभियान के साथ उत्तर प्रदेश में एक तरह का ‘राष्ट्रवादी उत्साह’ पैदा करना चाहता है. यह महोत्सव भारतीय स्वतंत्रता के 75 साल पूरे होने पर मोदी सरकार ने पहल की है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वैचारिक अभिभावक माने जाने वाले संघ द्वारा किया जा रहा प्रचार अभियान 2022 में राज्य के विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले हो रहा है, और माना जाता है कि इस सब का उद्देश्य पार्टी के लिए जन समर्थन जुटाना है.

आरएसएस के नेताओं के अनुसार, इस अभियान के दौरान उनका संगठन तिरंगा यात्रा, वंदे मातरम गायन, स्वतंत्रता सेनानियों की याद और हर जिले में हजारों बैठकें और सेमिनार जैसे कार्यक्रम आयोजित करेगा. स्कूल-कॉलेजों में भी शोभा यात्रायें निकाली जाएंगी.

यह अभियान 19 नवंबर को झांसी की लड़ाका महारानी रानी लक्ष्मी बाई, जिन्होंने 1857 में स्वतंत्रता के लिए भारत के पहले संघर्ष में भाग लिया था, की 193 वीं वर्षगांठ के अवसर पर शुरू होगा. इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बुंदेलखंड की यात्रा पर होंगें, जहां से वह बीजेपी के 2022 के चुनाव प्रचार का शंखनाद करेंगे.

विजय दिवस (16 दिसंबर), जो 1971 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद भारत के समक्ष पाकिस्तानी सेनाओं के आत्मसमर्पण की याद दिलाता है, इस अभियान का अंतिम दिन होगा.

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इसके लिए यूपी की आरएसएस ईकाई ने हर ज़िले में अमृत महोत्सव समिति का गठन किया है जो विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे.

पता चला है कि अकेले काशी प्रान्त में ही आरएसएस 155 ब्लॉक-स्तरीय और 105 नगर-स्तरीय इकाइयों में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है. इनमें से प्रत्येक कार्यक्रम में लगभग 1,000-2,000 लोग शामिल होंगे.

काशी या वाराणसी राज्य के पूर्वांचल क्षेत्र में पड़ता है, जहां भाजपा 2017 के चुनावों में मिली अपनी भारी बढ़त बनाए रखने की पूरी कोशिश कर रही है.

आरएसएस के काशी प्रांत प्रचारक रणवीर सिंह दिप्रिंट से कहते हैं, ‘हमने प्रांत स्तर, ब्लांक स्तर, ग्राम पंचायत स्तर पर महीने भर चलनेवाले कार्यक्रम के तहत देशभक्ति की भावना जगाने के लिए कमेटियां गठित की है. हर कमेटी में 25 से तीस लोग शामिल हैं. इन कार्यक्रमों में आरएसएस की सभी ईकाईयां शामिल होंगी. संस्कार भारती नुक्कड़ नाटक करेगा तो विद्यार्थी परिषद तिरंगा यात्रा का संचालन करेगा. अकेले काशी प्रांत में हम 22,000 गांवों में पहुंचेगें.’


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क्या-क्या शामिल होगा इस अभियान में?

30 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच आयोजित की जाने वाली तिरंगा यात्रा के दौरान आरएसएस के स्वयंसेवक तिरंगा लेकर गांव और ब्लॉक स्तर पर साइकिल, बाइक से युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाएगें. 16 दिसंबर, जिस दिन 1971 में भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में हराया था, उस विजय दिवस की यादें ताज़ा करने के लिए उस दिन हर प्रखंड के बड़े कालेज स्कूल ग्राउंड में वंदेमातरम का सामूहिक गायन आयोजित किया जाएगा.

अवध प्रांत के प्रांत प्रचारक कौशल कुमार कहतें है, ‘हमारा मुख्य ज़ोर गांवों में लोगों में राष्ट्रीयता और देशभक्ति का भाव जगाने का है और भारत माता के पूजन, शोभा यात्रा का कार्यक्रम मुख्य रूप से गांवों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.’

सिंह ने कहा की अवध प्रांत में यह कार्यक्रम 177 विकास खंडों में आयोहित होगा और इसके तहत कुल 19,000 गांवों को लक्षित किया जायेगा.

आरएसएस के एक वरिष्ठ स्वयंसेवक ने अपना नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अमृत महोत्सव के तहत किये जा रहे ये कार्यक्रम केवल स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाने तक सीमित नहीं हैं.

इस स्वयंसेवक ने कहा कि, ‘इसमें प्रत्येक गांव या कस्बे की यात्रा करना, उनके घरों, स्मारकों पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि देना, दीप जलाना, उनकी चर्चा करना, लोगों को राष्ट्रवादी मुद्दों – राम मंदिर, अनुच्छेद 370 , नागरिकता कानूनों आदि- के बारे में जागरूक करना भी शामिल है.’

इस स्वयंसेवक ने आगे कहा कि, ‘यूपी के हर क्षेत्र में कोई-न-कोई आज़ादी के बड़े नायक रहे हैं और कई ऐसे भी हैं जो गुमनामी में खोये है. हमारा मुख्य उद्देश्य इन दोनों श्रेणियों के नायकों को खोजना और जनता को उनसे जोड़ना है. रानी लक्ष्मीबाई का जन्म काशी के मैंदनी नाम के जगह पर हुआ था. यानि झांसी और काशी दोनों उनसे जुड़े हैं. लक्ष्मी बाई के जन्म स्थान की मिट्टी कलश के माध्यम से झांसी भेजी जा रही है.’

यहां तक कि योगी आदित्यनाथ सरकार भी रानी लक्ष्मी बाई की जयंती के उपलक्ष्य में इस सप्ताह झांसी में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित कर रही है.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कौशल मिश्रा ने कहा कि आरएसएस इस अभियान के साथ ‘बौद्धिक राष्ट्रवाद’ को जगाना चाहता है, जो राम मंदिर आंदोलन के दौरान रामशिलाओं के संग्रह से भी बड़ा अभियान है.

मिश्रा ने कहा,‘आज़ादी का आंदोलन भी राष्ट्रीय जनजागरण का आंदोलन था और चुनाव भी राष्ट्रीय चेतना जगाने का माध्यम होता है. अगर इसमें बीजेपी का भला हो जाए तो यह उनका भाग्य है. पर यह बौद्धिक राष्ट्रवाद का बड़ा कार्यक्रम है.’


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बुंदेलखंड और पूर्वांचल पर टिकी हैं निगाहें

यूपी के बुंदेलखंड और पूर्वांचल जैसे क्षेत्र आरएसएस के इस अभियान का केंद्र बिंदु हैं और भाजपा की अपनी चुनावी गणना के अनुसार 2022 में भाजपा की सत्ता में वापसी के लिए ये क्षेत्र काफी महत्वपूर्ण हैं.

पिछले चुनाव में बीजेपी ने बुंदेलखंड-कानपुर क्षेत्र की 52 में से 47 सीटों पर भारी जीत हासिल की थी. अकेले बुंदेलखंड में, भाजपा ने 2017 में सभी 20 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि 2012 में उसकी यहां सिर्फ तीन सीटें थीं. पार्टी ने 2014 और 2019 के दोनों लोक सभा चुनावों में इस क्षेत्र की सभी चार संसदीय सीटें भी जीतीं.

पेयजल योजनाओं, रक्षा गलियारे, ललितपुर में एक हवाई अड्डे की स्थापना, और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के निर्माण सहित कई अन्य कार्यक्रमों और योजनाओं की मदद से भाजपा देश में सबसे पिछड़े माने जाने वाले इस क्षेत्र पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है.

यूपी के हर चुनाव में अक्सर पूर्वांचल ही किसी भी पार्टी के लिए सत्ता की राह तय करता है. इस बार, भाजपा किसानों के विरोध के कारण पश्चिमी यूपी में अपने संभावित नुकसान की भरपाई पूर्वांचल में अधिक सीटें जीतकर करने की रणनीति बना रही है.

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा एक विश्वविद्यालय के शिलान्यास समारोह के लिए किये गए आजमगढ़ के दौरे से लेकर मंगलवार को पीएम मोदी द्वारा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन और यूपी के लिए बनाए गए नौ मेडिकल कॉलेजों में से पांच की स्थापना पूर्वांचल में करना, ये सब इस इलाके में अपनी पकड़ बनाए रखने की बीजेपी की रणनीति का हिस्सा हैं.

2017 में बीजेपी ने इस इलाके की कुल 164 विधानसभा सीटों में से 115 सीटें जीती थीं. राज्य विधानसभा में कुल मिलाकर 403 सीटें हैं.

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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