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Wednesday, 3 June, 2026
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शिवकुमार बने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री, सिद्धारमैया के बेटे समेत कई करीबी 13 सदस्यीय टीम में शामिल

मंत्रियों की पहली सूची में सिद्धारमैया का प्रभाव साफ दिखाई देता है. इससे संकेत मिलता है कि पद छोड़ने के बावजूद 77 वर्षीय नेता की पार्टी और सरकार में मजबूत पकड़ बनी हुई है.

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बेंगलुरु: डी.के. शिवकुमार, जिन्हें डीकेएस के नाम से जाना जाता है, उन्होंने बुधवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. दलित नेता जी. परमेश्वर को उनका उपमुख्यमंत्री बनाया गया है.

64-वर्षीय कांग्रेस नेता ने सिद्धारमैया की जगह ली है. सिद्धारमैया ने पिछले हफ्ते इस्तीफा दे दिया था, क्योंकि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने उनसे 2023 में किए गए उस वादे को पूरा करने को कहा था, जिसमें कार्यकाल के बीच में पद छोड़ने की बात कही गई थी.

शिवकुमार ने राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, आध्यात्मिक नेताओं, उद्योग जगत के लोगों, कन्नड़ समर्थक कार्यकर्ताओं, दिहाड़ी मजदूरों और समाज के विभिन्न वर्गों की मौजूदगी में लोक भवन में आयोजित एक सादे समारोह में शपथ ली.

राहुल गांधी की तरह शिवकुमार ने एक हाथ में संविधान पकड़ा और अपने आध्यात्मिक गुरु वीरा गंगाधारा अज्जैया के नाम पर शपथ ली.

सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र ने भी शिवकुमार सरकार में मंत्री पद की शपथ ली. अब तक के मंत्रिमंडल की संरचना में सिद्धारमैया की छाप साफ दिखाई देती है, क्योंकि उनके कई करीबी नेता इसमें बने हुए हैं या उन्हें जगह मिली है. शिवकुमार के अलावा 13 अन्य नेताओं ने भी शपथ ली और वे नए मंत्रिमंडल का हिस्सा होंगे. बाद में वह 20 और मंत्रियों को शामिल कर सकते हैं.

कांग्रेस पार्टी का कहना है कि पहली सूची में वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है, ताकि शासन में निरंतरता बनी रहे और सत्ता का हस्तांतरण आसानी से हो सके. पार्टी के वरिष्ठ नेता और दलित समुदाय के अनुसूचित जाति (राइट) वर्ग के प्रमुख चेहरे परमेश्वर पहली सूची में शिवकुमार के एकमात्र उपमुख्यमंत्री होंगे.

घटनाक्रम से परिचित लोगों के अनुसार, सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेतृत्व को परमेश्वर को उपमुख्यमंत्री बनाने के लिए राजी किया. सिद्धारमैया पहले भी परमेश्वर को अपना उत्तराधिकारी बता चुके हैं और ‘दलित मुख्यमंत्री’ की मांग का समर्थन करते रहे हैं.

के.जे. जॉर्ज, यू.टी. खादर, के.एच. मुनियप्पा, रामलिंगा रेड्डी, एम.बी. पाटिल, सतीश झारकीहोली, ईश्वर खंड्रे, प्रियांक खरगे, यतींद्र सिद्धारमैया, कृष्णा बायरे गौड़ा, बायरथी सुरेश और शरण प्रकाश पाटिल ने भी मंत्री पद की शपथ ली. यह सूची दिखाती है कि शिवकुमार के मंत्रिमंडल में सिद्धारमैया का प्रभाव काफी ज्यादा है. इससे संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी 77-वर्षीय नेता की राजनीतिक ताकत बनी हुई है.

पूर्व विधायक और वर्तमान एमएलसी यतींद्र को सिद्धारमैया को संतुष्ट रखने के लिए मंत्रिमंडल में जगह दी गई है.

इसी तरह जॉर्ज, झारकीहोली, एम.बी. पाटिल और सुरेश उन वरिष्ठ नेताओं में हैं, जिन्होंने सिद्धारमैया को पूरे पांच साल मुख्यमंत्री बनाए रखने का समर्थन किया था और उन्हें उनका करीबी माना जाता है. खास बात यह है कि उन्होंने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग का समर्थन नहीं किया था. कर्नाटक विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष यू.टी. खादर, जिन्हें सिद्धारमैया का करीबी माना जाता है, फिर से मंत्रिमंडल में लौट आए हैं. प्रियांक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे हैं. वहीं पाटिल खरगे के कल्याण कर्नाटक क्षेत्र से आते हैं और माना जा रहा है कि वे एआईसीसी अध्यक्ष की पसंद हैं.

कर्नाटक कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक रामलिंगा रेड्डी शिवकुमार की पसंद माने जाते हैं. वे आने वाले ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (GBA) चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जहां शहर की स्थानीय निकाय व्यवस्था पर नियंत्रण का सवाल है. वरिष्ठ नेता मुनियप्पा अनुसूचित जाति (लेफ्ट) वर्ग से आते हैं और दोनों नेताओं के साथ अच्छे संबंध बनाए हुए हैं.

ईश्वर खंड्रे कल्याण कर्नाटक क्षेत्र से हैं. इसके अलावा वे अखिल भारतीय वीरशैव महासभा के वर्तमान अध्यक्ष भी हैं, जो राज्य के सबसे प्रभावशाली और राजनीतिक रूप से मजबूत समुदायों में से एक का प्रतिनिधित्व करती है.

कांग्रेस ने फिलहाल केवल 13 मंत्रियों को शामिल किया है. यह वही तरीका है, जिसे पार्टी ने तीन साल पहले सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण के समय भी अपनाया था. तब भी विभिन्न प्रमुख जातियों और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले नेताओं को पहले चरण में शामिल किया गया था.

शुरुआत में शिवकुमार के मंत्रिमंडल में स्वयं मुख्यमंत्री सहित तीन वोक्कालिगा नेता, अनुसूचित जाति समुदाय से दो नेता, अनुसूचित जनजाति से एक नेता, प्रभावशाली लिंगायत समुदाय से तीन नेता और पिछड़े वर्गों से तीन नेता शामिल होंगे. खादर और जॉर्ज अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं. खास बात यह है कि मौजूदा सूची में कोई महिला शामिल नहीं है.

बाकी पदों को आने वाले दिनों में भरा जा सकता है, क्योंकि विधायक अभी भी पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं.

हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नए मंत्रिमंडल में सिद्धारमैया समर्थकों की बड़ी मौजूदगी आगे चलकर कई शक्ति केंद्र बना सकती है, जिससे नए मुख्यमंत्री की अधिकार क्षमता प्रभावित हो सकती है.

‘सत्ता का हस्तांतरण कभी आसान नहीं होता’

बुधवार को शिवकुमार ने पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा और पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा के घर जाकर उनका आशीर्वाद और समर्थन लिया. शपथ लेने से पहले उन्होंने सिद्धारमैया के सरकारी आवास पर जाकर भी उनका आशीर्वाद लिया.

हालांकि, पिछले कुछ दिनों में दोनों नेताओं के बीच अच्छी समझ दिखाई दी है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सिद्धारमैया का सहयोग और समर्थन कई बातों पर निर्भर करेगा. बेंगलुरु के राजनीतिक विश्लेषक और अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी के फैकल्टी ए. नारायण ने दिप्रिंट से कहा, “कोई भी राजनीतिक सत्ता परिवर्तन पूरी तरह आसान नहीं होता. ऐसे बदलावों की पहचान ही असंतोष होती है.”

उन्होंने कहा, “सिद्धारमैया का यह कहना कि वह हाईकमान के फैसले में सहयोग करेंगे, इसे पूरी तरह सच मानकर नहीं चलना चाहिए क्योंकि अब तक उनका रिकॉर्ड ऐसा नहीं रहा है. वह तभी शांत रहेंगे और कोई परेशानी नहीं पैदा करेंगे, जब कैबिनेट उनकी संतुष्टि के अनुसार बनाई जाएगी.”

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को 2011 में येदियुरप्पा को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद भारी विरोध का सामना करना पड़ा था. बाद में भाजपा को समझ आया कि राजनीति में लिंगायत नेता येदियुरप्पा बेहद महत्वपूर्ण हैं. इसके बाद पार्टी ने उन्हें अपनी संसदीय बोर्ड में शामिल किया और उनके बेटे बी.वाई. विजयेंद्र को राज्य भाजपा अध्यक्ष भी बनाया.

दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी देर नहीं की और सिद्धारमैया को पार्टी की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में शामिल कर दिया, ताकि पिछड़ा वर्ग की राजनीति के बड़े चेहरे को संतुष्ट रखा जा सके.

ज्यादातर लोगों की राय है कि नई सरकार के लिए सिद्धारमैया का सहयोग अपने आप नहीं मिलेगा. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कैबिनेट की संरचना, विभागों का बंटवारा और जाति जनगणना व सामाजिक न्याय जैसी सिद्धारमैया की महत्वपूर्ण योजनाओं को समर्थन मिलना, उनके सहयोग को बनाए रखने के लिए ज़रूरी होगा.

‘इस खामोशी में बहुत कुछ छिपा है’

विश्लेषक सुगाता श्रीनिवासराजू का कहना है कि बिना किसी विरोध के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के सिद्धारमैया के फैसले ने कर्नाटक में कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

श्रीनिवासराजू ने कहा कि 77-वर्षीय नेता ने कभी भी बिना संघर्ष किए सत्ता नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा, “इस खामोशी में बहुत कुछ छिपा है,” और सिद्धारमैया के शांत तरीके से पद छोड़ने की ओर इशारा किया.

उन्होंने कहा कि संभव है सिद्धारमैया ने अपने विकल्पों पर विचार किया हो और हंगामा खड़ा करने के बजाय चुपचाप पद छोड़ना बेहतर समझा हो. खासकर इसलिए क्योंकि उन्हें अपने बेटे के राजनीतिक भविष्य और मैसूर अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MUDA) से जुड़े विवादों को भी ध्यान में रखना है.

उन्होंने कहा कि इस शांत तरीके से पद छोड़ने का मतलब यह नहीं है कि AHINDA (अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित) राजनीति के बड़े नेता सिद्धारमैया अब पीछे हट रहे हैं या राजनीति से संन्यास ले रहे हैं. श्रीनिवासराजू ने कहा कि सिद्धारमैया का हाईकमान द्वारा दिए गए राज्यसभा सीट के प्रस्ताव को ठुकराना भी शिवकुमार के लिए चुनौती बन सकता है.

उन्होंने कहा, “एक बड़ी चुनौती यह है कि सिद्धारमैया बेंगलुरु छोड़कर नहीं जा रहे हैं. अगर वह दिल्ली चले जाते तो समस्या कम होती. यह शिवकुमार के लिए एक बड़ा प्रबंधन का मुद्दा रहेगा.”

सिद्धारमैया के मुख्यमंत्री के सरकारी आवास ‘कावेरी’ को खाली करने की भी संभावना कम है. चूंकि, शिवकुमार का गृह कार्यालय ‘कृष्णा’ ठीक बगल में है, इसलिए सिद्धारमैया की मौजूदगी लगातार उनके प्रभाव की याद दिलाती रहेगी.

उन्होंने यह भी कहा कि शिवकुमार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की उम्मीदों को भी संभालना होगा, क्योंकि उनके बेटे प्रियंक खड़गे अब कर्नाटक कैबिनेट का हिस्सा हैं. श्रीनिवासराजू ने कहा कि सिद्धारमैया ने अपनी छवि एक साफ-सुथरे नेता की बनाई थी, जबकि शिवकुमार ने कभी यह छिपाया नहीं कि वह पार्टी के लिए संसाधन जुटाने वाले प्रमुख नेताओं में से हैं.

उन्होंने कहा, “जिस दिन शिवकुमार से कोई गलती होगी, उनके ऊपर आलोचनाओं का पहाड़ टूट पड़ेगा, जो सिद्धारमैया के साथ कभी नहीं हुआ. सिद्धारमैया पर कोई आरोप टिकता नहीं था, लेकिन शिवकुमार के साथ हर चीज़ चिपक जाती है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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