नई दिल्ली: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने जनगणना 2027 में राजनीतिक दखल का रास्ता खोल दिया है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि जनगणना के लिए योग्य गिनती करने वालों यानी एन्यूमरेटर की संख्या बढ़ाने से हजारों RSS और BJP कार्यकर्ताओं को फायदा हो सकता है.
एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने 16 अक्टूबर को केंद्र की ओर से जनगणना नियम, 1990 में किए गए बदलाव को जुलाई में बेलगावी में हुए RSS ट्रेनिंग कैंप और गृह मंत्रालय की ओर से बनाई गई एक समिति द्वारा जनसंख्या में बदलाव को लेकर मांगे गए सुझावों से जोड़ा.
रमेश ने लिखा, “यह साफ है कि यह हजारों RSS/BJP कार्यकर्ताओं के लिए रोजगार गारंटी योजना है.”
उन्होंने आरोप लगाया, “10-12 जुलाई 2026 के दौरान RSS ने बेलगावी में अपने कार्यकर्ताओं के लिए जनगणना 2027 के एक ही एजेंडे पर एक बड़ा ट्रेनिंग कैंप आयोजित किया.”
रमेश ने 26 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बनाई गई जनसांख्यिकीय बदलावों पर हाई-लेवल कमेटी को भी निशाना बनाया. इस समिति ने भारतीय और विदेशी संगठनों समेत लोगों से सुझाव मांगे थे.
उन्होंने लिखा, “इस समिति की एकमात्र हाई-लेवल चीज इसके सदस्यों का RSS से जुड़े तंत्र से संबंध है. इसलिए हमें पता है कि ये सुझाव कहां से आएंगे.”
उन्होंने आगे लिखा, “16 अक्टूबर 2026 की जनगणना अधिसूचना को 10-12 जुलाई 2026 के RSS ट्रेनिंग कैंप और 14 अक्टूबर 2026 को जनसांख्यिकीय बदलाव समिति की ओर से सुझाव मांगने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए.”
रमेश ने कहा, “यह पहले से ही कमजोर की जा चुकी जनगणना को निश्चित रूप से और खराब करेगा. एक और संस्था को बर्बाद किया जा रहा है. SIR की तरह जनगणना में भी खतरनाक तरीके से हेरफेर किया जाएगा.” उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम से जनगणना की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
उन्होंने आगे कहा, “PM-HM की जोड़ी की इन शैतानी योजनाओं की कोई सीमा नहीं है.”
अधिसूचना में क्या कहा गया है
16 अक्टूबर की गृह मंत्रालय की अधिसूचना में जनगणना नियम, 1990 में बदलाव किया गया है. इसके तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को जनगणना के लिए गिनती करने वाले यानी एन्यूमरेटर का काम करने के लिए “किसी भी व्यक्ति” को नियुक्त करने की अनुमति दी गई है, जिसे वे इस काम के लिए योग्य समझें.
मौजूदा नियमों में सरकारी, स्थानीय निकाय और निजी शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षक शामिल हैं. इसके अलावा सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, बैंकों, कंपनियों, संस्थानों, सोसायटी और ट्रस्ट समेत कुछ संस्थानों के क्लर्क और अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया गया है.
इस बदलाव से जनगणना के लिए चुने जा सकने वाले लोगों का दायरा बढ़ गया है. इससे राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को कर्मचारियों के चयन में ज्यादा लचीलापन मिलेगा. अधिसूचना में RSS या BJP का नाम नहीं है और न ही नियुक्ति के लिए राजनीतिक जुड़ाव को कोई शर्त बताया गया है.
अधिसूचना में कहा गया है, “सरकार, स्थानीय निकाय, सहायता प्राप्त या बिना सहायता वाले निजी संस्थानों, सोसायटी या ट्रस्ट के किसी भी शैक्षणिक संस्थान के शिक्षक. केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकाय या किसी संस्थान (जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां, वैधानिक निकाय, बैंक, कंपनियां, संस्थान, सोसायटी और ट्रस्ट शामिल हैं) के क्लर्क या कोई भी अधिकारी. राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश का प्रशासन जिसे एन्यूमरेटर के तौर पर काम करने के लिए योग्य समझे, ऐसा कोई भी व्यक्ति.”
कानूनी चुनौतियां
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब जनगणना के काम के लिए निजी स्कूलों के कर्मचारियों को लगाने को लेकर कानूनी चुनौतियां चल रही हैं. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार की ओर से निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों की जानकारी मांगने वाले पत्रों पर रोक लगा दी है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी गौतम बुद्ध नगर में स्कूल कर्मचारियों को जनगणना के काम में लगाने से जुड़े आदेशों पर रोक लगाई है.
केंद्र ने इस जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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