नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को आरोप लगाया कि टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर चल रहे अंदरूनी विवाद के बीच कारोबारी चुप्पी साधे हुए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इस संगठन को “आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है”.
गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “टाटा को आपराधिक तरीके से बर्बाद किया जा रहा है और कोई भी कारोबारी नेता कुछ बोलने की हिम्मत नहीं कर रहा है. आप कब तक चुप रहेंगे? तब तक, जब तक वे आपको अपने कब्जे में नहीं ले लेते?” उन्होंने कहा, “भारतीय कारोबार मोदी और शाह का खिलौना नहीं है. आपमें हिम्मत नहीं है. हममें है. हम इन अपराधों के लिए न्याय सुनिश्चित करेंगे.”
राहुल गांधी का यह बयान टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के बीच हो रहे विवाद के बीच आया है. यह विवाद टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के तौर पर एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर है.
यह विवाद 7 सितंबर को बोर्ड में पारित उस प्रस्ताव से जुड़ा है, जिसमें एन. चंद्रशेखरन को अगले पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त किया गया था. नोएल टाटा ने इस दोबारा नियुक्ति पर आपत्ति जताई है. उन्होंने इस प्रस्ताव को “कानूनी रूप से अमान्य” बताया है और मांग की है कि टाटा संस अपने आधिकारिक बोर्ड बैठक के कार्यवृत्त से कार्यकाल बढ़ाने से जुड़े सभी उल्लेख हटाए और इससे संबंधित वैधानिक दस्तावेजों को वापस ले.
सोमवार को नोएल टाटा ने टाटा संस के कंपनी सचिव और ग्रुप कॉरपोरेट सचिव सुप्रकाश मुखोपाध्याय को एक पत्र लिखा. इसमें उन्होंने कहा कि 17 सितंबर को हुई बोर्ड बैठक में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव पेश किया गया, जबकि निदेशकों को भेजे गए एजेंडे में इस मुद्दे का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद कंपनी ने उन्हें बैठक की ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग, बैठक का अंतिम कार्यवृत्त या प्रस्ताव की प्रमाणित प्रति उपलब्ध नहीं कराई.
नोएल टाटा ने पत्र में कहा, “यह प्रस्ताव अमान्य है.” उन्होंने तर्क दिया कि दोबारा नियुक्ति टाटा संस के एसोसिएशन के नियमों में दिए गए संबंधित प्रावधानों के मुताबिक नहीं हुई.
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