नई दिल्ली: बिना शर्त माफी, दिए गए बयानों को वापस लेना, आरोप हटाना और पूरी तथ्यात्मक जानकारी देना—मांग काफी बड़ी है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता निशिकांत दुबे पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग से यही चाहते हैं. दुबे की ताज़ा कार्रवाई ने इस नेता और रिटायर्ड अफसर के बीच चल रही बयानबाजी को और तेज कर दिया है.
दुबे ने सोमवार शाम सोशल मीडिया पर लिखा, “अगर आपने सात दिनों के अंदर माफी नहीं मांगी, तो मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि आपको जेल तक खींचकर ले जाऊं. मैं खुद PAC की वित्त उप-समिति का अध्यक्ष था, मैं अपनी आंखों के सामने उन्हें रोज बुलाया करता था—बदतमीजी की कोई जगह नहीं है.”
दुबे ने कहा कि उन्होंने आज तक वित्त मंत्रालय का कार्यालय नहीं देखा है और न ही उन्होंने दिवंगत केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली या मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की है.
झारखंड के गोड्डा से चार बार बीजेपी सांसद रहे दुबे ने गर्ग के खिलाफ भेजे गए मानहानि नोटिस के तीन पन्ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए. दुबे का यह नोटिस गर्ग की ओर से यूट्यूबर शालिनी कपूर तिवारी के साथ दो घंटे से ज्यादा लंबे पॉडकास्ट का लिंक पोस्ट करने के पांच दिन बाद आया है.
नोटिस में कहा गया है कि गर्ग ने उन्हें “ब्लैकमेल करने वाले किस्म का व्यक्ति” बताया था. नोटिस के मुताबिक, गर्ग ने यह भी कहा था कि बीजेपी सांसद वित्त सचिव के कार्यालय आए थे ताकि “भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के चेयरमैन पर दबाव डालकर अपना काम करा सकें”.
सुभाष गर्ग @Subhashgarg1960 सात दिन में माफ़ी मॉंगो नहीं तो सलाख़ों तक ले जाने की कोशिश करूँगा ।मैं ख़ुद PAC में वित्त के सब कमिटि का अध्यक्ष था,रोज़ अपने सामने हाजिर कराता था, बदज़ुबानी नहीं चलेगी ।मैंने आज तक वित्त मंत्रालय का कार्यालय नहीं देखा है ।मैं अपनी सरकार में भी कंभी… pic.twitter.com/WboU97aqbK
— Dr Nishikant Dubey (@nishikant_dubey) September 21, 2026
यह पोस्ट दुबे और गर्ग के बीच चल रही तीखी बयानबाजी में सबसे नया मामला है. इसकी शुरुआत तब हुई, जब गर्ग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8 प्रतिशत होने के दावे को लगातार गलत साबित करने की कोशिश की. गर्ग ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने पहले की GDP गणना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली पद्धति को बदल दिया है.
पिछले हफ्ते पॉडकास्ट का लिंक शेयर करते हुए गर्ग ने कहा था कि उन्होंने “निशिकांत दुबे से लेकर मुख्य आर्थिक सलाहकार और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव तक सभी को GDP में गायब 12.7 लाख करोड़ रुपये की असलियत के बारे में जवाब दिया है.” उन्होंने भारत की हाल की विकास दर पर भी अपनी बात रखी थी.
‘हिंदी और अंग्रेजी में माफी’
गर्ग ने जुलाई 2017 से जुलाई 2019 तक आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव के तौर पर काम किया था. इसके अलावा उन्होंने मार्च से जून 2019 तक कुछ समय के लिए वित्त सचिव का पद भी संभाला था.
दुबे ने कहा कि गर्ग ने यह आरोप लगाया था कि उन्होंने LIC के चेयरमैन से कोई फायदा लेने के लिए पूर्व वित्त सचिव से संपर्क किया था. दुबे के नोटिस में मांग की गई है कि गर्ग “बिना किसी शर्त और साफ तौर पर उस आरोप को वापस लें और खारिज करें” जिसमें उन्हें “ब्लैकमेल करने वाले किस्म का व्यक्ति” बताया गया था.
नोटिस में यह भी मांग की गई है कि गर्ग हिंदी और अंग्रेजी, दोनों भाषाओं में “बिना किसी शर्त के, पूरी तरह से लिखित माफी” मांगें. साथ ही, गर्ग ने जिन-जिन प्लेटफॉर्म पर ये आरोप लगाए थे, उन सभी जगहों पर आरोप वापस लेने और माफी प्रकाशित करने की मांग की गई है.
बीजेपी सांसद ने मांग की कि पूर्व अफसर “पॉडकास्ट और उसकी हर क्लिप, शॉर्ट, अंश, पोस्ट और संदर्भ को हटा दें” जिसमें ये बयान हैं. साथ ही, दोनों के बीच हुई कथित मुलाकात के बारे में पूरी तथ्यात्मक और दस्तावेजी जानकारी देने को भी कहा गया है.
“लिखित रूप में यह वादा दें कि आप मेरे मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों या इसी तरह के किसी भी आरोप को दोबारा नहीं लगाएंगे, प्रकाशित नहीं करेंगे या प्रसारित नहीं करेंगे. साथ ही पॉडकास्ट की पूरी बिना एडिट की गई रिकॉर्डिंग और कच्ची फुटेज, होस्ट, प्रोड्यूसर्स और प्लेटफॉर्म के साथ हुई सभी बातचीत और कथित मुलाकात से जुड़ी हर डायरी, संदेश या ईमेल को सुरक्षित रखें और उन्हें डिलीट, बदलें या उनके साथ छेड़छाड़ न करें.”
पॉडकास्ट में गर्ग ने कहा था कि वित्त सचिव के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान दुबे कुछ फाइलें या मामले लेकर उनके पास आए थे. गर्ग ने इसे कॉरपोरेट हितों की ओर से लॉबिंग या पैरवी के तौर पर देखा था.
दुबे ने चेतावनी दी कि अगर गर्ग ने इन मांगों को नहीं माना तो भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया जाएगा. इसके साथ ही नुकसान के मुआवजे के लिए सिविल कार्रवाई भी की जाएगी.
यह पहली बार नहीं है जब दोनों के बीच टकराव हुआ है. 2018 में दुबे ने दावा किया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर गर्ग के आर्थिक मामलों के सचिव रहने के दौरान उनकी आर्थिक नीतियों और काम करने के तरीके पर सवाल उठाए थे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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