नई दिल्ली: जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबि लामिछाने के नेतृत्व वाले नेपाली प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, तो यह एक दुर्लभ दृश्य था.
पार्टी के एक अंदरूनी सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि बीजेपी अध्यक्ष के पद पर रहने के दौरान शाह ने कुछ राजदूतों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी, लेकिन वह आमतौर पर विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से नहीं मिलते. उन्होंने कहा कि नेपाल के मामले में बीजेपी “साझी सभ्यतागत विरासत और दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत रिश्तों” को फिर से जीवित और मजबूत करना चाहती है.
लामिछाने से मुलाकात के तुरंत बाद शाह ने एक्स पर लिखा कि “दोनों पक्षों ने भारत और नेपाल के विशेष संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए साथ काम करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया.”
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, पार्टी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि भारत और नेपाल की साझा सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत पर भी जोर देना चाहती है.
दिप्रिंट से बात करते हुए चांदनी चौक से लोकसभा सांसद प्रवीण खंडेलवाल, जो प्रतिनिधिमंडल के साथ दोपहर के भोजन कार्यक्रम में शामिल हुए थे, उन्होंने कहा कि दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत बनाने पर काफी जोर दिया गया. उन्होंने कहा, “एक सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और नेपाल की संस्कृति और परंपराएं काफी समान हैं. उन्होंने नेपाल के पशुपति नाथ और वाराणसी के बीच संबंधों का ज़िक्र किया और बताया कि यह रिश्ता धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक जुड़ाव पर आधारित है.”
अपनी यात्रा पर विचार करते हुए लामिछाने ने एक भारतीय अखबार में लेख लिखा. उन्होंने कहा, “नेपाल और भारत सिर्फ दो देश नहीं हैं, बल्कि एक गौरवशाली और प्राचीन सभ्यता के साझेदार हैं. राम की कहानी तभी पूरी होती है जब जनकपुर और अयोध्या जुड़े हों. आस्था तभी पूर्ण होती है जब पशुपति नाथ मंदिर और केदारनाथ मंदिर को साथ देखा जाए. एक महान सभ्यता की नींव तभी पूरी तरह समझी जा सकती है जब लुंबिनी और बोधगया को जोड़ा जाए.”
भारत और नेपाल की साझा सभ्यतागत विरासत को लेकर बीजेपी लंबे समय से सजग रही है. 2023 के अंत में नेपाल के जानकी मंदिर के महंत, जो देवी सीता को समर्पित है, को राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में आमंत्रित किया गया था.
इस साल नेपाल में नई बनी आरएसपी के सत्ता में आने से काफी पहले, 2022 में नेपाल के तत्कालीन पर्यटन और संस्कृति मंत्री प्रेम अले, जो नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी (एकीकृत समाजवादी) के नेता थे, उन्होंने कहा था कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने की मांग पर विचार किया जा सकता है.
काठमांडू में विश्व हिंदू संघ की दो दिवसीय कार्यकारी परिषद की बैठक के उद्घाटन के दौरान आले ने कहा था कि अगर ऐसी मांग उठती है तो वह “रचनात्मक भूमिका” निभाएंगे.
लामिछाने ने अपने लेख में आगे लिखा, “हम केवल यह नहीं देखना चाहते कि हमारे संबंधों ने अब तक क्या हासिल किया है, बल्कि हम इस बात पर नया अध्याय शुरू करना चाहते हैं कि वे क्या हासिल कर सकते थे और भविष्य में क्या बन सकते हैं.”
मंगलवार को दोनों दलों के बीच हुई यह बातचीत ‘Know BJP’ पहल के तहत आयोजित की गई थी.

आरएसपी प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय का दौरा किया. उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद मनोज तिवारी, बांसुरी स्वराज, हर्ष मल्होत्रा, एक केंद्रीय राज्य मंत्री और रामवीर सिंह बिधूड़ी समेत कई नेताओं के साथ दोपहर के भोजन कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया.
दिल्ली के मंत्री आशीष सूद के आवास पर एक अनौपचारिक रात्रिभोज भी आयोजित किया गया, जिसमें राजनेताओं के साथ शिक्षाविद भी शामिल हुए.
बीजेपी के एक पदाधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “प्रतिनिधिमंडल को लिट्टी-चोखा और बिहार के अन्य पारंपरिक व्यंजन परोसे गए. उन्हें खाना बहुत पसंद आया. उन्होंने यह भी कहा कि वे आमतौर पर दोपहर में हल्का भोजन करते हैं, लेकिन खाना इतना स्वादिष्ट था कि उन्होंने भरपेट खाया.”
पदाधिकारी ने यह भी कहा, “दोनों देशों की प्राचीन विरासत और सभ्यतागत संबंध हैं. चाहे पशुपति नाथ मंदिर हो, बुद्ध से जुड़े स्थल हों या अन्य धार्मिक स्थान—दोनों देशों का गहरा जुड़ाव है. हमारा भोजन, पहनावा, भाषा और इतिहास भी काफी हद तक समान है.”
हाल के वर्षों में भारत और नेपाल के बीच कूटनीतिक संबंधों में समय-समय पर पैदा हुई खटास को देखते हुए, रिश्तों को मजबूत बनाने की ये नई कोशिशें भी महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं.
‘पार्टी-से-पार्टी रिश्ते, सरकार-से-सरकार रिश्तों से बेहतर’
इस यात्रा के महत्व को समझाते हुए, खासकर पार्टी-से-पार्टी संबंधों पर जोर के संदर्भ में, नेपाल के पूर्व कानून मंत्री गोविंद बंदी ने दिप्रिंट से कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने के मामले में रबी और उनकी पार्टी आरएसपी पर कोई पुराना राजनीतिक बोझ नहीं है.
उनके अनुसार, इससे दोनों देशों को भारत-नेपाल संबंधों को एक नए नजरिए से आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है.
उन्होंने कहा, “रबि (लामिछाने) ने भी यह बात तब कही थी जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. उन्होंने बहुत साफ तौर पर कहा था कि वे भारत-नेपाल संबंधों को एक अलग नज़रिए से बनाना चाहते हैं. मुझे लगता है कि यह एक महत्वपूर्ण बात है. साथ ही यह भी ध्यान देने वाली बात है कि यह एक पार्टी-से-पार्टी यात्रा थी. हालांकि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की, लेकिन उन्हें भारत की सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष के रूप में आमंत्रित किया था. मुझे लगता है कि यह तरीका सरकार-से-सरकार संबंधों की तुलना में बेहतर काम करता है.”

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप इतिहास देखें, जब नेपाली कांग्रेस के भारतीय इंडियन नेशनल कांग्रेस, यानी इंदिरा गांधी की पार्टी के साथ अच्छे संबंध थे, तब दोनों देशों के रिश्ते भी मजबूत थे. अगर राजनीतिक दलों के बीच अच्छे संबंध होते हैं, तो सरकारों के बीच रिश्ते भी बेहतर होते हैं. लेकिन अगर सीधे सरकार-से-सरकार स्तर पर बात होती है, तो उसमें कई अन्य मुद्दे शामिल हो जाते हैं, क्योंकि सरकारों की अपनी जिम्मेदारियां और सीमाएं होती हैं.”
बंदी के अनुसार, राजनीतिक दलों के पास व्यापक स्तर पर काम करने की ज्यादा गुंजाइश होती है. उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल संस्कृति, भाषा, खान-पान और कई अन्य चीजें साझा करते हैं. ऐसे में दोनों देशों ने पार्टी-से-पार्टी संबंधों को फिर से मजबूत करना शुरू किया है, जो पिछले कई दशकों से नहीं हुआ था, और यह सही दिशा में उठाया गया कदम है.
उन्होंने कहा, “जब से नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला ने नेतृत्व संभाला था, तब से भारतीय नेताओं के साथ उनके मजबूत संबंध थे. उनके संबंध राम मनोहर लोहिया, चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी और अन्य नेताओं के साथ अच्छे थे. अगर आप 1990 के दशक के लोकतांत्रिक आंदोलन को देखें, तो सुब्रमण्यम स्वामी और चंद्रशेखर जी नेपाल आए थे और उन्होंने बताया था कि देश के लिए लोकतंत्र क्यों ज़रूरी है.”
उन्होंने आगे कहा, “उस समय भी पार्टी-से-पार्टी संबंध काफी मजबूत थे. जब ऐसे रिश्ते मजबूत होते हैं, तो सरकारों के बीच संबंध भी बेहतर हो जाते हैं.”
दिप्रिंट से बात करते हुए बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने शाह-लामिछाने मुलाकात को “जंप-स्टार्ट” बताया.

उन्होंने कहा, “निमंत्रण हमारी तरफ से भेजा गया था और यह बात कि वह (लामिछाने) आने के लिए उत्सुक थे, इस बात से साफ है कि उन्होंने इसे तुरंत स्वीकार कर लिया. दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से यह निश्चित रूप से एक जंप-स्टार्ट है. इस यात्रा के दौरान दोनों पक्षों ने सभ्यतागत और लोगों के बीच संबंधों पर ध्यान दिया. सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहलुओं पर जोर देने के बाद हम जलविद्युत, जल संरक्षण और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकते हैं.”
बीजेपी के विदेश मामलों के विभाग के प्रभारी विजय चौथाईवाले ने भी कहा कि यह बैठक सकारात्मक रही. उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भारत और नेपाल के बीच घनिष्ठ और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख किया, जो साझा सभ्यतागत विरासत, सांस्कृतिक जुड़ाव और दोनों देशों के लोगों के मजबूत रिश्तों पर आधारित हैं.
उन्होंने कहा, “ऐसी मुलाकातें लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत करने और बीजेपी तथा आरएसपी के बीच पार्टी-से-पार्टी संबंधों को और गहरा करने में मदद करती हैं.”
आगे की राह
बीजेपी नेपाल के साथ संबंधों को बेहतर बनाने को लेकर काफी उत्सुक दिख रही है. खासकर उस रिपोर्ट के बाद, जिसमें अमेरिकी विदेश विभाग ने आरोप लगाया था कि भारतीय दक्षिणपंथी समूह नेपाल की राजनीति में हस्तक्षेप कर रहे हैं.
2022 की यह रिपोर्ट, जो अगले साल प्रकाशित हुई थी, में दावा किया गया था कि बीजेपी से जुड़े कुछ समूह हिमालयी देश नेपाल के प्रभावशाली नेताओं को धन मुहैया करा रहे थे, ताकि उन्हें धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज्म) छोड़ने के लिए राजी किया जा सके.
हिंदू स्वयंसेवक संघ (एचएसएस), जो खुद को “भारत के बाहर रहने वाले हिंदुओं के लिए एक सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संगठन” बताता है, नेपाल में भी सक्रिय है.
फरवरी 2023 में नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह कथित तौर पर उस अभियान में शामिल हुए थे, जिसका उद्देश्य नेपाल को फिर से हिंदू राष्ट्र बनाना था. 2006 के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के बाद 2008 में राजशाही समाप्त कर दी गई थी और उससे पहले नेपाल एक हिंदू राष्ट्र था.
गोविंद बंदी के अनुसार, “भारत-नेपाल के द्विपक्षीय संबंधों में हमेशा धार्मिक रंग रहा है और BJP उसी का इस्तेमाल करने की उम्मीद कर रही है.”
2018 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनकपुर का दौरा किया था, तब उन्होंने कहा था कि वह वहां प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक श्रद्धालु (तीर्थयात्री) के रूप में आए हैं. उन्होंने जनकपुर के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये के पैकेज की भी घोषणा की थी. जनकपुर को माता सीता का जन्मस्थान माना जाता है. उन्होंने जनकपुर और अयोध्या के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों पर भी जोर दिया था.

एक अन्य बीजेपी नेता ने बताया कि सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्तों को मजबूत करने से दोनों देशों के संबंध बेहतर बनाने का रास्ता खुल सकता है. उन्होंने कहा कि 2022 में मोदी ने लुंबिनी का भी दौरा किया था, जिसे भगवान बुद्ध का जन्मस्थान माना जाता है. वहां उन्होंने लुंबिनी मठ क्षेत्र में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर फॉर बौद्ध कल्चर एंड हेरिटेज की आधारशिला रखी थी.
हालांकि, नेपाल की संविधान सभा और संवैधानिक समिति के पूर्व सदस्य तथा वकील खिमलाल देवकोटा ने सावधानी बरतने की सलाह दी.
उन्होंने कहा कि सीमा विवादों के बावजूद भारत और नेपाल के संबंध हमेशा गर्मजोशी भरे रहे हैं. लेकिन उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “राजनीतिक और सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान किए बिना इन रिश्तों का पूरा फायदा हमारे देशों को नहीं मिल पाएगा. इससे कुछ समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं. जब तक राजनीतिक मुद्दों का समाधान नहीं होगा, तब तक लोगों के बीच संबंध और दूसरे सहयोगी मुद्दे भी सुचारु रूप से आगे नहीं बढ़ पाएंगे. इसलिए दोनों चीजों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है.”
(देबदत्ता चक्रबर्ती के इनपुट्स के साथ)
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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