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Monday, 8 June, 2026
होमराजनीतिनीट पर SIR और शिक्षा मंत्री की आलोचना पर CJI को पत्र: मीटिंग के बाद इंडिया ब्लॉक का 5-सूत्री प्रस्ताव

नीट पर SIR और शिक्षा मंत्री की आलोचना पर CJI को पत्र: मीटिंग के बाद इंडिया ब्लॉक का 5-सूत्री प्रस्ताव

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि गठबंधन ने विपक्षी दलों के बीच तालमेल मजबूत करने और सरकार से जुड़े अहम मुद्दों को उठाने के लिए सर्वसम्मति से पांच बड़े फैसले लिए हैं.

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नई दिल्ली: आगामी संसद सत्र से पहले विपक्षी एकजुटता दिखाने की कोशिश करते हुए इंडिया गठबंधन ने सोमवार को पांच सूत्रीय प्रस्ताव पारित किया. आम आदमी पार्टी (आप) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) को छोड़कर गठबंधन के अन्य दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को पत्र लिखने और गठबंधन सहयोगियों के बीच नियमित बैठकें करने का फैसला किया.

प्रस्तावों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग भी शामिल है.

नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), समाजवादी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) समेत इंडिया गठबंधन के 23 घटक दलों के नेता और प्रतिनिधि शामिल हुए.

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि गठबंधन ने सर्वसम्मति से पांच महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं, जिनका उद्देश्य विपक्षी दलों के बीच समन्वय मजबूत करना और उन मुद्दों को उठाना है जिन पर सरकार का तत्काल ध्यान ज़रूरी है.

पहला फैसला मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित “वोट चोरी” से जुड़े विवाद को लेकर है.

खरगे ने कहा कि विपक्षी दल संयुक्त रूप से भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखेंगे और इस प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंता जताएंगे. उनका आरोप है कि इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकते हैं.

उन्होंने कहा, “हमने SIR और जिसे हम ‘वोट लूट’ की कोशिश मानते हैं, उसके संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजने पर सहमति बनाई है.”

गठबंधन ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा नीट परीक्षा और सीबीएसई की कॉपियों के मूल्यांकन में लगातार हुई कथित विफलताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की.

खरगे ने कहा कि नीट जैसी परीक्षाओं के संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं और इसके लिए जवाबदेही तय होनी चाहिए. उन्होंने कहा, “यह सहमति बनी कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए. सीबीएसई और नीट उनके जिम्मे थे और उनके कार्यकाल में गंभीर चिंताएं सामने आई हैं.”

तीसरे प्रस्ताव में केंद्र सरकार से महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ती कीमतों और आम लोगों को प्रभावित करने वाले अन्य आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की गई.

खरगे ने कहा कि इन मुद्दों के समाधान के लिए सभी राजनीतिक दलों की भागीदारी के साथ एक संरचित चर्चा ज़रूरी है.

सदस्य दलों के बीच बेहतर तालमेल के लिए इंडिया गठबंधन ने हर दो महीने में औपचारिक बैठक करने का भी फैसला किया है. खरगे ने बताया कि अगली बैठक हैदराबाद में होगी, हालांकि, इसकी तारीख अभी तय नहीं हुई है.

इसके अलावा विपक्षी नेताओं ने संसद सत्र के दौरान रोज सुबह रणनीति बैठक जारी रखने पर भी सहमति जताई है.

यह बैठक ऐसे समय हुई है जब हाल के विधानसभा चुनावों और क्षेत्रीय राजनीतिक मुकाबलों में इंडिया गठबंधन के कई दल एक-दूसरे के खिलाफ नजर आए, जिससे उनकी एकजुटता पर सवाल उठे. उदाहरण के लिए पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस चुनावी मुकाबले में आमने-सामने थीं.

इस बीच आम आदमी पार्टी और डीएमके ने बैठक में हिस्सा नहीं लिया. AAP पहले ही कह चुकी है कि वह अब विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है, जबकि तमिलनाडु चुनाव के बाद कांग्रेस से मतभेद के चलते डीएमके ने बैठक का बहिष्कार किया.

नियमित बैठकों के फैसले के साथ इंडिया गठबंधन ने आने वाले महीनों में एक समन्वित विपक्षी मंच बनाए रखने का संकेत दिया है.

अपने प्रतिनिधि भेजने वालों में सीपीआई(एम), सीपीआई, जम्मू और कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, सीपीआई(एमएल), झारखंड मुक्ति मोर्चा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, केरल कांग्रेस (मणि), एमडीएमके, वीसीके, आरएसपी, केरल कांग्रेस (जोसेफ), ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, भारत आदिवासी पार्टी, पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया और लोक दल शामिल थे. इस इवेंट में इंडिपेंडेंट राज्यसभा एमपी कपिल सिब्बल भी शामिल हुए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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