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Monday, 8 June, 2026
होमरिपोर्टनक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव नीलांगुर तक पहुंचा नल का जल, जल जीवन मिशन से बदली तस्वीर

नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ के अंतिम गांव नीलांगुर तक पहुंचा नल का जल, जल जीवन मिशन से बदली तस्वीर

कलेक्टर ने बताया कि पेयजल के साथ-साथ अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार हो रहा है. गांव तक बिजली लाइन पहुंच चुकी है और विद्युत पोल लगाए गए हैं.

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नारायणपुर: कभी नक्सल प्रभावित रहा छत्तीसगढ़ का अंतिम सीमावर्ती गांव नीलांगुर अब विकास की नई कहानी लिख रहा है. महाराष्ट्र सीमा से लगे नारायणपुर जिले के इस गांव में जल जीवन मिशन के तहत पहली बार घर-घर नल कनेक्शन के जरिए स्वच्छ पेयजल पहुंचना शुरू हो गया है. इससे ग्रामीणों को वर्षों पुरानी पानी की समस्या से बड़ी राहत मिली है.

नीलांगुर और उससे जुड़े पदमकोट ग्राम पंचायत के निवासी लंबे समय तक नदी, झिरियों और अस्थायी कुओं के पानी पर निर्भर रहे. पीने का पानी लाने के लिए ग्रामीणों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी. गर्मियों में स्थिति और भी कठिन हो जाती थी. अब हर घर तक नल कनेक्शन पहुंचने से लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव आया है.

ग्रामीणों ने इस परिवर्तन के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आभार जताया है. नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि पदमकोट और नीलांगुर राज्य के सबसे दूरस्थ और अंतिम सीमा गांवों में शामिल हैं. लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों के कारण यहां विकास कार्य करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ गांवों तक पहुंच रहा है.

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के तहत गांव के प्रत्येक घर में नल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है. नियमित जलापूर्ति शुरू होने से ग्रामीणों को पहली बार घर पर स्वच्छ पेयजल मिल रहा है. इससे स्वास्थ्य, स्वच्छता और जीवन स्तर में सुधार की मजबूत नींव तैयार हुई है.

कलेक्टर ने बताया कि पेयजल के साथ-साथ अन्य बुनियादी सुविधाओं का भी विस्तार हो रहा है. गांव तक बिजली लाइन पहुंच चुकी है और विद्युत पोल लगाए गए हैं. पदमकोट और नीलांगुर में आंगनबाड़ी केंद्र तथा स्कूल भवनों की स्वीकृति मिल चुकी है और निर्माण कार्य जारी है.

ग्रामीण मिरवा दे ने बताया कि पहले दिन का अधिकांश समय पानी लाने में ही बीत जाता था. नदी से पानी भरना, उसे सुरक्षित रखना और परिवार की जरूरतें पूरी करना बड़ी चुनौती थी. अब घर पर ही पानी उपलब्ध होने से काफी राहत मिली है.

ग्रामीण बांदू बाड़े ने कहा कि पानी, बिजली और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं अब बस्तर के दूरदराज गांवों तक पहुंच रही हैं. जहां पहले स्वच्छ पानी सबसे बड़ी चिंता थी, वहीं अब लोगों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की भी उम्मीद दिखाई दे रही है.

जल जीवन मिशन से जुड़े अशोक रेड्डी ने बताया कि पदमकोट के लगभग सभी घरों तक नल कनेक्शन पहुंच चुका है और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. अब ग्रामीणों को पानी की तलाश में भटकना नहीं पड़ता. सुरक्षित पेयजल की सुविधा दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए व्यवस्था का लगातार संचालन किया जा रहा है.

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