चंडीगढ़: एक गांव के रहने वाले व्यक्ति के छत पर चढ़कर पंजाब की ड्रग्स की समस्या के खिलाफ काला झंडा दिखाने से शुरू हुई बात कुछ ही दिनों में राजनीतिक विवाद में बदल गई है. भगवंत मान सरकार पर पुलिस की तरफ से यातना देने के आरोप लग रहे हैं और चुनाव नजदीक आने के साथ पूरा विपक्ष एकजुट नजर आ रहा है.
संगरूर जिले के शेरों गांव के 37 साल के रहने वाले मोहंजीत सिंह 2 सितंबर को चर्चा में आए, जब मुख्यमंत्री मान ने अपने गृह जिले के इस गांव में ‘लोक मिलनी’ कार्यक्रम किया.
जब मान लोगों को संबोधित कर रहे थे, तब मोहंजीत पास के एक घर की छत पर चढ़ गए, काला झंडा दिखाया और ड्रग्स की समस्या से निपटने के सरकार के तरीके पर सवाल उठाते हुए नारे लगाए.
वह कथित तौर पर चिल्ला रहे थे कि गांव में हेरोइन (चिट्टा) खुलेआम मिल रही है. आरोप है कि कार्यक्रम की जगह के पास ही इसे बेचा जा रहा था, जबकि मुख्यमंत्री बोल रहे थे.
मुख्यमंत्री के लाइव कवरेज में विरोध प्रदर्शन दिखाई देने के कुछ ही मिनटों के अंदर पुलिसकर्मी छत पर चढ़ते हुए दिखे. उन्होंने उनके साथ मारपीट की और उन्हें वहां से ले गए. अगले दिन उन्हें छोड़ दिया गया.
रिहा होने के बाद मोहंजीत ने खुद को संगरूर के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया और मीडिया के लोगों को बताया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले ही पुलिस उन्हें ढूंढने आई थी, क्योंकि सोशल मीडिया पर उनकी पोस्ट के जरिए ड्रग्स की उपलब्धता के खिलाफ उनका रुख पहले से ही साफ था. उन्होंने दावा किया कि पुलिस ने “मेरी मां से बेहद बदतमीजी से बात की.”
उन्होंने कहा, “फिर जब मैंने बिल्कुल शांतिपूर्वक और अकेले विरोध करना शुरू किया, तो मुझे तुरंत नीचे उतरने के लिए मजबूर किया गया और गांव के एक घर में ले जाकर मुझे पीटा गया. मेरे बाल और दाढ़ी खींची गई और पुलिस ने मुझे हजार बार थप्पड़ मारे.” यह बताते हुए उन्होंने अपनी दाढ़ी से निकले बालों का गुच्छा भी दिखाया.
‘जांघ पर कट लगाए गए, उन पर नमक डाला गया’
मोहंजीत ने दावा किया कि छत से नीचे उतारने के बाद पुलिस उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन ले गई और वहां फिर पीटा और बिजली के झटके दिए. उन्होंने कहा, “मेरे कपड़े उतार दिए गए और मुझे बिजली के झटके दिए गए. फिर ब्लेड से मेरी जांघों पर कई जगह कट लगाए गए. इसके बाद उन पर नमक डाला गया.”
उन्होंने दावा किया कि यह पूरी यातना एक पुलिसकर्मी वीडियो कॉल के जरिए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को दिखा रहा था.
❌❌ NATIONAL SHAME ❌❌
This is what @AAPPunjab did to a Punjabi Sikh boy who dared to speak the truth about the drug menace in Punjab.
He is the same boy who protested from atop a roof from village Shero in Sunam while a fake PR event of the CM was happening.
Guru Dokhi… pic.twitter.com/L6MV2wxaeK
— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) September 4, 2026
घटना के बारे में पूछे जाने पर राज्य के AAP प्रमुख और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था और इसे टाला जा सकता था.
अरोड़ा ने कहा, “मैंने संबंधित पुलिसकर्मियों से बात की है और उन्होंने अपने बच्चों की कसम खाकर कहा है कि उन्होंने इस व्यक्ति को प्रताड़ित नहीं किया. जिन चोटों की बात की जा रही है, वे खुद को लगी हुई भी हो सकती हैं, क्योंकि वह पहले ही पुलिस हिरासत से घर जा चुके थे और फिर खुद को अस्पताल में भर्ती कराने वापस आए. सच्चाई जो भी होगी, मेडिकल रिपोर्ट से साफ हो जाएगी.”
इसके बाद से कई बड़े राजनीतिक नेता संगरूर सिविल अस्पताल पहुंच रहे हैं, जहां मोहंजीत का इलाज चल रहा है.
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने शुक्रवार को मोहंजीत से मुलाकात की. उन्होंने कहा, “देश के दूसरे हिस्सों में अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वालों का समर्थन करती है. वे लोगों को NDA सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. लेकिन पंजाब में उनकी नैतिकता की समझ पूरी तरह उलट जाती है.”
ਗੁਰੂ ਦੋਖੀ ਦੇ ਇਸ਼ਾਰੇ ਉੱਤੇ ਪੁਲਿਸ ਦੇ ਤਸ਼ੱਦਦ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋਏ ਸਿੱਖ ਨੌਜਵਾਨ ਮੋਹਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਪਿੰਡ ਸ਼ੇਰੋਂ (ਸੁਨਾਮ) ਦਾ ਹਸਪਤਾਲ ਵਿਖੇ ਪਹੁੰਚ ਹਾਲ ਜਾਣਿਆ। ਮੋਹਨਜੀਤ ਸਿੰਘ 'ਤੇ ਪੁਲਿਸ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤਾ ਗਿਆ ਤਸ਼ੱਦਦ ਝਾੜੂ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਤਾਨਾਸ਼ਾਹੀ ਦਾ ਸਿਖ਼ਰ ਹੈ। ਇੱਕ ਸਿੱਖ ਦੀ ਦਸਤਾਰ 'ਤੇ ਹਮਲਾ ਕਰਨਾ, ਉਸਦੇ ਕੇਸਾਂ ਦੀ ਬੇਅਦਬੀ ਕਰਨਾ ਅਤੇ… pic.twitter.com/sQmAZ2u9Kr
— Sukhbir Singh Badal (@officeofssbadal) September 4, 2026
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने शनिवार को मोहंजीत से मुलाकात की और उनकी बात पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से कराई. गांधी ने मोहंजीत को भरोसा दिलाया कि उनकी पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी.
नशे के मुद्दे पर @BhagwantMann को घेरने और काला झंडा दिखाने वाले मोहनजीत शेरों से श्री @RahulGandhi जी ने फोन पर बात कर उनका हालचाल जाना और हौसला बढ़ाया।@PunjabPoliceInd तशद्दुद के बावजूद मोहनजीत की आवाज़ नहीं दब सकी। राहुल गांधी जी ने साफ कहा – तानाशाही के खिलाफ उठने वाली हर… https://t.co/PV7avHZN1u
— Amarinder Singh Raja Warring (@RajaBrar_INC) September 5, 2026
इससे पहले विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने भी मोहंजीत से मुलाकात की थी. बाजवा ने कहा, “क्योंकि पूरी घटना मुख्यमंत्री की नाक के नीचे हुई, इसलिए मोहंजीत के साथ जो हुआ उसके लिए वह भी उतने ही, बल्कि उससे भी ज्यादा जिम्मेदार हैं. पुलिस वही कर रही थी जो उसे करने के लिए कहा गया था. सिर्फ पुलिस को ही इसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा, बल्कि मान को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा.”
I met Mohanjit Singh today and listened to the ordeal he has gone through. What has happened to him is deeply disturbing and a shameful reminder of how easily basic human rights can be trampled upon under the @AAPPunjab.
Along with my fellow Congressman, @VijayIndrSingla, I have… pic.twitter.com/zYCKq8s8bM
— Partap Singh Bajwa (@Partap_Sbajwa) September 4, 2026
पुलिस का क्या कहना है
हालांकि, पुलिस का कहना इससे बिल्कुल अलग है. कड़ी आलोचना का सामना कर रही संगरूर पुलिस ने कहा कि मोहंजीत को एहतियातन हिरासत में लिया गया था, क्योंकि उनके काम से “गांव के लोगों के बीच आपसी झगड़ा हो सकता था.”
संगरूर की SSP रवजोत कौर ग्रेवाल ने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर बात की. उन्होंने कहा कि मोहंजीत का लंबा आपराधिक रिकॉर्ड है और उनके खिलाफ कम से कम आठ FIR दर्ज हैं.
उन्होंने कहा, “पहले भी गांव में दूसरे लोगों के साथ उनके विवाद के कारण कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हुई थी. उनके खिलाफ सामान्य कार्रवाई करते हुए हमने उन्हें छत से नीचे उतारा और एहतियाती कार्रवाई के तहत पुलिस स्टेशन ले गए.”
उन्होंने आगे कहा कि अगले दिन पुलिस ने मोहंजीत का मेडिकल कराया और उनके शरीर पर कोई चोट नहीं मिली. उन्होंने यह भी कहा कि उनका डोप टेस्ट किया गया और उसमें वह ड्रग्स के प्रभाव में पाए गए.
उन्होंने कहा कि परिवार और वकील के अनुरोध पर एक और डोप टेस्ट किया गया और वह भी पॉजिटिव आया. ग्रेवाल ने कहा, “हमने उन्हें SDM के सामने पेश किया और गांव वालों की तरफ से दिए गए भरोसे के बाद दोपहर में उन्हें छोड़ दिया.”
SSP ने कहा कि पुलिस द्वारा उन्हें रिहा किए जाने के कुछ घंटे बाद मोहंजीत अपने वकील के साथ संगरूर के सिविल अस्पताल गए और खुद को भर्ती कराया. मेडिको-लीगल रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें पता चला कि उन्हें 10 जगह चोट लगी थी.
ग्रेवाल ने कहा, “क्योंकि पुलिस के बयान और उनके बयान में अंतर है, इसलिए मामले की जांच SP मुख्यालय को सौंप दी गई है.”
PTI ने शनिवार को बताया कि सरकार ने मोहंजीत को पकड़ने वाले DSP का तबादला कर दिया है. बढ़ते दबाव के बीच तीन अन्य पुलिसकर्मियों का भी जिले से तबादला कर दिया गया.
STORY | Punjab custodial torture row: DSP transferred, three others shifted to police lines in Sangrur
Amid mounting criticism from the opposition over the alleged custodial torture of a Sikh youth in Sangrur, the Punjab Police on Saturday transferred a deputy superintendent of… pic.twitter.com/8gjHVgHAud
— Press Trust of India (@PTI_News) September 5, 2026
धार्मिक पहलू
इस घटना का एक धार्मिक पहलू भी बन गया है, क्योंकि मोहंजीत एक ‘अमृतधारी सिख’ यानी दीक्षित सिख हैं और उन्होंने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान उनके केश और ककारों, यानी सिख धर्म से जुड़ी चीजों, का अनादर किया गया.
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कथित बदसलूकी की निंदा की है और उनसे मिलने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल भेजा है. अकाल तख्त के जत्थेदार कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा है कि काला झंडा दिखाना लोकतांत्रिक विरोध का एक जायज तरीका है.
शुक्रवार को रोपड़ के गुरुद्वारा श्री भट्ठा साहिब में मिरी-पीरी खालसा मार्च की शुरुआत के दौरान मीडिया से बात करते हुए जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गर्गज ने कहा कि इस मार्च में अब तक पंजाब में ड्रग्स की गंभीर समस्या को प्रमुखता से उठाया गया है.
उन्होंने कहा कि हर गांव में 10 से 15 युवा ड्रग्स के शिकार हो चुके हैं और जोर देकर कहा कि पंजाब में “चिट्टा” यानी हेरोइन या सिंथेटिक ड्रग्स की बिक्री पूरी तरह बंद होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की निगरानी में इसे बेचा जा रहा है.
गर्गज ने कहा, “मैंने संगरूर जिले के पुलिस अधीक्षक से बात की है और उनसे कहा है कि सिख युवक को प्रताड़ित करने और उसके ककारों का अपमान करने के लिए जिम्मेदार DSP और SHO को तुरंत बर्खास्त किया जाए और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए.”
गर्गज ने कहा कि अगर पंजाब में ही सरकार सिखों के साथ ऐसा व्यवहार करती है, तो इससे यह सवाल उठता है कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में क्या उम्मीद की जा सकती है.
वड़िंग और बादल ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से दखल देने की मांग की है. वड़िंग ने CCTV फुटेज, मेडिकल और मेडिको-लीगल रिकॉर्ड, डोप टेस्ट रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने और उनकी जांच कराने की भी मांग की है.
बीजेपी ने भी कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा की है. पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने मोहंजीत से बात की और निष्पक्ष जांच की मांग की.
बीजेपी नेताओं ने इस घटना को मान के बहुत प्रचारित ‘ड्रग्स के खिलाफ युद्ध’ की विश्वसनीयता से सीधे जोड़ने की कोशिश की है. उनका कहना है कि ड्रग्स का मुद्दा उठाने वाले एक युवा सिख को कथित तौर पर उसी सरकारी तंत्र ने निशाना बना दिया, जो ड्रग्स के खिलाफ लड़ने का दावा करता है.
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का रुख किया है और दखल देने तथा स्वतंत्र रूप से तथ्यों की जांच कराने की मांग की है.
चुघ ने शनिवार को X पर लिखा कि उनके पत्र के बाद NHRC ने राज्य के मुख्य सचिव, DGP, संगरूर के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी किए हैं. उनसे मामले में कार्रवाई करने और 15 दिनों के अंदर आयोग को रिपोर्ट देने को कहा गया है.
The NHRC taking cognizance of my complaint over the alleged custodial torture of Sardar Mohanjeet Singh is a serious development and a strong indictment of the Mann government’s handling of human rights in Punjab.
The Commission has ordered an immediate inquiry, medico-legal… pic.twitter.com/mXmuJe3ZE5
— Tarun Chugh (@tarunchughbjp) September 5, 2026
‘राजनीतिक रूप से बहुत असरदार मुद्दा’
विशेषज्ञों के अनुसार, इस घटना को लेकर विपक्षी पार्टियों का एक साथ आना महत्वपूर्ण है, क्योंकि पंजाब की राजनीति 2027 के विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रही है.
चंडीगढ़ के DAV कॉलेज सेक्टर 10 के राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. कंवलप्रीत कौर ने कहा, “ड्रग्स का मुद्दा विपक्ष के पास मौजूद सबसे ज्यादा राजनीतिक असर वाले मुद्दों में से एक हो सकता है. AAP सरकार 2022 में भ्रष्टाचार, शासन और पुरानी राजनीतिक व्यवस्था की नाकामियों जैसे मुद्दों पर जोरदार अभियान चलाने के बाद सत्ता में आई थी. इसके बाद उसका ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ भी उसकी बड़ी सरकारी मुहिमों में से एक के रूप में पेश किया गया है.”
उन्होंने कहा, “इसलिए मोहंजीत का विरोध एक अजीब राजनीतिक स्थिति पैदा करता है: मुख्यमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रम में ड्रग्स के खिलाफ विरोध करने वाला एक नागरिक अब इस आरोप के केंद्र में है कि इसी मुद्दे को उठाने के लिए राज्य ने उसे सजा दी. यातना के आरोप जांच में सही साबित होते हैं या नहीं, इससे अलग, इस घटना से मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचा है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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