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Sunday, 6 September, 2026
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‘हम कैसे जिंदा रहेंगे?’ :मणिपुर के डिप्टी CM बोले- ‘शांति के लिए’ नागा विधायक समर्थन वापस ले सकते हैं

दिखो तनाव के फिर से बढ़ने के पीछे 'राजनीतिक मकसद' बताते हैं और उन 'निहित स्वार्थों' को दोषी ठहराते हैं जो संघर्ष से जूझ रहे राज्य में शांति नहीं चाहते.

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नई दिल्ली: मणिपुर के दो बड़े आदिवासी समुदायों, कुकी-जो और नागाओं के बीच बढ़ते तनाव के बीच, नागा उपमुख्यमंत्री लोसी दिखो ने चेतावनी दी है कि अगर समुदाय के खिलाफ हिंसा जारी रहती है, तो राज्य के नौ नागा विधायक बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार से इस्तीफा देने के अलावा शायद कोई रास्ता न बचने की स्थिति में आ सकते हैं.

“हमें ऐसा करना ही पड़ेगा (समर्थन वापस लेना). हम इस तरह कैसे रह सकते हैं? अब हम गृह युद्ध की ओर आगे नहीं बढ़ सकते. मणिपुर एक छोटा राज्य है. अगर हम सरकार से समर्थन वापस लेते हैं, तो यह शांति के लिए होगा,” सेनापति से नागा विधायक दिखो ने गुरुवार को दिप्रिंट को एक इंटरव्यू में बताया.

अगर नागा विधायक अपना समर्थन वापस भी लेते हैं, तो युमनाम खेमचंद सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के खतरे में आने की संभावना नहीं है, क्योंकि मौजूदा 58 सदस्यीय मणिपुर विधानसभा में उसके पास आरामदायक बहुमत है. दो विधायकों की मौत के बाद दो सीटें खाली हैं. इनमें एक बीजेपी से और दूसरी उसकी सहयोगी पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) से है.

बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन ने राष्ट्रपति शासन खत्म होने के बाद फरवरी में सत्ता संभाली थी और उसके पास कुल 53 विधायक हैं. दो नागा विधायक बीजेपी से हैं, पांच नागा पीपुल्स फ्रंट (NPF) से, एक NPP से और एक निर्दलीय है.

सरकार में जातीय संतुलन बनाए रखने के लिए खेमचंद सिंह सरकार में दो उपमुख्यमंत्री हैं. दिखो NPF से हैं, जबकि दूसरे उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन बीजेपी विधायक हैं और कुकी समुदाय का प्रतिनिधित्व करती हैं. मौजूदा सरकार का कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होगा.

मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से कुकी-जो और नागा समुदायों के बीच फिर से तनाव बढ़ा है. मई 2023 में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से नागा तटस्थ बने हुए थे.

जातीय झड़पों में अब तक 300 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. इसके चलते फरवरी 2025 में बीरेन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने इस्तीफा दिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया. हालांकि, मणिपुर विधानसभा को भंग नहीं किया गया था, बल्कि उसे निलंबित स्थिति में रखा गया था.

राष्ट्रपति शासन के दौरान हिंसा में कुछ समय के लिए कमी आई थी, जो फरवरी में खत्म हुआ. लेकिन उसी महीने खेमचंद सिंह के सत्ता संभालने के बाद तनाव फिर बढ़ गया. इसके बाद संघर्ष एक नए दौर में पहुंच गया, जिसमें नागा भी शामिल हो गए. जो संघर्ष पहले मैतेई और कुकी-जो के बीच था, वह धीरे-धीरे कुकी-जो और नागाओं के बीच संघर्ष में बदल गया.

दिखो ने तनाव फिर बढ़ने के पीछे “राजनीतिक मकसद” को जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा, “कुछ ऐसे लोगों के अपने फायदे हैं, जो मणिपुर में शांति नहीं चाहते.”

‘नेमचा किपगेन चुप क्यों हैं?’

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में नागा काम नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, “ऐसे भयानक अपराधों को कौन बर्दाश्त कर सकता है? क्या आपने हमारे देश में कभी ऐसा देखा है? बहुत से अच्छे कुकी लोग भी हैं, थाडो, हमार, पाइटे…. वे हिंसा नहीं चाहते, वे शांति चाहते हैं. लेकिन कुछ लोग ऐसे हैं जिन्होंने यह सब पैदा किया है. और इसी वजह से श्रीमती नेमचा को दखल देना होगा.”

उन्होंने कहा, “क्योंकि उनके पति, जो KNF(P) के प्रमुख हैं और उसी घर में रहते हैं, नागाओं के खिलाफ हिंसा जारी रखे हुए हैं.”

किपगेन के पति थांगबोई किपगेन कुकी नेशनल फ्रंट (प्रेसिडेंट) के प्रमुख हैं. यह कुकी उग्रवादी संगठनों में से एक है, जिसने हिंसा छोड़ने के लिए केंद्र और मणिपुर सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.

हिंसा रोकने के लिए किया गया तीन पक्षों वाला समझौता सितंबर 2025 में बढ़ाया गया था. लेकिन दिखो ने कहा कि जमीन पर स्थिति अलग है.

उन्होंने और आठ अन्य नागा विधायकों ने पिछले हफ्ते केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा. इसमें आरोप लगाया गया कि थांगबोई किपगेन नागाओं के खिलाफ मौजूदा हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं. उन्होंने कुकी उपमुख्यमंत्री के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की, उन पर उग्रवादी संगठनों के साथ मिलीभगत करने और दखल न देने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा, “केंद्र ने हमें (खेमचंद सिंह सरकार को) लोगों को शांत करने और सामान्य स्थिति वापस लाने का अधिकार दिया है. इसी समझ के साथ मैं हर गांव गया… मैतेई गांव, कुकी गांव, थाडो गांव, हर जगह.”

“लेकिन मुझे यह कहते हुए दुख हो रहा है कि मेरी सहयोगी नेमचा किपगेन किसी भी जगह नहीं गईं. वह नागा गांवों में लोगों को शांत करने के लिए नहीं गईं. और जब छह नागा लोगों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई, तब उन्होंने कुछ भी नहीं कहा. और यह साबित हो चुका है कि उनके पति का संगठन KNF(P) नागा नागरिकों के अपहरण और हत्या के पीछे है,” दिखो ने आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि छह नागा नागरिकों की हत्या से पहले KNF(P) के प्रतिनिधियों ने उन्हें बताया था कि उन्होंने उन लोगों को पकड़ लिया है. बाद में उन्होंने चुराचांदपुर में खुले तौर पर यह भी दावा किया कि नागा बंधकों को मार दिया गया है. दिखो ने पूछा, “नेमचा किपगेन ने दखल क्यों नहीं दिया? उन्होंने इसकी निंदा क्यों नहीं की? जब हम शांति लाने की कोशिश कर रहे हैं, तो वह चुप क्यों हैं?”

दिखो ने कहा कि नागा गुस्से में हैं. उन्होंने कहा, “आप (किपगेन) अपने लोगों को लड़ने क्यों दे रही हैं? जब हमारे लोगों को इस तरह मारा जा रहा है, तो लोग बाहर नहीं जा सकते… हम चुप नहीं रह सकते. हमारे लोगों के पास बचाव के लिए जरूरी सामान नहीं है. तो हम कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि ऐसे लोगों वाली इस तरह की सरकार शांति लाएगी?”

मणिपुर के उपमुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नागा SoO समझौते को खत्म करने की भी मांग कर रहे हैं, क्योंकि कुकी भूमिगत संगठन समझौते के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं.

“वे हर जगह अपने कैडर भेज रहे हैं. उन्होंने मैतेई से लड़ाई की और अब नागाओं से भी लड़ रहे हैं. उन्हें SoO कैंपों में ही रहना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. यही समस्या है.”

‘मणिपुर संघर्ष के पीछे जमीन और अवैध प्रवासी’

दिखो ने कहा कि नागाओं और कुकियों के बीच संघर्ष का इतिहास रहा है. उन्होंने कहा, “दोनों समुदायों के बीच आखिरी संघर्ष 90 के दशक की शुरुआत में हुआ था और पांच साल तक चला था. समस्या जमीन की है. और अवैध प्रवासियों की है.”

दिखो के अनुसार, नागा समुदाय का दावा है कि पहाड़ियों की जमीन मूल रूप से उनकी है.

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा संघर्ष की नींव पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के शासनकाल में रखी गई थी. “जो संघर्ष मैतेई और कुकियों के बीच शुरू हुआ था, वह अब फैल गया है और नागा भी इसमें खींच लिए गए हैं. अब तीनों समुदाय इस संघर्ष में शामिल हो गए हैं. अब सिर्फ यही रास्ता बचा है कि हमें कानूनी और लोकतांत्रिक तरीके से कोई समाधान निकालना होगा. इसलिए मुझे लगता है कि केंद्र ने जनगणना को रोक रखा है.”

दिखो ने कहा कि दोनों समुदायों के लिए उनका संदेश है कि संघर्ष बंद करें. “आइए बातचीत की मेज पर बैठते हैं. पिछले संघर्ष में भी ठीक होने में बहुत समय लगा था. लेकिन अब हमें समय का इंतजार नहीं करना चाहिए. हम यह पहले ही झेल चुके हैं. हमें इसकी कीमत पता है. इसलिए लोगों को शांति के लिए कोशिश करनी चाहिए. अगर हम पूरी जमीन भी ले लें, तो शांति के बिना हम उसका क्या करेंगे?” उन्होंने कहा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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