काठमांडू: नेपाल की त्रिशूली नदी में एक जलविद्युत सुरंग से दो मजदूरों को ज़िंदा बचा लिया गया है. यह बचाव रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ के नौ दिन बाद हुआ है. राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद श्री राम न्यौपाने ने फेसबुक पोस्ट में बताया कि संजय शाह को त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना से ज़िंदा बाहर निकाला गया है. यह परियोजना नुवाकोट और रासुवा जिलों की सीमा पर है.
सुबह 9:30 बजे न्यौपाने ने पोस्ट किया कि इसी परियोजना से दूसरे व्यक्ति को भी बचा लिया गया है. बाढ़ के बाद जलविद्युत परियोजना के अंदर से बचाए गए ये पहले दो लोग हैं. त्रिशूली नदी के किनारे 12 अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं में 900 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की आशंका है.
नेपाल आर्मी ने भी सुबह 9:30 बजे बचाव की पुष्टि की. उसने बताया कि दो मजदूरों—संजय शाह और कबीर महाजन को सुरक्षित बचा लिया गया है और उनका इलाज चल रहा है. आर्मी ने कहा कि त्रिशूली 3A परियोजना में करीब 40 और लोगों के फंसे होने की आशंका है और बचाव अभियान जारी है.
इससे पहले 4 सितंबर को बचाव अभियान में शामिल इंजीनियर न्यौपाने ने पोस्ट किया था कि नेपाल आर्मी और सशस्त्र पुलिस के जवानों ने सुरंग के अंदर से आवाज़ें सुनी हैं. इससे उम्मीद जगी थी कि फंसे मजदूर ज़िंदा हो सकते हैं.

न्यौपाने की पोस्ट में लिखा था, “बचाव दल सुरंग में जाने के लिए अभियान तेज कर रहे हैं. यह उम्मीद जगाने वाली बात है कि हमने सुरंगों के अंदर से आवाजें सुनी हैं.”
न्यौपाने के मुताबिक, शुक्रवार सुबह-सुबह त्रिशूली 3A में सुरक्षा कर्मियों ने पुष्टि की कि सुरंग के अंदर एक से ज्यादा लोगों की आवाजें सुनाई दे रही हैं. जब वे सुरंग के अंदर गए, तो बचाव कर्मियों ने कहा, “चिंता मत करो, हम तुम्हें बचाने आ रहे हैं.”
इसके जवाब में उन्हें धीमी आवाज़ सुनाई दी, “हुन्छ”, जिसका नेपाली भाषा में मतलब “ठीक है” होता है.
न्यौपाने ने अपने फेसबुक पर जो तस्वीरें साझा की हैं, उनमें दोनों बचाए गए मजदूर स्ट्रेचर पर ऑक्सीजन मास्क लगाए हुए दिखाई दे रहे हैं. नेपाल आर्मी त्रिशूली 3A परियोजना के अंदर और गहराई तक जाकर उन दूसरे मजदूरों को बचाने की कोशिश कर रही है, जो शायद ज़िंदा हों.
26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ के बाद खोज, बचाव और राहत अभियान में मदद के लिए नेपाल आर्मी, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस ने पूरे देश में 20,000 से ज्यादा जवान तैनात किए हैं. बाढ़ की चपेट में आने के बाद अब तक 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 4,200 लोग अब भी लापता हैं.

नेपाल के सुरक्षा बलों के सामने एक बड़ा काम त्रिशूली नदी के किनारे जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों और जमीन के नीचे बने बिजलीघरों में फंसे मजदूरों, तकनीशियनों और इंजीनियरों को बचाना था. भारत और चीन की विशेष टीमें भी बचाव अभियान में मदद के लिए 30 अगस्त को पहुंची थीं.
हालांकि, सुरंगों की सही स्थिति के बारे में जानकारी नहीं थी और अंदर फंसे लोगों से कोई संपर्क भी नहीं हो पाया था. इसलिए कुछ विशेषज्ञों ने कहा था कि मजदूरों के जिंदा मिलने की संभावना कम है. यह चिंता भी थी कि बाढ़ में मुख्य रूप से कीचड़ और मलबा आया है, इसलिए सुरंगों के अंदर ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है.
सुरक्षा कर्मी इससे पहले कुछ सुरंगों से केवल शव ही निकाल पाए थे. इनमें सोमवार और मंगलवार को चिलिमे जलविद्युत सुरंग से शव निकाले गए थे.
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