नई दिल्ली: पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत में घरेलू तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की खपत अप्रैल-अगस्त 2026 के दौरान 15.9 प्रतिशत घटकर 1.13 करोड़ टन रह गई. पिछले साल इसी अवधि में यह 1.34 करोड़ टन थी.
यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सरकार पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) के कनेक्शन बढ़ाने और घरों को खाना पकाने के लिए साफ ईंधन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिशें तेज कर रही है.
LPG की खपत में यह गिरावट गल्फ क्षेत्र से एलपीजी की सप्लाई में आई रुकावट के बीच भी हुई है. यह रुकावट वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण आई है.
फरवरी के आखिर में सप्लाई में रुकावट शुरू होने से पहले, भारत अपनी कुल LPG जरूरत का करीब 60 प्रतिशत आयात करता था. गल्फ से आने वाली सप्लाई में से करीब 90 प्रतिशत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के रास्ते आती थी.
संकट के दौरान भारत ने अपनी रिफाइनरियों में LPG का उत्पादन बढ़ाकर और US, Russia और Canada समेत दूसरे देशों से अतिरिक्त सप्लाई लेकर देश में LPG की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की.
LPG की सप्लाई सुरक्षित करने की कोशिशों के साथ-साथ सरकार घरों में खाना पकाने के लिए PNG के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए भी कदम उठा रही है.
पूरे देश में चल रहे अभियान में लोगों को जागरूक करना, घर-घर जाकर संपर्क करना, LPG कनेक्शन सरेंडर करने में मदद करना और LPG का इस्तेमाल करने वाली housing societies को PNG पर जाने के लिए प्रोत्साहित करना शामिल है.
अगस्त में सरकार ने घरेलू PNG कनेक्शन बढ़ाने और ज्यादा घरों को खाना पकाने के लिए पाइप वाली गैस पर जाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए एक incentive scheme को मंजूरी दी.
यह scheme 1 सितंबर से लागू है. इसके तहत योग्य city gas distribution कंपनियों को उनके संबंधित इलाकों में तय सीमा से ज्यादा हर नए बिल वाले घरेलू PNG कनेक्शन के लिए कम कीमत वाली घरेलू स्तर पर पैदा की गई गैस की अतिरिक्त सप्लाई मिलेगी.
यह scheme छह-छह महीने के दो चरणों में लागू की जाएगी. अतिरिक्त गैस की सप्लाई सक्रिय घरेलू PNG कनेक्शनों में हुई बढ़ोतरी से जुड़ी होगी.
अगस्त 2026 तक भारत में करीब 1.74 करोड़ घरेलू PNG कनेक्शन थे. सरकार राज्यों से प्राकृतिक गैस पर VAT घटाकर 5 प्रतिशत करने के लिए भी कह रही है, ताकि PNG लोगों के लिए ज्यादा सस्ती हो सके.
जहां LPG की खपत में तेज गिरावट आई, वहीं अप्रैल-अगस्त के दौरान transport fuels की मांग बढ़ी.
Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) के आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोल की खपत 6.4 प्रतिशत बढ़कर 1.89 करोड़ टन हो गई, जो एक साल पहले 1.78 करोड़ टन थी. वहीं diesel की मांग 4.3 प्रतिशत बढ़कर 4.05 करोड़ टन हो गई, जो एक साल पहले 3.89 करोड़ टन थी. PPAC, Petroleum and Natural Gas Ministry के तहत काम करने वाला एक administrative body है, जो petroleum से जुड़े आंकड़ों पर नजर रखता है.
Air turbine fuel (ATF) की खपत लगभग स्थिर रही. इसमें 0.57 प्रतिशत की मामूली गिरावट आई और यह 36.7 लाख टन रह गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 37 लाख टन थी.
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