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Tuesday, 16 June, 2026
होमराजनीतिJSP की नज़र पूरे देश में ‘बड़ी राष्ट्रीय ताकत’ बनने पर, केंद्र में कैबिनेट में जगह बनाने की योजना

JSP की नज़र पूरे देश में ‘बड़ी राष्ट्रीय ताकत’ बनने पर, केंद्र में कैबिनेट में जगह बनाने की योजना

पवन कल्याण की पार्टी ने अपने 3 सांसदों से कहा है कि वे सिर्फ आंध्र प्रदेश नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी आवाज़ उठाएं. जनसेना ने दूसरे दक्षिणी राज्यों में भी विस्तार की शुरुआत कर दी है.

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हैदराबाद: आंध्र प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सहयोगी पार्टी जनसेना पार्टी (जेएसपी) केंद्र सरकार में मंत्री पद पाने की योजना बना रही है. पार्टी नेताओं ने दिप्रिंट को बताया कि वह इसे आंध्र प्रदेश से बाहर विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देख रही है.

पार्टी के नेता सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित 12 साल पुरानी जनसेना पार्टी के ‘सेना प्रस्थानम’ कार्यक्रम में जुटे थे.

जनसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय कुमार ने दिप्रिंट से कहा, “हम एक क्षेत्रीय पार्टी हैं, लेकिन हमारी सोच राष्ट्रीय है. हम योजनाबद्ध तरीके से आंध्र प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टी से आगे बढ़कर एक बड़ी राष्ट्रीय ताकत बनना चाहते हैं. हमारा विस्तार सिर्फ चुनावी गणित पर नहीं, बल्कि वैचारिक आधार पर हो रहा है.”

के. पवन कल्याण के नेतृत्व वाली जनसेना ने तेलुगु राज्यों से बाहर भी दक्षिण भारत में विस्तार शुरू कर दिया है. पार्टी ने कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी से कार्यकर्ताओं को शामिल किया है. इसके अलावा पार्टी ने केरल में एक थिंक टैंक भी बनाया है.

पार्टी की चित्रदुर्ग में भी सक्रिय मौजूदगी है. यह जिला आंध्र प्रदेश की पूर्वी सीमा से लगा हुआ है. स्थानीय कारोबारी डी. बसवराज जैसे नेताओं ने क्षेत्र में पार्टी के विस्तार और सैकड़ों नए सदस्यों को जोड़ने की मुहिम का नेतृत्व किया. इसके बाद राम तल्लूरी और के. नागा बाबू (पवन कल्याण के बड़े भाई) चित्रदुर्ग पहुंचे और नए कार्यकर्ताओं का पार्टी में स्वागत किया.

जनसेना नेता संदीप पचकारला ने कहा, “केरल में हमारा एक थिंक टैंक तिरुवनंतपुरम में काम कर रहा है. हमें अपने सात मुख्य सिद्धांतों के लिए काफी समर्थन मिला है. इनमें जाति और धार्मिक पहचान से ऊपर की राजनीति तथा ऐसा राष्ट्रवाद शामिल है जो क्षेत्रीय पहचान को नकारता नहीं है. हमारे थिंक टैंक के सदस्य केरल के अलग-अलग इलाकों का अध्ययन कर रहे हैं और हम लोगों की राय भी ले रहे हैं.”

‘जनसेना की विचारधारा का विस्तार हो रहा है’

दिल्ली में पार्टी का दो दिवसीय कार्यक्रम सोमवार को समाप्त हुआ. इसमें दक्षिण भारत के सभी राज्यों से 120 से अधिक नेताओं ने हिस्सा लिया. इस दौरान पांच प्रस्ताव पारित किए गए. पार्टी के विस्तार की रणनीति के तहत उसके तीनों सांसदों से कहा गया है कि वे सिर्फ आंध्र प्रदेश से जुड़े मुद्दों तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी बात रखें.

सोमवार को पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पवन कल्याण ने कहा, “जनसेना पार्टी के सिद्धांत और विचारधारा देशभर के लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. देश के लिए सोचने का पार्टी का नज़रिया लोगों को उसके करीब ला रहा है. इसी वजह से दूसरे राज्यों के कई लोग पार्टी में शामिल होने के लिए आगे आ रहे हैं. वे अपने-अपने राज्यों में पार्टी का विस्तार करने के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जता रहे हैं. यह साफ संकेत है कि जनसेना की विचारधारा का विस्तार हो रहा है. विचारधारा की ताकत से अलग-अलग क्षेत्रों और लोगों को जोड़ना तथा समाज को एकजुट करना जनसेना की नीति है. जनसेना पार्टी के लिए देश हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगा.”

इस सम्मेलन में दक्षिण भारत के युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को बड़े पैमाने पर जोड़ने की रणनीति पर भी चर्चा हुई. पार्टी ने Gen Z की आकांक्षाओं का अध्ययन करने के लिए एक अलग समिति बनाई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे पार्टी को वंशवादी राजनीति से अलग युवा नेतृत्व तैयार करने में मदद मिल सकती है.

आंध्र प्रदेश के विशेषज्ञों, जिन्होंने जनसेना के दिल्ली सम्मेलन पर करीबी नज़र रखी, का कहना है कि पार्टी की महत्वाकांक्षा को 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मिली 100 प्रतिशत सफलता से बल मिला है.

पार्टी ने जिन 175 विधानसभा सीटों में से 21 सीटों पर चुनाव लड़ा था, उन सभी 21 सीटों पर जीत हासिल की. इसके अलावा उसने दो लोकसभा सीटें भी जीतीं. पार्टी ने यह भी फैसला किया है कि वह तेलंगाना नगर निकाय चुनाव और 2028 विधानसभा चुनाव लड़ेगी. उसकी पहली परीक्षा हैदराबाद और सिकंदराबाद के जुड़वां शहरों के उन 20 से अधिक वार्डों में अच्छा प्रदर्शन करना होगा, जहां आंध्र प्रदेश से आए लोग बड़ी संख्या में रहते हैं.

हालांकि, जनसेना की वापसी तेलंगाना की राजनीति में बदलाव ला रही है और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) तथा तेलंगाना राष्ट्र सेना उसकी महत्वाकांक्षाओं को सीधी चुनौती दे रही हैं, लेकिन कई लोगों का मानना है कि यह विस्तार अकेले नहीं हो रहा है. पवन कल्याण का तेलंगाना में प्रवेश करने का फैसला 10 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हैदराबाद यात्रा के तुरंत बाद आया. उस दौरान मोदी ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण से मुलाकात की थी. जनसेना की देशव्यापी विस्तार रणनीति चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी. इसके लिए पहले तेलुगु समुदाय को तेलंगाना में पार्टी की प्रासंगिकता पर अपना फैसला देना होगा.

जनसेना का ‘प्रतिस्पर्धी फायदा’

आंध्र प्रदेश के राजनीतिक विश्लेषक ए. सत्यनारायण ने कहा, “जहां ज्यादातर क्षेत्रीय पार्टियां दिल्ली विरोधी राजनीति पर जोर देती हैं, वहीं जनसेना अपने विस्तार को देशभक्ति, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता के आधार पर आगे बढ़ा रही है. पवन कल्याण की जबरदस्त फिल्मी लोकप्रियता और कई भाषाएं बोलने की क्षमता पार्टी को तुरंत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त दे सकती है. उनके समर्थकों का कहना है कि यही लोकप्रियता जनसेना को नए राज्यों में लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए लंबे समय तक संगठन खड़ा करने की जरूरत से बचा सकती है.”

हालांकि, आंध्र प्रदेश से बाहर विस्तार की कोशिशों के बावजूद पार्टी इस बात का ध्यान रख रही है कि इससे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को राजनीतिक नुकसान न पहुंचे.

पवन कल्याण और पार्टी के दूसरे स्तर के नेता हमेशा बीजेपी के सहयोगी रहे हैं और उन्होंने खुद को दक्षिण भारत में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति के बीच एक सेतु के रूप में प्रस्तुत किया है.

जनसेना ने तीन-भाषा नीति और परिसीमन (Delimitation) जैसे कई विवादित मुद्दों पर भी प्रधानमंत्री का खुलकर समर्थन किया है. विश्लेषकों का मानना है कि किसी राष्ट्रीय पार्टी का समर्थन जनसेना को आंध्र प्रदेश से बाहर विस्तार करने में मजबूत आधार दे सकता है.

हालांकि, पार्टी के विस्तार के सामने कई चुनौतियां भी हैं. भले ही उसे बीजेपी का समर्थन हासिल हो, लेकिन यह रणनीतिक दांव उल्टा भी पड़ सकता है अगर आंध्र प्रदेश में उसकी सहयोगी तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) जनसेना के विस्तार को अपने लिए खतरा मानने लगे.

तेलुगु मतदाताओं का साझा आधार, तेलंगाना में “इनसाइडर बनाम आउटसाइडर” की बहस और पवन कल्याण को “पार्ट-टाइम राजनेता” कहे जाने जैसे मुद्दे ऐसे हैं, जिनसे पार्टी को गंभीर राजनीतिक ताकत के रूप में स्वीकार किए जाने के लिए निपटना होगा.

दूसरी बड़ी चुनौती यह है कि जनसेना को पवन कल्याण की फिल्मी लोकप्रियता को तेलंगाना और कर्नाटक में मजबूत राजनीतिक संगठन और बूथ स्तर के नेटवर्क में बदलना होगा, ताकि वह एक राजनीतिक पार्टी के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर सके.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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