हैदराबाद: तमिलनाडु में अभिनेता-राजनेता सी. जोसेफ विजय की चुनावी जीत और 30 वर्षीय अभिजीत दीपके की वायरल कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से प्रेरणा लेते हुए, जन सेना पार्टी (JSP) के अध्यक्ष के. पवन कल्याण ने ‘सेना गालम’ नाम की एक विशेष समिति बनाने की घोषणा की है. इसका उद्देश्य पार्टी को Gen Z की आकांक्षाओं के साथ जोड़ना है.
यह घोषणा जन सेना मुख्यालय में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की लंबी बैठक के बाद की गई, जहां चर्चा का मुख्य विषय समकालीन राजनीति और नीतियों के अनुसार पार्टी को ढालना था. यह जानकारी पार्टी की प्रेस विज्ञप्ति में दी गई.
पार्टी ने विज्ञप्ति में कहा, “यह तय किया गया कि पार्टी पुरानी और अप्रासंगिक राजनीतिक परंपराओं को पूरी तरह छोड़कर प्रगतिशील विचारों के साथ आगे बढ़ेगी. नई समिति का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द बढ़ाना, जिम्मेदार राजनीति को बढ़ावा देना, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना और सबसे महत्वपूर्ण, Gen Z युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप आवाज उठाना है.”
बैठक में जन सेना अध्यक्ष, जो आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री भी हैं, ने निर्देश दिया कि समिति संविधान के प्रति पूरी निष्ठा के साथ काम करे, समाज के सभी वर्गों का सम्मान करे और देश की एकता व अखंडता से कोई समझौता न हो.
बैठक में पारित प्रस्ताव लगभग उन मांगों जैसे थे जो भारत के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवाओं की राजनीति में दिखाई दे रही हैं. युवा आर्थिक अनिश्चितता, सार्वजनिक संस्थानों पर घटते भरोसे और इस बात पर संदेह जता रहे हैं कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था वास्तव में उनके जीवन को बेहतर बना सकती है या नहीं.
సామాజిక సామరస్యం, బాధ్యతాయుత రాజకీయాలు, రాజ్యాంగ విలువల పరిరక్షణ కోసం ‘సేనా గళం’
•జనసేనలో అంతర్గతంగా ప్రత్యేక కమిటీ ఏర్పాటు
•అనుచిత వ్యాఖ్యలు, ప్రజా ప్రయోజనాలకు విరుద్ధమైన చర్యలపై జనసేన పక్షాన కమిటీ సభ్యులే బాధ్యతాయుతంగా స్పందిస్తారు
•జెన్ జీ యువత ఆలోచనలు… ఆశయాలను అర్థం… pic.twitter.com/W78e7pmEub— JanaSena Party (@JanaSenaParty) May 31, 2026
हालांकि सेना गालम की संरचना अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन बैठक में मौजूद नेताओं ने कहा कि समिति के सुझावों को पार्टी की नीतियों में सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा. नेताओं ने कहा कि सेना गालम का मुख्य उद्देश्य “बुर्जुआ मानसिकता” को ठुकराकर गहरी सामाजिक जिम्मेदारी के साथ काम करना है.
यह कदम पड़ोसी राज्यों में हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद उठाया गया है.
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) ने अपने सहयोगियों के साथ सरकार बनाई. इसके बाद कई राजनीतिक रणनीतिकारों, नेताओं और जन सेना पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पवन कल्याण की तुलना विजय से की और कहा कि दोनों की Gen Z में समान लोकप्रियता है.
हालांकि कल्याण ने इन तुलनाों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी 15 साल से राजनीति में है, लेकिन उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि उन्हें अपने अभिनेता सहयोगी विजय की तमिलनाडु में जीत से “थोड़ी जलन” है.
तमिलनाडु सरकार बनने के कुछ हफ्तों बाद आंध्र प्रदेश के एक कार्यक्रम में उन्होंने मजाक में कहा, “विजय की पार्टी ने कटआउट और होलोग्राम के जरिए बड़ी जीत हासिल की, जबकि मैंने अपनी पार्टी का आधार बनाने के लिए 15 साल तक खुद सड़कों पर घूमकर मेहनत की.”
“हालांकि, मैं मानता हूं कि लाखों लोगों की अपेक्षाओं को समझने के लिए गहरा ज्ञान और कड़ी मेहनत की जरूरत होती है.”
उन्होंने TVK की सफलता की भी सराहना की और विजय की मजबूत शुरुआत को इस बात का संकेत बताया कि जनता बदलाव चाहती है और राजनीतिक परिदृश्य को खुद बदल रही है.
JSP नेताओं ने कहा कि तमिलनाडु के राजनीतिक घटनाक्रम और अभिजीत दिपके की CJP ने जन सेना पार्टी को आधुनिक राजनीति की मांगों को समझने और उसके अनुसार खुद को ढालने के लिए प्रेरित किया.
आंध्र प्रदेश में 15 से 34 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की आबादी राज्य की कुल आबादी का 35 प्रतिशत से अधिक मानी जाती है.
विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की विवादास्पद टिप्पणियों का जिक्र करते हुए पवन कल्याण ने कहा कि उनकी पार्टी उन लोगों का विरोध करती है जो किसी व्यक्ति की जाति, धर्म या समुदाय को लेकर व्यापक टिप्पणियां करके सामाजिक तनाव पैदा करने की कोशिश करते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति समाज में नफरत फैलाती है.
YSRCP के नेताओं ने जन सेना पार्टी और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेताओं पर टिप्पणी करते हुए नीतिगत फैसलों को जातिवादी बताया और उनकी जातियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं. YSRCP अक्सर कम्मा और कापू समुदाय से आने वाले मौजूदा विधायकों और मंत्रियों की आलोचना करती रही है, जो क्रमशः TDP और JSP के राजनीतिक सहयोगी माने जाते हैं.
उन्होंने कहा, “हर किसी को यह सच्चाई स्वीकार करनी चाहिए कि आज के युवा ऐसी राजनीतिक संस्कृति का कड़ा विरोध करते हैं. जन सेना पार्टी की स्पष्ट नीति है कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत गलतियों पर सवाल उसी व्यक्ति से किए जाने चाहिए और सामाजिक समूहों को ऐसे मामलों में नहीं घसीटना चाहिए.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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