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Saturday, 1 August, 2026
होमराजनीतिराज्यसभा में जयराम रमेश ने सौंपे देवरस के पत्र, RSS पर आपातकाल के 'समर्थन' के दावे का दिया हवाला

राज्यसभा में जयराम रमेश ने सौंपे देवरस के पत्र, RSS पर आपातकाल के ‘समर्थन’ के दावे का दिया हवाला

बीजेपी सांसदों की ओर से RSS द्वारा इमरजेंसी का समर्थन करने के अपने दावे को साबित करने की चुनौती मिलने के अगले ही दिन, रमेश ने बालासाहेब देवरस के लिखे 3 पत्र पेश किए—इनमें से 2 इंदिरा गांधी को और 1 आचार्य विनोबा भावे को लिखे गए थे.

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नई दिल्ली: बीजेपी सांसदों ने कांग्रेस सांसद जयराम रमेश से कहा कि वह अपने इस दावे का सबूत दें कि आपातकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उसका समर्थन किया था. इसके बाद जयराम रमेश ने राज्यसभा के सभापति को 1975 में तत्कालीन RSS प्रमुख बालासाहेब देवरस द्वारा लिखे गए तीन पत्र सौंपे. उनका कहना है कि ये पत्र उनके दावे को सही साबित करते हैं.

इनमें से एक पत्र में देवरस ने लिखा था, “RSS पर लगा प्रतिबंध हटा दिया जाए और RSS व उसके स्वयंसेवकों को देश में हर क्षेत्र में चल रही विकास योजनाओं में भाग लेने दिया जाए.”

जयराम रमेश ने जो तीन पत्र दिए हैं, उनमें दो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को और एक आचार्य विनोबा भावे को लिखा गया था.

देवरस ने इंदिरा गांधी से RSS पर लगा प्रतिबंध हटाने की अपील की थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1971 के चुनाव को वैध ठहराने के बाद इंदिरा गांधी को बधाई भी दी थी. उन्होंने लिखा था, “मैं आपको बधाई देता हूं कि सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने आपके चुनाव को वैध घोषित किया है.”

इन पत्रों से पता चलता है कि सरकार के प्रति उनका रवैया सहयोग वाला था. देवरस ने बार-बार RSS पर लगा प्रतिबंध हटाने, जेल में बंद स्वयंसेवकों को रिहा करने और संगठन को सरकारी योजनाओं में योगदान देने की अनुमति देने की अपील की थी.

1975 में आपातकाल लागू होने के बाद RSS पर प्रतिबंध लगा दिया गया था. इंदिरा गांधी सरकार का आरोप था कि RSS आपातकाल का विरोध कर रहा था और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बन रहा था. RSS ने जयप्रकाश (जेपी) आंदोलन का समर्थन किया था. इस आंदोलन में देशभर में प्रदर्शन करने और इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा चुनावी गड़बड़ी का दोषी ठहराए जाने के बाद इंदिरा गांधी से इस्तीफा मांगने की मांग की गई थी. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को पलट दिया था.

कांग्रेस का कहना है कि ये पत्र दिखाते हैं कि उस समय RSS नेतृत्व का रुख इंदिरा गांधी सरकार के प्रति सहयोग वाला था. वहीं बीजेपी और RSS का कहना है कि ये पत्र सिर्फ RSS पर लगा प्रतिबंध हटवाने और जेल में बंद स्वयंसेवकों की रिहाई की मांग के लिए लिखे गए थे. इनका मतलब आपातकाल का समर्थन करना नहीं था.

कांग्रेस के महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने शुक्रवार को राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को वे दस्तावेज सौंपे, जिन्हें उन्होंने “प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज” बताया. यह तब हुआ जब बीजेपी सांसदों ने उनसे सदन में किए गए इस दावे का सबूत मांगा कि तत्कालीन RSS प्रमुख ने आपातकाल के समर्थन में इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था.

31 जुलाई की अपनी चिट्ठी में जयराम रमेश ने लिखा, “कल शाम मैंने संसदीय कार्य मंत्री के बयान का जवाब दिया था. बीजेपी सांसदों ने मुझसे कहा कि मैं यह साबित करूं कि RSS प्रमुख ने आपातकाल के समर्थन में इंदिरा गांधी को पत्र लिखा था. रिकॉर्ड के लिए मैं यहां दो पत्र इंदिरा गांधी को और एक पत्र आचार्य विनोबा भावे को भेज रहा हूं.”

इन दस्तावेजों में 1978 में प्रकाशित ब्रह्म दत्त की किताब Five Headed Monster: A Factual Narrative of the Genesis of Janata Party के प्रमाणित अंश भी शामिल हैं. इस किताब में आपातकाल के दौरान देवरस के नाम से जुड़े तीन पत्र प्रकाशित किए गए थे. जयराम रमेश ने इन पन्नों पर हस्ताक्षर करके उन्हें प्रमाणित प्रतियां बताया है.

पहला पत्र 22 अगस्त 1975 का है. यह RSS पर प्रतिबंध लगने के बाद यरवदा सेंट्रल जेल से लिखा गया था. इसमें देवरस ने इंदिरा गांधी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण को “मौके के अनुसार और संतुलित” बताया था. उन्होंने RSS पर लगाए गए आरोपों का जवाब देते हुए लिखा, “RSS का काम पूरे भारत के हर कोने तक फैला हुआ है. इसलिए देश के विकास के लिए संघ की इस शक्ति का सही उपयोग होना चाहिए.”

उन्होंने यह भी अपील की कि RSS पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए. साथ ही लिखा कि अगर इंदिरा गांधी उचित समझें, तो उनसे मुलाकात करके उन्हें खुशी होगी.

Excerpt from the first letter to Indira Gandhi, dated 22 August 1975 | Grab from Jairam Ramesh's submission
इंदिरा गांधी को लिखे पहले पत्र का अंश, तारीख 22 अगस्त 1975 | जयराम रमेश की प्रस्तुति से लिया गया

दूसरा पत्र 10 नवंबर 1975 का है. इसमें देवरस ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को वैध ठहराने के बाद उन्हें बधाई दी थी. उन्होंने फिर से RSS पर लगा प्रतिबंध हटाने की अपील की. साथ ही यह भी कहा कि RSS का जयप्रकाश नारायण आंदोलन से कोई संबंध नहीं है. उन्होंने लिखा, “संघ का इन आंदोलनों से कोई संबंध नहीं है.”

Excerpt from the second letter to Indira Gandhi, dated 10 November 1975 | Grab from Jairam Ramesh's submission
इंदिरा गांधी को लिखे दूसरे पत्र का अंश, तारीख 10 नवंबर 1975 | जयराम रमेश की ओर से पेश किए गए दस्तावेज़ से लिया गया

तीसरा पत्र आचार्य विनोबा भावे को लिखा गया था. इसमें देवरस ने उनसे कहा कि वे प्रधानमंत्री के मन में RSS को लेकर बनी “गलत धारणा” दूर करें, ताकि “RSS पर लगा प्रतिबंध हटाया जा सके और RSS तथा उसके स्वयंसेवक देश के हर क्षेत्र में चल रही विकास योजनाओं में भाग ले सकें.”

Deoras's letter to Vinoba Bhave | Grab from Jairam Ramesh's submission
विनोबा भावे को देवरस का पत्र | जयराम रमेश की अधीनता से लिया गया

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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