चेन्नई: चुनाव के बाद त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति बनने से तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) प्रमुख विजय ने गुरुवार को यहां राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अरलेकर से मुलाकात की. दो दिनों में यह उनकी दूसरी बैठक थी. विजय ने राज्यपाल से उनकी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने की मांग की.
लोक भवन की ओर से जारी बयान के मुताबिक, राज्यपाल ने विजय को बैठक के लिए बुलाया था.
बयान में कहा गया, “बैठक के दौरान माननीय राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सरकार बनाने के लिए तमिलनाडु विधानसभा में ज़रूरी बहुमत का समर्थन अभी साबित नहीं हुआ है.”
सूत्रों के मुताबिक विजय की पार्टी ने इस बात पर कानूनी राय मांगी है कि क्या वह राज्यपाल से सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का न्योता मांग सकती है और बाद में विधानसभा में बहुमत साबित कर सकती है.
बुधवार को राज्यपाल को दिए पत्र में विजय ने कहा था कि वह गठबंधन सरकार का नेतृत्व करेंगे, लेकिन उन्होंने 112 विधायकों के नाम ही सौंपे थे, जो बहुमत के आंकड़े से छह कम हैं. राज्यपाल ने बुधवार को भी उनसे बहुमत का सबूत लेकर आने को कहा था.
234-सदस्यीय विधानसभा में 4 मई को आए चुनाव नतीजों के बाद टीवीके 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कांग्रेस, जिसने पांच सीटें जीती हैं, ने चुनाव बाद टीवीके को समर्थन देने की पुष्टि की है. इससे कुल संख्या 113 तक पहुंच गई.
लेकिन विजय ने दो सीटों से चुनाव लड़ा और दोनों जीते हैं, इसलिए उन्हें एक सीट छोड़नी होगी. इसके बाद टीवीके-कांग्रेस गठबंधन की प्रभावी संख्या 112 रह जाएगी, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 118 से अभी भी छह कम है.
इस अनिश्चितता के बीच बुधवार को होने वाला संभावित शपथ ग्रहण समारोह टाल दिया गया है, क्योंकि वामपंथी दलों और वीसीके ने अभी तक टीवीके को समर्थन देने पर फैसला नहीं लिया है.
इस बीच चुनाव नतीजों के बाद विजय को दी गई पुलिस सुरक्षा बुधवार रात वापस ले ली गई और फिलहाल कई विधायक मामल्लापुरम के एक निजी रिसॉर्ट में ठहरे हुए हैं.
‘DMK छह महीने तक TVK को परेशान नहीं करेगी’
द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) नेता एम.के. स्टालिन ने बुधवार को कहा कि विजय को सरकार बनाने का मौका दिया जाना चाहिए और डीएमके छह महीने तक सरकार को परेशान नहीं करेगी.
इसे आगे बढ़ाते हुए गुरुवार को डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते टीवीके को सरकार बनाने का पहला मौका मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि संवैधानिक परंपरा और लोकतांत्रिक सिद्धांत यही कहते हैं कि जब किसी चुनाव पूर्व गठबंधन को बहुमत नहीं मिला हो, तब सबसे बड़ी पार्टी को बुलाया जाना चाहिए.
अन्नादुरई ने कहा, “किसी भी चुनाव पूर्व गठबंधन को बहुमत नहीं मिला है. किसी और ने सरकार बनाने का दावा भी पेश नहीं किया है. लेकिन सबसे बड़ी पार्टी विजय की टीवीके ने दावा किया है और उन्होंने 113 विधायकों का समर्थन दिखाया है.”
इस बीच, कांग्रेस और डीएमके ने राज्यपाल के इस रुख की आलोचना की कि विजय की टीवीके पहले पूरा बहुमत दिखाए. उनका कहना है कि नई सरकार को बहुमत विधानसभा में साबित करना होता है, राज्यपाल के सामने नहीं.
तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के नेता के. सेल्वापेरुन्थगई ने आरोप लगाया कि भाजपा नीत केंद्र सरकार “राज्यपालों का इस्तेमाल” कर चुनी हुई सरकारों के खिलाफ राज्य की राजनीति में दखल दे रही है.
एक्स पर जारी बयान में उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा टीवीके को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने में “देरी” करना संविधान के खिलाफ है और इसके पीछे गलत मंशा दिखाई देती है.
उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार बनाने का दावा करने वाली पार्टी को अपना बहुमत विधानसभा में साबित करना चाहिए, राजभवन में नहीं. तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी की ओर से उन्होंने राज्यपाल से तुरंत टीवीके प्रमुख विजय को सरकार बनाने के लिए बुलाने की मांग की.
कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “मुझे बहुत अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि राज्यपाल, जिन्हें संवैधानिक समझ का केंद्र माना जाता है, उनके पास तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए बुलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.”
उन्होंने गुरुवार को मीडिया से कहा, “इसमें कोई सवाल ही नहीं है. कानून, परंपरा, संवैधानिक संस्कृति और पहले की मिसालों में ऐसा कई बार हो चुका है.”
डीएमके की सहयोगी सीपीआई ने भी राज्यपाल से टीवीके को सरकार बनाने के लिए बुलाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने का मौका देने की मांग की है. पार्टी ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि शपथ से पहले बहुमत साबित करने की शर्त असंवैधानिक है.
जहां कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन दे दिया है, वहीं डीएमके के दूसरे सहयोगी दल—सीपीआईएम और वीसीके ने अभी समर्थन पर फैसला नहीं किया है.
टीवीके ने सीपीआई को भी समर्थन मांगते हुए पत्र भेजा है और इस पर फैसला लेने के लिए शुक्रवार को राज्य समिति की बैठक होगी.
इससे पहले वीसीके प्रमुख थोल तिरुमावलवन ने कहा था कि उनकी पार्टी ने अभी टीवीके को समर्थन देने पर चर्चा नहीं की है. वाम दलों और वीसीके नेताओं ने गुरुवार को एम.के. स्टालिन से भी मुलाकात की.
डीएमके की सहयोगी और मक्कल नीधि मय्यम नेता कमल हासन ने भी स्टालिन के इस रुख का समर्थन किया कि विजय को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए.
कमल ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम ने 108 सीटें जीती हैं. उन्हें सरकार बनाने के लिए नहीं बुलाना तमिलनाडु की जनता के जनादेश का अपमान होगा.”
उन्होंने यह भी कहा कि 233 निर्वाचित सदस्य अभी तक शपथ नहीं ले पाए हैं और एस.आर. बोम्मई मामले का हवाला देते हुए कहा कि बहुमत विधानसभा में साबित होना चाहिए, राजभवन में नहीं.
इस बीच, टीवीके के कार्यकर्ता जल्द सरकार बनने को लेकर आशावादी बने हुए हैं.
टीवीके फिशरीज विंग के जिला सचिव गणेशन ने भरोसा जताया कि विजय के नेतृत्व में पार्टी सरकार बनाएगी. उन्होंने मीडिया से कहा, “हमें पूरा भरोसा है कि टीवीके सरकार बनाएगी. हमारे नेता विजय जरूर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनेंगे.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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