नई दिल्ली: राजनीति में आए सिर्फ आठ हफ्ते बाद बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने गुरुवार को राज्य मंत्री पद की शपथ ली. 15 अप्रैल को जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और जेडी(यू) के वरिष्ठ नेता विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव डिप्टी सीएम बने थे, तब निशांत कैबिनेट से बाहर रहे थे.
उस समय नीतीश कुमार को बेटे के मंत्री बनने पर आपत्ति थी क्योंकि इससे उन पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लग सकता था, लेकिन बाद में जेडी(यू) प्रमुख मान गए.
पटना में हुए शपथ ग्रहण समारोह में बीजेपी, जेडी(यू) और एनडीए के अन्य सहयोगी दलों के मंत्रियों ने शपथ ली. यह विस्तार नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद बिहार कैबिनेट में बड़े फेरबदल के तहत हुआ.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गांधी मैदान में हुए इस कार्यक्रम में शामिल हुए. उनके साथ गृह मंत्री अमित शाह समेत कई वरिष्ठ बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री मौजूद थे.
कई जेडी(यू) नेताओं का कहना है कि पहले खुद निशांत कुमार भी कैबिनेट में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे.

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने दिप्रिंट से कहा, “हम कई महीनों से उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे थे. आखिरकार सद्भाव यात्रा शुरू करने के बाद वे मान गए. आज के लिए यात्रा रोकी गई है और 9 तारीख से फिर शुरू होगी. पहले उन्होंने कैबिनेट में शामिल होने से मना कर दिया था, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि पार्टी की स्थिरता और भविष्य के लिए यह जरूरी है, तब जाकर वे तैयार हुए.”
निशांत ने रविवार को अपनी पहली बड़ी राजनीतिक पहल ‘सद्भाव यात्रा’ शुरू की थी, जिसका मकसद जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करना था.
पार्टी नेता ने कहा कि यात्रा के दौरान जेडी(यू) नेता निशांत को समझाने में सफल रहे.
उन्होंने कहा, “यात्रा के दौरान उन्होंने कई कार्यकर्ताओं और आम लोगों से मुलाकात की. लोग अपनी रोजमर्रा की समस्याएं लेकर उनके पास आए. तब नेताओं ने उन्हें समझाया कि बिना किसी आधिकारिक पद के दूसरे मंत्रियों या सरकार को निर्देश देना ठीक नहीं होगा. अगर वे बदलाव लाना चाहते हैं और लोगों की मदद करना चाहते हैं, तो उन्हें सरकार का हिस्सा बनना पड़ेगा.”
इतना ही नहीं, कई लोगों का मानना था कि सरकार में शामिल होने से पार्टी को भी फायदा होगा, क्योंकि निशांत अब जेडी(यू) के कामकाज में सक्रिय हो चुके हैं.
एक दूसरे नेता ने कहा, “जिस तरह निशांत ने यात्रा शुरू की और कार्यकर्ताओं से जुड़ाव बनाया, उससे उनकी प्रतिबद्धता दिखती है. उनका शपथ लेना और कैबिनेट का हिस्सा बनना उत्तराधिकार की दिशा में एक और कदम माना जा सकता है.”
जेडी(यू) के भीतर कई लोग मानते हैं कि राज्य कैबिनेट में उनकी एंट्री भविष्य में नेतृत्व संभालने की तैयारी है, ताकि नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ सके.
निशांत ने मार्च में आधिकारिक तौर पर जेडी(यू) जॉइन करके राजनीति में कदम रखा था. उस समय उनके पिता मौजूद नहीं थे.
जेडी(यू) नेताओं के मुताबिक निशांत पहले लोगों का भरोसा और समर्थन “कमाकर” बिहार कैबिनेट में शामिल होना चाहते थे, लेकिन यात्रा शुरू होने के बाद वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें बताया कि पार्टी कार्यकर्ता चाहते हैं कि वे सरकार का हिस्सा बनें.
एक दूसरे नेता ने कहा, “निशांत बिहार की राजनीति में तभी आए जब उनके पिता ने राज्यसभा जाने का फैसला किया. अब जब नीतीश दिल्ली चले गए हैं, निशांत पार्टी को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहते हैं. नेताओं ने उन्हें समझाया कि खासकर इस समय कैबिनेट का हिस्सा बनना और जेडी(यू) के लिए काम करना कितना ज़रूरी है.”
एक तीसरे वरिष्ठ नेता के मुताबिक जेडी(यू) के भीतर इस समय कई गुट हैं और उनमें से एक गुट लगातार चाहता था कि निशांत कम से कम कैबिनेट में ज़रूर शामिल हों.
उन्होंने कहा, “कुछ नेताओं को चिंता है कि बीजेपी को पूरा नियंत्रण और अपना मुख्यमंत्री मिलने के बाद वह दूसरे राज्यों की तरह अपनी राजनीतिक शैली लागू करना चाहेगी. इसलिए ज़रूरी हो जाता है कि निशांत सरकार के नियमित कामकाज का हिस्सा रहें.”
नेता ने आगे कहा कि नीतीश कुमार के केंद्र जाने के बाद निराश कार्यकर्ताओं को निशांत के इस कदम से नई ऊर्जा मिलेगी. उन्होंने कहा, “यह समझदारी भरा फैसला है और इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और उनमें नई ऊर्जा आएगी.”
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