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Thursday, 4 June, 2026
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विरोध के लिए ‘इज़ाज़त’ वाले आदेश पर हरियाणा कांग्रेस में नाराजगी, हुड्डा ने किया विरोध

AICC के निर्देश के कुछ दिन बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता हुड्डा ने साफ कहा कि विधायक अपने क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेह हैं, उन्हें चुप नहीं कराया जा सकता.

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गुरुग्राम: हरियाणा में कांग्रेस नेताओं के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के उस पत्र को लेकर नाराज़गी है, जिसमें विरोध-प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रमों के लिए प्रदेश इकाई से अनुमति लेने को कहा गया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस फैसले का विरोध करने वालों में सबसे आगे हैं.

28 मई को जारी इस पत्र पर एआईसीसी प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद के हस्ताक्षर हैं, जो अब कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष हैं. यह पत्र हरियाणा के सभी सांसदों, विधायकों, पूर्व सांसदों और विधायकों, जिला कांग्रेस कमेटी (डीसीसी) अध्यक्षों, पदाधिकारियों, विभिन्न विभागों, प्रकोष्ठों, विंगों और पार्टी कार्यकर्ताओं को भेजा गया था.

नई दिल्ली स्थित एआईसीसी के इंदिरा भवन कार्यालय से जारी इस पत्र में कहा गया है कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एचपीसीसी) को पहले सूचना दिए बिना और उसकी मंजूरी लिए बिना कांग्रेस के नाम पर कोई आंदोलन या सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाएगा.

बुधवार को चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए हुड्डा ने कहा कि यह आदेश स्थानीय मुद्दों पर अपने क्षेत्र में प्रदर्शन करने वाले विधायकों पर लागू नहीं होता. यह केवल राज्य स्तर के प्रदर्शन, धरना और प्रेस कॉन्फ्रेंस पर लागू है.

हुड्डा ने गुरुवार को दिप्रिंट से कहा, “पार्टी अनुशासन ज़रूरी है. जब भी राज्य स्तर पर कोई प्रदर्शन, विरोध या प्रेस कॉन्फ्रेंस हो, तो उसका समन्वय होना चाहिए, लेकिन यह नियम जिला या विधानसभा क्षेत्र स्तर के कार्यक्रमों पर लागू नहीं होना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “विधायकों और सांसदों को अपने क्षेत्र की जनता के मुद्दे उठाने होते हैं. उन्हें अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याएं उठाने से नहीं रोका जा सकता.”

निर्देश में तीन खास बातें कही गई थीं. पहला, किसी भी प्रस्तावित कार्यक्रम की पूरी जानकारी पहले से एचपीसीसी कार्यालय को देनी होगी. दूसरा, किसी भी सार्वजनिक घोषणा या कार्यक्रम से पहले एचपीसीसी की मंजूरी लेनी होगी. तीसरा, जिला और राज्य नेतृत्व के साथ हर स्तर पर समन्वय सुनिश्चित करना होगा.

हरिप्रसाद ने इसके पीछे “बेहतर समन्वय, संगठनात्मक अनुशासन, एक जैसी राजनीतिक लाइन, मीडिया प्रबंधन और प्रभावी राजनीतिक रणनीति” को कारण बताया.

इस पत्र की प्रतिलिपि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष, कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता और हरियाणा की अनुशासन समिति के अध्यक्ष को भी भेजी गई थी.

थानेसर से कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने द प्रिंट को बताया कि कई विधायकों को इस पत्र पर आपत्ति थी और उन्होंने अपनी बात मीडिया में भी रखी.

अरोड़ा ने कहा, “मैंने अपनी आपत्तियां रखीं और रोहतक के विधायक भारत भूषण बत्रा ने भी इस पर बात की.”

उन्होंने कहा, “पत्र में कहा गया था कि विधायक बिना अनुमति प्रेस कॉन्फ्रेंस या विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते, लेकिन कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने साफ कर दिया कि विधायक और सांसद अपने क्षेत्र के लोगों के मुद्दे उठाने के लिए ऐसे कार्यक्रम कर सकते हैं.”

बत्रा ने भी अरोड़ा की बात का समर्थन किया. गुरुवार को दिप्रिंट से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन विधायकों को अपने क्षेत्र की जनता की समस्याएं उठाने से नहीं रोका जा सकता. हरिप्रसाद, जो अब कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल चुके हैं, उन्होंने दिप्रिंट के फोन कॉल और संदेशों का जवाब नहीं दिया.

राज्य नेतृत्व ने आदेश का बचाव किया

हालांकि, हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने इस निर्देश का खुलकर बचाव किया.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “इस पत्र का एकमात्र उद्देश्य पार्टी में अनुशासन बनाए रखना है और इसमें दिए गए निर्देशों का किसी ने विरोध नहीं किया है.”

उन्होंने कहा कि यह निर्देश मार्च में कुरुक्षेत्र में आयोजित उस प्रशिक्षण कार्यक्रम का ही विस्तार है, जिसमें एआईसीसी द्वारा नियुक्त डीसीसी अध्यक्षों को प्रशिक्षण दिया गया था और राहुल गांधी ने उन्हें संबोधित किया था.

उन्होंने कहा, “डीसीसी अध्यक्षों से कहा गया था कि भविष्य में जिले में पार्टी के सभी कार्यक्रम उनके बैनर के तहत ही आयोजित किए जाएंगे.”

राव ने कहा कि इसका उद्देश्य उस पुराने दौर को वापस आने से रोकना है, जब अलग-अलग गुट अपने-अपने कार्यक्रम चलाते थे और जनता के सामने पार्टी की अलग-अलग तस्वीर पेश होती थी.

उन्होंने कहा, “इस पत्र का मकसद सिर्फ यह सुनिश्चित करना था कि अलग-अलग गुटों द्वारा अलग-अलग कार्यक्रम चलाने की पुरानी व्यवस्था वापस न आए और विरोध-प्रदर्शनों तथा अन्य कार्यक्रमों में पार्टी एकजुट दिखाई दे.”

जब उनसे पूछा गया कि कम से कम दो विधायकों ने खुले तौर पर इस पत्र पर आपत्ति जताई है और सीएलपी नेता हुड्डा ने कहा है कि विधायकों को क्षेत्रीय कार्यक्रम करने से नहीं रोका जा सकता, तो राव ने कहा कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई बात नहीं आई है.

उन्होंने कहा, “अगर इस पत्र को लेकर कोई गलतफहमी है, तो उसे दूर कर लिया जाएगा.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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