नई दिल्ली: केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को इस आलोचना का जवाब दिया कि मोदी सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करने में विफल रही है. उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में मंत्रालय का बजट दोगुना हुआ है. हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि छात्रवृत्ति वितरण और वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण में अभी भी कुछ कमियां हैं.
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित मंत्रालय के ‘रिफॉर्म्स उत्सव’ में बोलते हुए रिजिजू ने कहा कि मोदी सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया यह पहला ऐसा कार्यक्रम है. उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय का वार्षिक बजट 2014 में 1,949 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 4,115 करोड़ रुपये हो गया है. यह 111 प्रतिशत की वृद्धि है.
रिजिजू ने कहा, “मुझे एक भी उदाहरण बताइए, जहां भारत में किसी व्यक्ति को अपनी पहचान या धार्मिक पृष्ठभूमि के कारण असुरक्षित महसूस होने पर देश छोड़ना पड़ा हो. दुनिया के कई देशों से लोग समस्याओं के कारण यूरोप में शरण लेने पहुंचे हैं, लेकिन भारत से धार्मिक उत्पीड़न की वजह से कोई नहीं गया है.”
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब देश और विदेश में लगातार यह आरोप लगाए जाते रहे हैं कि भाजपा सरकार के दौरान अल्पसंख्यकों की स्थिति कमजोर हुई है.
उदाहरण के तौर पर, ह्यूमन राइट्स वॉच ने अपनी वर्ल्ड रिपोर्ट 2024 में कहा था कि भाजपा सरकार की नीतियों के कारण अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है और भय का माहौल बना है.
इसी तरह, अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने भी कहा था कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार खराब हुई है. आयोग ने मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों और दलितों के खिलाफ होने वाली सांप्रदायिक हिंसा को लेकर सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे.
देश के भीतर विपक्ष भी अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर सरकार पर लगातार हमला करता रहा है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी कई बार आरोप लगा चुके हैं कि भाजपा दलितों, अल्पसंख्यकों और गरीबों के खिलाफ है. वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले बने इंडिया गठबंधन ने भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ फैलाई जा रही नफरत और हिंसा को रोकने का वादा किया था.
दूसरी ओर, भाजपा कांग्रेस पर अल्पसंख्यक तुष्टिकरण और सांप्रदायिक राजनीति करने का आरोप लगाती रही है.
‘गलत जानकारी मत फैलाइए’
रिजिजू ने कहा कि सरकार के कामकाज और लोगों की धारणा के बीच जो अंतर है, उसकी वजह एकतरफा मीडिया माहौल और देश की छवि को विदेशों में खराब करने के लिए चलाया जा रहा राजनीतिक अभियान है.
उन्होंने गुरुवार को विपक्ष को संबोधित करते हुए कहा, “झूठ मत बोलिए, गलत जानकारी मत फैलाइए. सरकार की आलोचना कीजिए, सरकारी नीतियों की आलोचना कीजिए, इसमें कोई समस्या नहीं है. लेकिन झूठ मत बोलिए.”
उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्थिति को कमजोर करने के लिए विदेशों में भारत की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “भारत के कुछ राजनीतिक नेता भी उस अभियान का समर्थन कर रहे हैं.”
जब उनसे पूछा गया कि मंत्रालय ने अल्पसंख्यक समुदायों में उत्पीड़न की भावना को दूर करने के लिए और क्या किया है, तो रिजिजू ने कहा, “सरकार हर दिन हजारों जनसंपर्क और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रही है. लेकिन अच्छी खबर खबर नहीं बनती, जबकि बुरी खबर बड़ी खबर बन जाती है.”
मंत्रालय के सचिव श्रीवत्स कृष्णा ने कहा कि यह समस्या आंकड़ों और धारणा के बीच के अंतर की है.
उन्होंने कहा, “आंकड़ों को देखिए. क्या यह सरकार अल्पसंख्यकों के खिलाफ है? जब सड़क बनती है, जब प्रशिक्षण दिया जाता है, तो क्या वह केवल बहुसंख्यक समुदाय के लिए किया जाता है?”
उन्होंने कहा कि मंत्रालय के तीसरे कार्यकाल का लक्ष्य “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म” है और इनमें सबसे मुश्किल काम लोगों तक सही जानकारी पहुंचाना है.
मंत्रालय की प्रमुख योजनाओं में से एक पीएम विकास (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन) है. यह अल्पसंख्यक युवाओं के लिए कौशल विकास योजना है, जिसके तहत सिलाई, इलेक्ट्रॉनिक्स मरम्मत और अन्य व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जाता है.
गुरुवार के कार्यक्रम में मंत्रालय ने एकस्टेप फाउंडेशन के साथ एक समझौता किया. इस संस्था की सह-स्थापना इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार परियोजना के प्रमुख रहे नंदन नीलेकणी ने की थी.
इस समझौते के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके पीएम विकास योजना के प्रशिक्षित युवाओं को उनके घर के पास रोजगार दिलाने की कोशिश की जाएगी, ताकि उन्हें काम के लिए दूर-दराज के शहरों में न जाना पड़े.
मंत्रालय ने कार्यक्रम में AI आधारित चैटबॉट का भी प्रदर्शन किया. ये चैटबॉट ग्नानी और सरवम नामक दो भारतीय AI कंपनियों की मदद से तैयार किए गए हैं, जिन्हें सरकार ने सूचीबद्ध किया है.
ये चैटबॉट कई भाषाओं में मंत्रालय की योजनाओं से जुड़े सवालों के जवाब दे सकेंगे. मंत्रालय को उम्मीद है कि अगले छह महीनों में इन्हें पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा.
चुनौतियां
वक्फ पोर्टल को लेकर, जो वक्फ संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत एक साल पहले शुरू किया गया केंद्रीकृत डिजिटल रजिस्टर है और जिसके तहत सभी राज्य वक्फ बोर्डों को धार्मिक ट्रस्ट की संपत्तियों का विवरण अपलोड करना होता है—रिजिजू ने कहा कि अब तक लगभग 50-55 प्रतिशत संपत्तियों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है.
उन्होंने कहा कि दस्तावेजों में कमियां होने के कारण काम की रफ्तार धीमी है.
रिजिजू ने कहा, “कुछ जगहों पर कागज़ों में हज़ारों एकड़ ज़मीन दर्ज है, लेकिन जमीन पर वह मौजूद नहीं है. यह एक लंबी और मेहनत वाली प्रक्रिया है. लेकिन यह काम पूरा होगा.”
वक्फ संशोधन अधिनियम को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के सबसे विवादित कानूनों में से एक माना जाता है. मुस्लिम संगठनों और विपक्षी दलों ने इसका विरोध करते हुए इसे अल्पसंख्यकों की संपत्ति के अधिकारों पर हमला बताया था.
इसके अलावा छात्रवृत्ति योजना के मुद्दे पर भी रिजिजू ने चिंता जताई. यह मंत्रालय की सबसे बड़ी बजट वाली योजना है, जिसके तहत मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों के छात्रों को प्री-मैट्रिक, पोस्ट-मैट्रिक और मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति दी जाती है.
रिजिजू ने माना कि कई राज्यों में सीबीआई जांच के कारण इस योजना को नुकसान पहुंचा है. जांच में सामने आया था कि कुछ अल्पसंख्यक संस्थानों में ऐसे छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति ली गई, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं थे.
उन्होंने कहा, “काश छात्रवृत्ति से जुड़े ये मामले सामने नहीं आते. जो कुछ हुआ है, मैं चाहता हूं कि उसका जल्द समाधान हो ताकि हम आगे बढ़ सकें.” उन्होंने इसे “अधूरा काम” बताया.
केरल के मुनंबम विवाद पर भी रिजिजू ने बात की. इस मामले में कोच्चि के पास समुद्र तट क्षेत्र में रहने वाले कई ईसाई किसान परिवार बेदखली के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं. राज्य वक्फ बोर्ड ने करीब 400 एकड़ जमीन पर अपना दावा किया है, जिस पर ये परिवार पीढ़ियों से रह रहे हैं और खेती कर रहे हैं.
यह मामला अब बड़ा विवाद बन चुका है. एक तरफ राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड हैं, जबकि दूसरी तरफ किसान हैं, जिन्हें स्थानीय भाजपा नेताओं और कैथोलिक चर्च का समर्थन मिला हुआ है.
रिजिजू ने कहा कि कानून मंत्रालय इस मामले की जांच कर रहा है.
उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी के साथ अन्याय न हो और राज्य अधिकारियों की गलतियों के कारण किसी को परेशानी न उठानी पड़े.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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